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हरदा कलेक्टर ने किया सपरिवार रक्तदान

Collector   family blood donationहरदा [ TNN ] हरदा में ब्लड बैंक की स्थांपना के बाद से अभी तक यहां के रक्तदाताओं द्वारा 4 हजार 365 ब्लड यूनिट का रक्त दान किया है। कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव ने मंगलवार को ब्लड बैक पहुंचकर रक्तदान किया । हरदा में कलेक्टर ने तीसरी बार रक्तदान किया है। उनके साथ उनकी पत्नी एवं दोनो पुत्रों ने भी रक्तदान किया। कलेक्टर ने यहां ब्लड कंपोनेट सेपरेटर क्रय करनें के लिए जरूरी कार्यवाही के निर्देष सिविल सर्जन डाॅ एसके संेगर को दिए।सीएमएचओ डाॅ जेएस आवास्या भी यहां मौजूद थे।

ब्लड बैंक प्रभारी डाॅ रूबी खान ने बताया कि रक्तदान जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं।

रक्तदान द्वारा किसी को नवजीवन देकर जो आत्मिक आनन्द मिलता है उसका न तो कोई मूल्य ऑंका जा सकता है न ही उसे शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है। खून में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता रक्त प्रवाह में बाधा डालती है। रक्तदान से कोलेस्ट्रॉल की अधिकता में कमी आती है । रक्तदान शरीर द्वारा रक्त बनाने की क्रिया को भी तीव्र कर देता है। रक्त के कणों का जीवन सिर्फ 90 से 120 दिन तक का होता है।

प्रतिदिन हमारे शरीर में पुराने रक्त का क्षय होता रहता है और नया रक्त बनता जाता है इसका हमें कोई अनुभव नहीं होता। बहुत से स्त्री-पुरूषों ने नियमित रूप से रक्त दान करने का क्रम बना रखा है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने से रक्त की हमेशा उपलब्धता बनी रहे कोई सुहागिन विधवा न बने, वृद्व मॉ-बाप बेसहारा न हो, खिलता यौवन असमय ही काल कलवित न हो आज किसी को आपके रक्त की आवश्यकता है, हो सकता है कल आपको किसी के रक्त की आवश्यकता हो अतः निडर होकर स्वैच्छिक रक्त दान करें।अनायास दुर्घटना या बीमारी का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है

। आज हम सभी शिक्षित व सभ्य समाज के नागरिक है, जो केवल अपनी नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी सोचते हैं तो क्यों नहीं हम रक्तदान के पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करें और लोगों को जीवनदान दें। रक्तदान हेतु नाको, रेडक्रास जैसी कई संस्थाएँ लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है परंतु इनके प्रयास तभी सार्थक होंगे, जब हम स्वयं रक्तदान करने के लिए आगे आएँगे और अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इस हेतु आगे आने के लिए प्रेरित करेंगे।

क्या कहते हैं आँकड़े-
हरदा में ब्लड बैंक की स्थापना से अभी तक 4 हजार 365 ब्लड यूनिट का लोगों ने रक्त दान किया है। इसके बाद भी रेयर ग्रुप के रक्त की जरूरत होने पर इसका इंतजार रहता है। यह इंतजार जल्दी ही खत्म हो सकता है अगर हम सभी संकल्प लें कि कम से कम स्वयं तो रक्तदान जरूर करेंगे।
खून चढाने की जरूरत-जीवन बचाने के लिए खून चढाने की जरूरत पडती है। दुर्घटना, रक्तस्त्राव, प्रसवकाल और ऑपरेशन आदि अवसरों में शामिल है, जिनके कारण अत्यधिक खून बह सकता है और इस अवसर पर उन लोगों को खून की आवश्यकता पडती है। थेलेसिमिया, ल्यूकिमिया, हीमोफिलिया जैसे अनेंक रोगों से पीडित व्यक्तियों के शरीर को भी बार-बार रक्त की आवश्यकता रहती है अन्यथा उनका जीवन खतरे में रहता है। जिसके कारण उनको खून चढाना अनिवार्य हो जाता है।

रक्तदान की आवश्यकता-
इस जीवनदायी रक्त को एकत्रित करने का एकमात्र उपाय है रक्तदान। स्वस्थ लोगों द्वारा किये गये रक्तदान का उपयोग जरूरतमंद लोगों को खून चढानें के लिये किया जाता है। अनेक कारणों से जैसे उन्नत सर्जरी के बढतें मामलों तथा फैलती जा रही जनसंख्या में बढती जा रही बीमारियों आदि से खून चढाने की जरूरत में कई गुना वृद्वि हुई है। लेकिन रक्तदाताओं की कमी वैसी ही बनी हुई है। लोगों की यह धारणा है कि रक्तदान से कमजोरी आती है पूरी तरह बेबूनियाद है। आजकल चिकित्सा क्षेत्र में कॅम्पोनेन्ट थैरेपी विकसित हो गई है, इसके अन्तर्गत रक्त की इकाई से रक्त के विभिन्न घटकों को पृथक कर जिस रोगी को जिस रक्त की आवश्यकता है दिया जा सकता है इस प्रकार रक्त की एक इकाई कई मरीजों के उयोग में आ सकती है।

रक्त कौन दे सकता है?
ऐसा प्रत्येक पुरूष अथवा महिला -जिसकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो,जिसका वजन 45 किलों से अधिक हो,जो क्षय रोग, रतिरोग, पीलिया, मलेरिया, मधुमेंह, एड्स आदि बीमारियों से पीडित नहीं हो, जिसने पिछले तीन माह से रक्तदान नहीं किया हो, रक्तदाता ने शराब अथवा कोई नशीलीदवा न ली हो, गर्भावस्था तथा पूर्णावधि के प्रसव के पश्चात शिशु को दूध पिलाने की 6 माह की अवधि में किसी स्त्री से रक्तदान स्वीकार नहीं किया जाता है।

कितना रक्त लिया जाता है?
प्रतिदिन हमारे शरीर में पुराने रक्त का क्षय होता रहता है ओर प्रतिदिन नया रक्त बनता है रहता है, एक बार में 350 मिलीलीटर यानि डेढ पाव रक्त ही लिया जाता है (कुल रक्त का 20 वॉं भाग) शरीर 24 घंटों में दिये गये रक्त के तरल भाग की पूर्ति कर लेता है, ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर में रक्त 4 – 5 सप्ताह तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

रक्त दान कहॉं करें?
रक्तदान किसी भी लाईसेन्स युक्त ब्लड बैंक में किया जा सकता है। हरदा के जिला चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक सहित राज्य के सरकारी तथा निजी क्षेत्र में लाईसेन्स युक्त ब्लड बैंक है। इसके अलावा मान्यता प्राइज एजेन्सियों जैसे रोटरी क्लब, लायंस क्लब आदि द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है। इनमें से किसी भी अधिकृत सील पर आप स्वैच्छा से निश्चित होकर रक्तदान कर सकते हैं।
रक्त संचार से पहले जांच? ब्लड बैंक में जारी करने से पहले रक्त की प्रत्येक इकाई का परीक्षण मलेरिया, सिफलिस, हिपेटाइटिस (सी) व एच.आई.वी. के लिए किया जाता है ताकि सुरक्षित रक्त ही मरीज को पहुंचे।

क्या रक्तदान कष्टकारक या हानिकारक होता है?

रक्त देते समय कोई पीडा नहीं होती है, रक्तदान करने में 5 से 10 मिनट का समय लगता है, रक्त देने के पश्चात आप सभी कार्य सामान्य रूप से कर सकते हैं, रक्तदाता के सामान्य स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडता है।

स्वेच्छा से दिया गया रक्त, बेचने वाले के रक्त से अच्छा होता है क्योंकि-स्वेच्छा से रक्त देने वाला मनुष्य, मानव मात्र की सहायता के लिये रक्त देता है, न की धन के लालच से इसलिए वह किसी प्रकार की वर्तमान या पुरानी बीमारी का बतानें में नहीं हिचकिचाता, जिससे रक्त प्राइज करने वाले का जीवन खतरें में पड सकता हो। रक्त बेचने वाला धन के लालच में अपने हर रोग को छिपाने का प्रयत्न करता है। पेशेवर रक्तदाता बिना अन्तराल के जल्दी-जल्दी रक्तदान करते हैं जिससे उनके रक्त में गुणवता का भी आभाव हो जाता है।

रक्तदाता कार्ड-
स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले व्यक्ति को रक्तदान करने के तुरन्त बाद रक्तदाता ऋण पत्र प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। जिससे वह रक्तदान की तिथि से 12 महिनें तक आवश्यकता पडने पर स्वंय या अपने परिवारजन के लिये ब्लड बैंक से एक यूनिट रक्त प्राइज कर सकता है अगर आपका या आपके सगे- संबन्धियों को खून चढाने की नौबत आये तो खून की बोतल या थैली पर एच.आई.वी. मुक्त की मोहर अवश्य देखें।

रिपोर्ट -विट्ठल माहेश्वरी 

 

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