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हरियाणा: बीजेपी को मोदी और कांग्रेस को हुड्डा पर भरोसा

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चंडीगढ़ [ TNN ] हरियाणा के मतदाताओं को पिछले 10 सालों से चला आ रहा कांग्रेस शासित भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नेतृत्व पसंद है या वे नई सरकार चाहते हैं, तय करने के लिए बुधवार को मतदान होगा। पहली नवंबर 1966 में हुए गठन के बाद से अब तक हरियाणा में पहली बार ज्यादा कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। बीजेपी जो अब तक राज्य में कमजोर स्थिति में थी, चंद दिनों में सारे राजनीतिक सिद्धांतों को झूठा साबित करते हुए ताकतवर राजनीतिक दल बन कर सामने खड़ी हुई है।

बीजेपी के ताकतवर बनने की वजह बने हैं प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी। जिन्होंने खुद भी लोकसभा चुनाव में पूरा देश घूमकर रिकार्ड सीटें जीतीं और पहली बार केंद्र में बीजेपी बहुमत वाली सरकार बनाई है। 2005 से राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस इस बार विरोधियों से कड़ी टक्कर झेल रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता बचाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। उधर, चौटाला परिवार की इंडियन नेशनल लोकदल ताकत बढ़ी हुई महसूस कर रही है और बीजेपी व कांग्रेस दोनों को कड़ी चुनौती दे रही है।

हरियाणा में 90 विधानसभा सीटें हैं। 90 में से 73 विधानसभा सीटें सामान्य वर्ग की और 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। चुनाव मैदान में कुल 1351 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें 109 महिलाएं हैं। 603 उम्मीदवार स्वतंत्र उम्मीदवार हैं। राज्य में 16 हजार 357 पोलिंग बूथ हैं। एक करोड़ 63 लाख 18 हजार 577 रजिस्टर्ड मतदाता हैं। इनमें से 87 लाख 37 हजार 116 पुरुष और 74 लाख 79 हजार 439 महिलाएं हैं।

कांग्रेस और बीजेपी सभी 90 सीटों पर लड़ रही हैं जबकि इनेलो ने 88 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। बसपा 87 तो हरियाणा जनहित कांग्रेस 65 सीटों पर दांव खेल रही है। सीपीआई और सीपीएम के उम्मीदवार क्रमश: 14 व 17 सीटों पर किस्मत आजमा रहे हैं। राज्य में नारनौल विधानसभा सीट में सबसे कम एक लाख 26 हजार 804 वोटर हैं जबकि बादशाहपुर में सबसे ज्यादा 3 लाख 16 हजार 567 वोटर हैं।

कौन क्या कह रहा वोटें लेने को:
कांग्रेस को शराफत व विकास पर भरोसा: भूपेंद्र सिंह हुड्डा दावा कर रहे हैं कि उनके नेतृत्व में हरियाणा ने बहुत ज्यादा विकास देखा है। वह दस साल की उपलब्धियों खासकर विकास के दम पर पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व करते रहे हैं। उन्हीं की बोली कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गंाधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी बोलते आए हैं। पार्टी केंद्र में महंगाई के मुद्दे को उठा रही है और ओमप्रकाश चौटाला के शासन में हुए भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद को लेकर हमले कर रही है।

इनेलो को जाट और सहानुभूति वोटों की उम्मीद: इनेलो जेल में बैठे पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला व अजय सिंह चौटाला के पक्ष में सहानुभूति की लहर पर सवार और करो या मरो की लड़ाई लड़ रही है। उसने जीत के अवसर बढ़ाने की अपनी ललक के चलते कई दलबदलू उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। पार्टी पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के नाम पर भी वोट मांगने से भी पीछे नहीं रही जिनकी 100वीं जयंती पर 25 सितंबर को जींद में विशाल रैली कर पार्टी की स्थिति मजबूत करने की कोशिश की गई। हरियाणा की तकरीबन 25 फीसदी जनसंख्या जाट है और इनेलो जाट वोटें अधिकतर अपने पक्ष में मिलने की उम्मीद लगाए है।

बीजेपी नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार: बीजेपी राज्य में पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से के भरोसे पर निर्भर है। बीजेपी ने हुड्डा सरकार के 10 सालों का कुशासन करार दिया है। मोदी पूरे राज्य भर में जबर्दस्त कैंपेन चला हुड्डा व चौटाला सहित हजकां को लेकर वंशवाद की राजनीति पर हमला कर रहे हैं। इनेलो के बाहुबली नेता भी मोदी के निशाने पर रहे हैं ताकि गैर जाट ज्यादातर वोटों को बीजेपी के पक्ष में लाया जा सके। यह बात अलग है कि बीजेपी के पास अब तक राज्य में संगठन खास मजबूत नहीं रहा और चुनाव में उतारे उम्मीदवारों में कई दलबदलू भी हैं।

अब की बार ये हैं महत्वपूर्ण उम्मीदवार- कांग्रेस
भूपेंद्र सिंह हुड्डा- गढ़ी सांपला- किलोई
कुलदीप शर्मा- गन्नौर
सावित्री जिंदल- हिसार
रणदीप सिंह सुरजेवाला- कैथल
संपत सिंह-नालवा
कैप्टन अजय यादव- रेवाड़ी
किरण चौधरी- तोशाम
गीता भुक्कल- झज्जर
महत्वपूर्ण उम्मीदवार -इनेलो
अभय सिंह चौटाला- ऐलनाबाद
नैना सिंह चौटाला- डबवाली
दुष्यंत सिंह चौटाला- उचाना कलां
प्रेम लता उचाना कलां
अशोक अरोड़ा- थानेसर
महत्वपूर्ण उम्मीदवार- बीजेपी
कैप्टन अभिमन्यु- नारनौंद
रामबिलास शर्मा- महेंद्रगढ़
वंदना शर्मा- सफीदों
महत्वपूर्ण उम्मीदवार- अन्य दल
कुलदीप बिश्नोई -आदमपुर (हरियाणा जनहित कांग्रेस)
चंद्रमोहन- नलवा (हरियाणा जनहित कांग्रेस)
रेणुका बिश्नोई- हांसी (हरियाणा जनहित कांग्रेस)
गोपाल कांडा -सिरसा (एचएलपी)
विनोद शर्मा- अंबाला सिटी (हरियाणा जनहित कांग्रेस)

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