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HC की टिप्पणी सरकार तय नहीं करे लोगों को क्या खाना हैं

लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने कहा कि खाने की पसंद, जीने के अधिकार के तहत आने वाला मामला है। कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि वह 10 दिन के अंदर योजना बनाए ताकि बंद हुए अवैध बूचड़खानों और मीट की दुकानों से लोगों की रोजी रोटी पर असर न पड़े।

लखनऊ बेंच ने कहा कि खाने की कई आदतें प्रदेश में फैल चुकीं हैं और ये सेक्युलर राज्य की संस्कृति का हिस्सा बन चुकीं हैं। कोर्ट ने ये फैसला एक व्यापारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। व्यापारी ने दुकान का लाइससेंस रिन्यू करने का आदेश देने की गुहार लगाई थी, ताकि वह अपने व्यापार को चला सके।

साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से गायों की तस्करी और गाय के मांस की खपत का मुद्दा गर्मा गया है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले महीने अवैध मलिन बस्तियों और पशुओं के तस्करों पर लगाम लगाई गई थी।

जस्टिस एपी साही और जस्टिस संजय हरकौली की खंडपीठ ने तीन अप्रैल को बहराइच के मीट विक्रेता सईद अहमद की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि पूर्व में इस विषय पर सरकार की निष्क्रियता बचाव के लिए ढाल नहीं होना चाहिए। गैर कानूनी गतिविधि को रोकने के साथ ही कानूनी गतिविधियां खासतौर से जो भोजन व व्यापार से जुड़ी हैं, उनके लिए भी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी की 10 अप्रैल को होने वाली बैठक को तमाम निर्देश जारी करते हुए हाई कोर्ट ने नसीहत दी कि कानून का अनुपालन किसी अभाव में समाप्त नहीं होना चाहिए, जो राज्य की निष्क्रियता का कारण बने। हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि बैठक में सबसे पहले मीट के फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस के नवीनीकरण समेत अन्य समस्याओं पर विमर्श किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि जानवरों के वध की सुविधा नगर निगमों व जिला पंचायतों आदि की ओर से उपलब्ध नहीं कराया जाना भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। निर्णय में तमाम तथ्यों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार उन सभी आयामों और नतीजों पर ध्यान दे जो जनता को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाले हैं।

हाई कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा न सिर्फ संबंधित व्यवसाय व पेशे के लोगों से जुड़ा है बल्कि बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। व्यापार, पेशा, स्वास्थ्य की सुरक्षा के अधिकार के साथ ही उपभोग और सुविधाएं मुहैया कराना सरकार का दायित्व है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस राज्य में फूड हैबिट समृद्ध है।

यह पंथ निरपेक्ष संस्कृति का एक तत्व भी है और सभी वर्गों में लगभग एक समान है। कोर्ट ने कहा कि क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम-1961 की धारा 197 के तहत दो मील की परिधि में स्लाटर हाउस की व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीण बाजारों में यदि इस प्रकार की सुविधाएं बिल्कुल नदारद हैं तो सरकार को इस पर भी विचार करना होगा।

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