ORIGINAL Victoria and Albert museumलंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूज़ियम में इन दिनों एक ख़ास नुमाइश लगी हुई है ! इसमें पिछले तीन सौ सालों में महिलाओं के अंडरगारमेंट्स का इतिहास बताने की कोशिश की गई है ! इस नुमाइश में ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका में अलग-अलग दौर के अंडरगारमेंट्स रखे गए हैं. और अलग-अलग दौर में अंतर्वस्त्रों का इतिहास भी लोगों को बताने की कोशिश की जा रही है !

इस नुमाइश में सन 1770 और 1790 के बीच ब्रिटेन में चलन में रही सिल्क की जामदानी रखी गई है ! इस जामदानी की मदद से औरतों के बदन की लचक को और बेहतर तरीक़े से पेश करने की कोशिश की जाती थी ! अठारहवीं सदी का ये चलन आज आपको भौंडा और बकवास भले लगे ! मगर उस दौर में रेशम की ये जामदानी पहनना, रईसी की निशानी मानी जाती थी !

इस नुमाइश की निगरानी की ज़िम्मेदारी एडविना एहर्मेन निभा रही हैं ! वो अंडरगारमेंट्स को लेकर बहुत दिलचस्प क़िस्से बताती हैं ! एडविना कहती हैं कि अठारहवीं सदी के महिलाओं के अंडरगारमेंट्स का मक़सद, महिलाओं की सेक्स अपील को बढ़ाना था ! इसलिए आराम को ज़्यादा तरजीह नहीं दी जाती थी. इसका इस्तेमाल, समाज के ऊंचे दर्जे के लोग ही करते थे !

इसी तरह, म्यूज़ियम में लगी नुमाइश में सत्रहवीं सदी की चोलियां भी रखी गई हैं ! एडविना बताती हैं कि बड़े घरों में उस वक़्त महिलाओं के बढ़िया क्वालिटी के लिनेन की बनी चोलियों को इस्तेमाल का चलन था ! इनके ऊपरी किनारों पर मलमल के घेरे लगाए जाते थे !

अंतर्वस्त्रों की इस प्रदर्शनी में उन्नीसवीं सदी में चलन में रही क्रिनोलाइन को भी रखा गया है ! ये जालीदार कपड़ा देखकर अभी तो आपको समझ में ही नहीं आएगा कि भला इसका क्या इस्तेमाल था ! असल में उस वक़्त चौड़े घेरों वाली स्कर्ट का चलन था ! इसके लिए महिलाएं ऐसे जालीदार पेटीकोट पहनती थीं जिससे स्कर्ट का घेरा खुलकर दिखे ! साथ ही उनकी ख़ूबसूरती भी !

इसलिए स्टील और लिनेन के मेल से बनाई जाती थी ये क्रिनोलाइन ! इनका चलन ब्रिटेन से लेकर जापान तक में था ! हालांकि औरतों की आज़ादी की तरफ़दारी करने वाली महिलाएं इसे एक बड़ी बंदिश मानती थीं ! क्रिनोलाइन का पुरज़ोर विरोध किया गया. इसे फैशन की दुनिया का सबसे बड़ा हादसा माना जाता है !

आज की महिलाओं की लांजरी एकदम बदल चुकी है ! मगर, एक चीज़ जो तब भी हिट थी और आज भी है, वो है कॉर्सेट. फ़ैशन के तमाम दौर पिछली तीन सदियों में आए और गए ! मगर अठारवीं सदी से इक्कीसवीं सदी तक आते-आते भी कॉर्सेट में लोगों की दिलचस्पी कभी कम नहीं हुई !

विक्टोरिया एंड अलबर्ट म्यूज़ियम में 1890 में बनी एक कॉर्सेट को नुमाइश के लिए रखा गया है ! सिल्क की बनी इस ग़ुलाबी कॉर्सेट के बारे में कहा जाता है कि शायद ये ब्रिटेन में बनी थी ! एडविना कहती हैं कि कॉर्सेट को इसलिए भी ख़ूब पसंद किया गया क्योंकि ये कमर को पतली और हिप्स के उतार चढ़ाव को बेहतर तरीक़े से दिखाती थी !

प्रदर्शनी में साल 1900 में बने बेहद सेक्सी जुराबों को भी रखा गया है ! कहा जाता है कि ये जुराबें राजकुमारी एलेक्ज़ेंड्रिया ने पहनी थीं ! वो बाद में डेनमार्क की महारानी बनीं ! उनके बारे में कहा जाता था कि उनके कपड़े नए फैशन को जन्म देते थे ! वो बहुत फ़ैशनेबल मानी जाती थीं !

पहले कपड़ों के भीतर से जुराबों का झांकना बुरा माना जाता था ! मगर एडविना कहती हैं कि राजकुमारी एलेक्ज़ेंड्रिया ने ऐसी ख़ूबसूरत जुराबें पहनकर इस पाबंदी को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया !

आज की ब्रा के चलन में आने से पहले इसी तरह की चोली का चलन आया था, बीसवीं सदी की शुरुआत में ! सिल्क और कॉटन की बनी ये चोलियां, ज़्यादा आरामदेह और इस्तेमाल में आसान मानी गईं ! यही आगे चलकर ब्रा के तौर पर दुनिया के सामने आईं !

नुमाइश में कुछ नेकरें भी रखी गई हैं ! इनमें से एक पिछली सदी की शुरुआती दौर की है ! प्रदर्शनी में एक ब्रिटिश राजनैतिक की बीवी की इस्तेमाल की गई नेकर भी रखी गई है ! इन्हें फ्रेंच निक्कर कहा जाता था ! लेडी बेटी नाम की इस महिला ने अपनी डायरी में लिखा था कि इनकी मदद से उन्होंने बग़दाद की महिलाओं से राब्ता बनाया था ! क्योंकि, दोनों ही एक दूसरे की ज़ुबान नहीं समझती थीं !

1940 के आते आते नायलॉन के इस्तेमाल से महिलाओं के अंडरगारमेंट्स का रूप-रंग दोनों ही बदल गया ! ये इस्तेमाल में आसान थे ! धोने में आसान थे ! मॉडर्न लगते थे ! एडविना कहती हैं कि नायलॉन के बने अंडरगारमेंट्स को महिलाओं ने हाथों-हाथ लिया और देखते देखते ये दुनिया भर में छा गए !

एडविना बताती हैं कि साठ के दशक में पश्चिमी देशों में कमरबंद पहनने का चलन भी ख़ूब रहा ! इसकी वजह साफ़ थी, ये औरतों की उम्र छुपा लेता था और इसके इस्तेमाल से महिलाएं आज़ाद भी महसूस करती थीं. लाइक्रा के बने ये कमरबंद ख़ूब चले !

बीसवीं सदी के सत्तर के दशक के आते आते दुनिया भर में महिलाओं की मुक्ति के आंदोलन तेज़ हो चुके थे ! इस आंदोलन की अगुवा महिलाओं को ब्रा भी पुरुषवादी समाज की प्रतीक लगती थीं ! पश्चिमी देशों में कई जगह ब्रा जलाने की मुहिम तक चलाई गई थी. हालांकि आम महिलाओं ने इससे तौबा नहीं की !

हां, इनसे नया आर्ट ज़रूर चलन में आ गया ! जैसे इस प्रदर्शनी में रखा ब्रा का ऐसा रूप है जिसे देखकर आप यक़ीन ही नहीं करेंगे कि ब्रा को इस शेप में भी देखा जा सकता है ! मगर हेलेन न्यूमैन नाम की एक आर्टिस्ट ने कांसे की बनी ब्रा को ठोक-पीटकर एकदम नया, आर्टिस्टिक लुक दे दिया है !

बहरहाल, विक्टोरिया एंड अलबर्ट म्यूज़ियम में लगी इस नुमाइश में आप महिलाओं के अंतर्वस्त्रों के तीन सौ सालों के इतिहास की झलक देख सकते हैं ! इन्हें तब भी सेक्स अपील से जोड़कर देखा जाता था और आज भी ! हां, अब आराम को भी बराबर की अहमियत दी जाती है !

[BBC]