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गृहमंत्री को आया गुस्सा, बोले नेताओ की बंद करो जी हुजूरी

नई दिल्ली: गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में सिविल सेवा दिवस कार्यक्रम के 12 मिनट देर से शुरू होने पर अधिकारियों के सामने नाराजगी जताई। गुस्से में गृह मंत्री ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि वो नेताओं की हाथ की कठपुतली बनने से बचें और सिर्फ यस सर, यस सर न कहें।

राजनाथ सिंह ने सिविल सेवा के अधिकारियों को प्रमुख पदों पर आसीन राजनेताओं की ‘हां में हां न मिलाने’ की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को‘जी हुजूरी’ से बचने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं की गलतियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा. अधिकारियों को निष्पक्ष रहना चाहिए और निर्णय लेने के मामले में कभी हिचकिचाना नहीं चाहिए।

सिंह ने आज 11वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में देश भर से जुटे लोकसेवकों से देश और जनता के हित में किसी भी तरह के दबाव में आये बिना अपना काम जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर प्रमुख पदों पर आसीन सियासी जमात के लोग कोई गलत आदेश दें तो लोक सेवक बेहिचक उन्हें कानून और नियम दिखा कर बतायें कि ऐसा आदेश देकर वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। इतना ही नहीं सिंह ने अधिकारियों से ऐसे किसी फैसले से जुड़ी फाइल पर दस्तखत भी नहीं करने को कहा।

गृह मंत्री ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि वे अहम पदों पर बैठे राजनेताओं की हां में हां मिलाते हुये आंख मूंद कर उनके आदेशों का पालन न करें। साथ ही उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा कि देश और जनता के हित में लोकसेवकों को अपनी अंतरात्मा की आवाज को दबा कर काम करने की कोई जरूरत नहीं है।

उनका इशारा साफ तौर पर केन्द्र शासित राज्यों दिल्ली और गोवा में राज्य सरकार और नौकरशाहों के बीच हाल ही में अधिकारक्षेत्र को लेकर उपजे विवाद की ओर था। दिल्ली सरकार में अधिकारक्षेत्र का विवाद अदालत तक जा पहुंचा है।

इसके साथ ही सामाजिक बदलाव लाने में लोकसेवकों की भूमिका की प्रशंसा करते हुए सिंह ने कहा कि पद किसी अधिकारी को जिम्मेदार ,निष्पक्ष और जवाबदेह बनाता है। उन्होंने कहा कि लोकसेवकों को कानूनी अधिकार मिलने के साथ जिम्मेदारी और जवाबदेही के अलावा निष्पक्षता का दायित्व भी मिला है। निष्पक्ष नहीं रहने पर यह अधिकारियों के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और इससे देशहित प्रभावित होने का खतरा पैदा होना निश्चित है। सिंह ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अधिकारी भ्रम की स्थिति में अपने वरिष्ठ अधिकारियों से विचार विमर्श करें लेकिन किसी भी हाल में निर्णय लेने की क्षमता से समझौता न करें।

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