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दुनिया के सबसे गर्म स्थान, जंहा आसमान से बरसती है आग

आजकल पड़ रही भीषण गर्मी से हर कोई परेशान हैं, लेकिन हकीकत ये है कि दुनिया के कुछ इलाकों में पड़ने वाली गर्मी के सामने ये गर्मी कुछ भी नहीं है। मार्च का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ कि गर्मी ने अपना भयंकर रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पूरे देश में गर्मी को लेकर अभी से चिंता का माहौल बन गया है कि ना जाने गर्मी के ये 4 महीने कैसे कटेंगे।

देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार बहुत ज्यादा गर्मी पड़ने के आसार हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस धरती पर कुछ इतनी गर्म जगहे भी हैं जहां इंसान तो क्या जानवरों की भी आत्मा हिल जाती है।
1. दश्त-ए-लुत(ईरान): दश्त-ए-लुत को धरती की सबसे गर्म जगहों में से एक माना जाता है। साल 2005 में नासा ने दश्त-ए-लुत का तापमान 70.7 डिग्री रिकॉर्ड किया था। 2004 से 2007 तक और 2009 में तो दश्त-ए-लुत धरती पर सबसे ज्यादा गर्म स्थान रहा था।

2. दनाकिल रेगिस्तान (इथोपिया): कहा जाता है कि दनाकिल रेगिस्तान की गर्मी धरती पर नरक की आग का अहसास कराती है। दुनिया में जहां मौसम के हिसाब से तापमान कम या ज्यादा होते रहते हैं वहीं दनाकिल में पूरे साल तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहता है। यहां के गरम तलाबों में चौबीसों घंटे पानी उबलता रहता है। अपनी आग उगलती गर्मी के लिए दनाकिल को ‘क्रुअलेस्ट प्लेस ऑन अर्थ’ भी कहा जाता है।

3. डेथ वैली(अमेरिका): डेथ वैली में साल में औसत वर्षा मात्र 5 सेमी. के लगभग होती है। यहां पानी के निशान तक नहीं है। कहीं-कहीं पानी है भी, तो बहुत ही खारा। थर्मामीटर से नापा गया अब तक का सबसे विश्वसनीय अधिकतम तापमान पूर्वी कैलिफोर्निया की इसी घाटी का रहा है। कहा जाता है कि डेथ वैली का तापमान 56.7 डिग्री मापा गया था। थर्मामीटर से नापा गया ये सबसे अधिक तापमान था।

4. अल अजीजिया (लीबिया): एक वक्त में अल अजीजिया दुनिया का सबसे गर्म शहर था। 13 सितंबर 1922 को लीबिया के इस शहर में 58 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ था। साल 2012 में अमेरिका की डेथ वैली ने अल अजीजिया से दुनिया का सबसे गर्म स्थान का तमगा छीन लिया।

5. तुरपन (चीन): चीन की तुरपन घाटी का हाल भी कुछ डेथ वैली जैसा ही है। साल 2008 में तुरपन में अधिकतम तापमान 66.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। पहाड़ों को देख कर ये यकीन करना मुश्किल है कि यहां तापमान इतना ज्यादा कैसे हो जाता होगा। लेकिन ये लाल पहाड़ बलुआ पत्थरों को बने हुए हैं, जो दोपहर होते-होते तपते तंदूर में बदल जाते हैं। इसीलिए यहां जबरदस्त गर्मी महसूस होती है।

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