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सरकार को लताड़, बंद हो हिंसा और भड़काऊ बयानबाजी

Modi_AmitShahवाशिंगटन – अमेरिकी कांग्रेस के एक पैनल ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और नेताओं के भड़काऊ बयानों को लेकर भारत सरकार की तीखी आलोचना की है।

भाजपा सरकार को लताड़ लगाते हुए पैनल ने कहा है कि 2014 आम चुनाव के नतीजे आने के बाद ऐसी घटनाओं में इजाफा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से ऐसे नेताओं को सार्वजनिक तौर पर फटकार लगाने और धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए भारत पर दबाव बढ़ाने को कहा गया है।

अमेरिका की अंतराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने गुरुवार को जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में यह बात कही है। धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भारत की आलोचना करने वाली इस रिपोर्ट पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे खारिज कर दिया है। विदेश मामलों के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, ‘यह रिपोर्ट भारत, इसके संविधान और समाज के बारे में सीमित समझदारी पर आधाारित है।’ उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी रिपोर्टों पर संज्ञान नहीं लेती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा की सरकार बनने के बाद से धार्मिक अल्पसंख्यकों पर नेताओं ने अपमानजनक टिप्पणियां की। हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने जबरन धर्मांतरण और हमलों जैसी कार्रवाइयों को अंजाम दिया। रिपोर्ट में विहिप के घर वापसी कार्यक्रम और भाजपा नेताओं के मुसलमानों और ईसाइयों के बारे में दिए गए अपमानजनक बयानों का हवाला दिया गया है।

रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को सकारात्मक कदम बताया गया है जिसमें उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात कही थी। फरवरी में प्रधानमंत्री ने चर्चों पर हमले की निंदा करते हुए अल्पसंख्यकों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया था। हालांकि रिपोर्ट में इस बयान को गुजरात में 2002 में हुए दंगों से जोड़ते हुए कहा गया है कि मोदी उस वक्त राज्य के मुख्यमंत्री थे और उन पर दंगे भड़काने का आरोप लगा था।

आयोग ने इस साल भी भारत को टियर-2 देशों की सूची में ही जगह दी है। भारत 2009 से इसी सूची में बना हुआ है। इस श्रेणी में अफगानिस्तान, रूस, क्यूबा, मलेशिया और तुर्की सहित कुल 10 देश हैं। यह रिपोर्ट मुख्य तौर पर धर्मगुरुओं और गैरसरकारी संगठनों से बातचीत पर तैयार की गई है।

संवेदनशील राज्य

रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को धार्मिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्य बताते हुए यहां धार्मिक हमले की आशंका जताई गई है।

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