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खंडवा जिले के मेडिकल स्टोर्स पर होगी कड़ी कार्यवाही

high court jabalpur

खंडवा [ TNN ] मप्र उच्च न्यायालय में पूर्व एल्डरमेन एवं आरटीआई कार्यकर्ता जगन्नाथ माने द्वारा खंडवा जिले एवं मप्र में चल रहे मेडिकल स्टोर्स पर अयोग्य व्यक्तियों द्वारा स्टोर्स का संचालन करने एवं ड्रग लायसेंस के बिना नवीनीकरण कर चल रहे मेडिकल स्टोर्स पर एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में 8 मई 14 को दायर की थी। जिसमें माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री एएम खानविलकर एवं जस्टिज अलोक अराधे ने विषय की गंभीरता को देखते हुए याचिका क्रमांक 3149 के संदर्भ में 14.7.14 को आदेश पारित करते हुए उपसंचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन खंडवा को नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि खंडवा जिले में चल रहे ड्रग लायसेंस के नवीनीकरण जिन मेडिकल स्टोर्स के नहीं है उन्हें तत्काल बंद किया जाए और जिन मेडिकल स्टोर्स के संचालकों के पास बी-फार्मा एवं डी-फार्मा के पंजीयन नहीं हैं उन्हें भी तत्काल एक सप्ताह के अंदर बंद किए जाए।

माननीय न्यायाधीशों द्वारा इस बात को भी स्पष्ट किया कि फार्मासिस्ट एवं प्रोपराईटर भिन्न-भिन्न नहीं हो सकते। इसलिए जो फार्मासिस्ट का लायसेंस है वही मेडिकल स्टोर्स का संचालन कर सकता है। 1984 के बाद जिन मेडिकल स्टोरों का नवीनीकरण नहीं किया गया है वे भी तत्काल बंद करने के आदेश दिए हैं। मेडिकल शॉप का आकार भी 110 मीटर स्केयर का होना आवश्यक है। एक मेडिकल स्टोर्स से दूसरे मेडिकल स्टोर्स की दूरी 330 फीट होना आवश्यक है।

माननीय न्यायाधीश द्वारा यह भी आदेश पारित करते हुए आदेश दिए कि याचिकाकर्ता को ड्रग विभाग सहयोग करें और उनके बताए गए अवैध रूप से चल रहे मेडिकल स्टोर्स पर एक सप्ताह के अंदर कार्यवाही की जाए। मेडिकल स्टोर्स पर दूसरे अन्य किसी व्यक्ति को बैठने का अधिकार नहीं है। खंडवा जिले के अंदर ड्रग विभाग द्वारा जितने भी लायसेंस निलंबित किए गए हैं अगर वर्तमान में उन मेडिकल स्टोर्स का संचालन हो रहा है तो उन्हें भी तत्काल बंद किया जाए।

याचिकाकर्ता जगन्नाथ माने द्वारा उपसंचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग खंडवा एवं कलेक्टर खंडवा को कार्यवाही करने के लिए कहा गया है ताकि जनहित में अवैध रूप से चल रहे मेडिकल स्टोर्स जो नागरिकों के जीवन से खेल रहे हैं उन्हें बंद करके जनता के साथ न्याय करते हुए नागरिकों के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके। याचिकाकर्ता की ओर से जबलपुर के अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार तिवारी ने पैरवी की।

नोट- आदेश की प्रति 

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