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छः महीने पहले छपे नए नोटों पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे ?

new-rs-500-rs-2000-notesइंदौर/भोपाल- 2000 रुपए के नए नोट जारी होने के साथ ही रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के नाम एक रिकॉर्ड बन गया है। रिकॉर्ड यह है कि वह 2000 रुपए के नोट पर सिग्‍नेचर करने वाले पहले आरबीआई गवर्नर बन गए हैं। देश में इससे पहले 2000 रुपए के नोट नहीं जारी किए गए हैं। मोदी सरकार की ओर से नए नोट जारी करने के इस फैसले के चलते यह मौका उर्जित पटेल को मिला।

कब बने RBI गवर्नर?
उर्जित पटेल ने 6 सितंबर 2016 को रिजर्व बैंक के 24वें गवर्नर का पद संभाला था। उन्‍होंने रघुराम राजन की जगह ली थी। इससे पहले, उर्जित पटेल 11 जनवरी 2013 से 4 सितंबर 2016 तक आरबीआई के डिप्‍टी गवर्नर रहे। लंदन स्‍कूल ऑफ इकोनॉमिक्‍स से इकोनॉमिक्‍स में बैचलर हैं। उन्‍होंने ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमफिल किया है। पटेल कई साल तक आईएमएफ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देश के जाने-माने बैंकर और इकोनॉमिस्‍ट में उनकी गिनती होती है।

नए नोटों पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे ?
नए नोटों पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे ? यह सवाल सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वहीँ इसी सवाल को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पार्टी के मध्यप्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश ने भी उठाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर सवाल उठाया कि नए नोट छापने की प्रक्रिया छह महीने पहले ही शुरू कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि अगर यह सही है तो नए नोट पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे हैं, जबकि उन्होंने यह जिम्मेदारी इसी साल सितंबर में संभाली है।

मध्यप्रदेश के नेपानगर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने से पहले इंदौर पहुंचे मोहन प्रकाश ने सोमवार को फ्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “500 और 1,000 रुपये की नोटबंदी के मद्देनजर नए नोट लाने की प्रक्रिया छह माह पहले से चलाने का दावा किया जा रहा है, मगर इन नोटों पर आरबीआई के गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे हैं, जबकि पटेल ने नौवें महीने (सितंबर) में यह जिम्मेदारी संभाली है।

मोहन प्रकाश ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश यात्राएं करने वाले उद्योगपतियों पर भी सवाल उठाया और कहा कि कालेधन के जो दोषी हैं, वे तो प्रधानमंत्री के साथ विदेशों में घूमते हैं और देश का मेहनतकश, गरीब आदमी कई दिनों से समस्याएं झेल रहा है। उनके पास खाना खाने तक के पैसे नहीं हैं। [एजेंसी]




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