मोदी सरकार के सामने उम्मीदों का सातवां आसमान और चुनौतियां…

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लोकसभा चुनाव की मतगणना की तारीख के ठीक एक सप्ताह बाद केंद्र में मोदी सरकार का  दुबारा गठन हो गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने  राष्ट्रपति भवन में एक भव्य कार्यक्रम में पीएम मोदी एवं उनके मंत्रियों को शपथ दिलाई। समारोह में बिम्सटेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भी शिरकत की, लेकिन पड़ौसी देश पाकिस्तान को न्यौता नहीं भेजा गया। गौरतलब है कि बिम्सटेक में बंगाल की खाड़ी से जुड़े 8 देश सदस्य  है। बंगाल की खाड़ी से न जुड़ा होने के कारण पाकिस्तान को इससे वंचित रहना पड़ा है। 2014 में मोदी सरकार ने जब पहली बार शपथ ग्रहण की थी तब उसमे सार्क देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया था  इस नाते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी  समारोह शिरकत की थी।
इस बार जब मंत्रिमंडल गठन की चर्चाएं चल रही थी तब यह सवाल सबके जेहन में कौंध रहा था कि सुषमा स्वराज सरकार का हिस्सा होगी की नहीं। शपथ ग्रहण समारोह तक यह उत्सुकता बनी रही कि यदि सुषमा स्वराज मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनती है तो देश का विदेश मंत्री कौन होगा, लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी सोच विचार कर पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को यह जिम्मेदारी सौपी तो सभी चौक गए। जयशंकर की क्षमताओं  को देखते हुए प्रधानमंत्री के इस निर्णय का व्यापक स्वागत भी किया गया। जयशंकर ने विदेश सचिव के तौर पर चीन के साथ डोकलाम विवाद को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी कूटनीतिक क्षमताओं  से ही चीन को डोकलाम से पीछे हटने पर विवश होना पड़ा। पद्मभूषण से सम्मानित एस जयशंकर पूर्व में चीन और अमेरिका में भारत के राजदूत रहते हुए अपनी क्षमताओं का लोहा मनवा चुके है। वे अभी संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं है। अतः उन्हें जल्द ही राज्य सभा में भेजा जा सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि जयशंकर को जिम्मेदारी देकर प्रधानमंत्री मोदी ने सुषमा का सही उत्तराधिकारी खोजा है ,जिन्होंने विदेशमंत्री तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।
केंद्र की पिछली सरकार में वित्तमंत्री  रूप में देश की आर्थिक नीतियों के निर्धारण में विशिष्ट भूमिका अदा करने वाले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्वास्थ्य कारणों से नई सरकार में शामिल होने से असमर्थता जता दी थी। इसलिए नई सरकार में उनका उत्तराधिकारी निर्मला सीतारमण को बनाया गया है। निर्मला पूर्व सरकार में रक्षा मंत्री की भूमिका संभाल रही थी और राफेल सौदे पर संसद में उन्होंने विपक्ष के आरोपों का प्रभावी ढंग से जवाब दिया था। प्रधानमंत्री भी बेहद प्रभावित हुए थे। इसलिए उन्हें मौजूदा सरकार में बड़ी भूमिका दी गई है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जब गांधीनगर से पर्चा भरा था तब ही से ये कयास लगाए जा रहे थे कि सत्ता में आने पर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।  यह जिम्मेदारी गृह मंत्री की भी हो सकती थी और हुआ भी वही। अमित शाह को राजनाथ सिंह की जगह गृह मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौपी गई। निश्चित रूप से अमित शाह का गृह मंत्री रूप में मनोनयन विशिष्ट मायने रखता है। उनके सामने जम्मू कश्मीर में आतंक का सफाया ,नक्सल हिंसा पर काबू पाने जैसी और भी कई कठिन चुनौतियां है। अब यही से अमित शाह की अपनी विलक्षण प्रतिभा का इम्तिहान देना होगा। रणनीतिक कौशल के धनी अमित शाह गृह मंत्री रूप में यथासंभव कदम उठाने से नहीं चूकेंगे ,यह सभी जानते है। राजनाथ सिंह और अमित शाह की कार्यशैली अलग-अलग हो सकती है ,परन्तु इतना तो कहा जा सकता है कि गृह मंत्री के रूप में वे राजनाथ की तरह ही वे वे अलग पहचान बनाने में सफल होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  नई सरकार में राजग के चार घटक दलों शिरोमणि अकाली दल ,लोकजनशक्ति पार्टी और शिवसेना के एक एक  सांसद को केबिनेट मंत्री बनाया है जबकि भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख रामदास आठवले को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। बिहार में भाजपा की सहयोगी जेडीयू को भी  सरकार में एक केबिनेट मंत्री का पद दिया जा रहा था, परन्तु मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि वे सरकार में सांकेतिक हिस्सेदारी नहीं चाहते। दरअसल नीतीश चाहते थे कि नई सरकार में उनके दल को तीन पद दिए जाए। अगर जेडीयू की यह मांग स्वीकार कर ली जाती तो शिवसेना भी इसके लिए अड़ सकती थी। गौरतलब है कि शिवसेना ने महाराष्ट्र में 18 सीटे प्राप्त की है जबकि जेडीयू  ने बिहार में 17 सीटें जीती है। नीतीश ने कहा कि उनका दल मोदी सरकार को समर्थन देता रहेगा, लेकिन इसमें शामिल नहीं होगा । पीएम मोदी की अब तक इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे लगता है कि वे किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
नई सरकार में स्मृति ईरानी को केबिनेट मंत्री बनाकर उन्हें महिला एवं बाल विकास जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है। अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर उन्होंने तहलका मचा दिया। इसका पुरस्कार तो मिलना ही था। अब सरकार में उनका कद भी काफी बड़ा हुआ है। पीएम मोदी की पिछली सरकार में 75 मंत्री थे ,जिसमे से करीब 30 मंत्रियों को नई सरकार में जगह नहीं मिली नहीं मिली है। इनमे सुरेश प्रभु उमा भारती ,मेनका गांधी, राज्यवर्धन राठौर, जयंत सिन्हा प्रमुख है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमे से किसी को दूसरी किश्त  में मौका दिया जाएगा या संगठन में इनकी क्षमताओं का उपयोग किया जाएगा। केबिनेट में इस बार भाजपा के तीन प्रदेशाध्यक्षों उत्तरप्रदेश के डॉ महेंद्र नाथ पांडेय बिहार के नित्यानंद राय और महाराष्ट्र के राव साहेब दानवे को शामिल किया गया है। इन्हे इनके राज्य में भाजपा की शानदार सफलता के लिए पुरस्कृत किया गया है। उत्तराखंड से पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भी महत्वपूर्ण विभाग मानव संसाधन विभाग दिया गया है। वे पहली बार केंद्र मंत्री बनाए गए है।
मध्यप्रदेश से नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गहलोत एवं धर्मेद्र प्रधान को मंत्रिमंडल में शामिल करने की पूरी संभावना थी। पीएम मोदी ने उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालय देकर बड़ी जिम्मेदारी सौपी है। राज्य से पांच सांसदों को मंत्री बनाया गया है। दमोह से जीते प्रह्लाद पटेल को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय का प्रभार दिया गया है ,वही मंडला से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को धर्मेंद्र प्रधान के अधीनस्थ इस्पात मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। गौरतलब है कि पिछली सरकार में उन्हें स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनाया गया था लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे। उन्हें पुनः मंत्रिमंडल  किया जाना इस बात  प्रमाण है कि पीएम मोदी को उनकी क्षमताओं पर पूरा विश्वास है।
:-कृष्णमोहन झा
(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है)