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धार : कमालुद्दीन चिश्ती का उर्स 18 से 22 दिसंबर तक

Urs of Baba Kamal  until December 18 to 22

Hazrat Khawaja Maulana Kamal-Uddin Chisti RA Pirane Dhar

धार [ TNN ] शहंशाहे मालवा हजरत मौलाना ख्वाजा कमालुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह का 683वां उर्स 18 से 22 दिसंबर तक मनाया जाएगा। यह निर्णय उर्स कमेटी की वार्षिक साधारण सभा बैठक में लिया गया। अध्यक्षता सदर निसार अहमद ने की। उर्स के साथ ही शुरू होने वाला मेला 6 जनवरी 2015 तक चलेगा। कव्वाली का कार्यक्रम भी तय हो चुका है। असलम साबरी-दिल्ली, सईद फरीद साबरी जयपुर, युसुफ मलिक उत्तरांचल, गुलाम साबिर गुलाम वारिस दिल्ली, दिलशाह साबरी इरशाद साबरी सरवाड़, टिम्मू गुलफाम जयपुर, लियाकत हुसैन रईस हुसैन-जयपुर कव्वाल पार्टियों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

उर्स का आगाज 18 को सुबह 9 बजे चादर जुलूस के साथ होगा। उर्स के दौरान लंगर की व्यवस्था कमेटी द्वारा की जाएगी। आयोजन को लेकर हुई बैठक में कमेटी के मेंबरों ने परंपरा अनुसार स्वयं का चंदा जमा कराया। कमेटी के नायब सदर शेख इफ्तेखारुद्दीन, शकील अहमद एडवोकेट, खचांजी अब्दुल सलाम लल्ला, सेकेट्री फकीर मोहम्मद एडवोकेट, कारी रफीकुद्दीन सैयद, जावेद अंजुम एडवोकेट, हाजी इकबाल एहमद एडवोकेट, सुहेल निसार एडवोकेट, शकील खान आदि मौजूद थे।

बाबाकमाल दिल्ली के ख्यात सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य और निजामुद्दीन औलिया के गुरु बाबा फरीद के पोते के लड़के थे। हिंदी साहित्य में खड़ी बोली के प्रणेता आमिर खुसरो उनके गुरु भाई थे। बाबा का जन्म दिल्ली में 1238 ई. में हुआ था। नौ साल की उम्र में कुरआन शरीफ को कंठस्थ कर बाबा हाफिज हो गए थे। मौलाना का कोर्स कर आलीम हुए।

लोगों को शिक्षित करने के लिए बाबा को निजामुद्दीन औलिया ने 1291 में मालवा में भेजा था। वे उज्जैन में मौलाना मौज के साथ रुके, फिर धार आए। बाबा सर्वधर्म समभाव के प्रवर्तक माने गए। उनका सुलहे आम का दरबार था। धार में 1331 में उनका देहांत हुआ। बाबा कमाल का उर्स देश में तीसरे नंबर का उर्स माना गया। अजमेर शरीफ और रूढ़की जिले के कलीयर शरीफ के बाद यहीं का नंबर आता है। धार उर्स में कव्वाली का मुकाबला नहीं होता, सात्विक कव्वाली होती है। सूफियाना कव्वाली और निस्बती कलाम ही पेश किए जाते हैं।

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