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जानिए क्यों चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग का चीन में ही हो रहा विरोध

बीजिंग : चीन के राष्ट्रपति पद पर शी चिनफिंग के अनिश्चितकाल तक बने रहने के प्रस्ताव का देश में भारी विरोध शुरू हो गया है। कई नामचीन हस्तियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने सांसदों से इसे खारिज करने का आग्रह किया है। चीन में आमतौर पर इस तरह का विरोध देखने को नहीं मिलता। बीते रविवार को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति पद पर लगातार दो कार्यकाल की समयसीमा के संवैधानिक प्रावधान को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर चिनफिंग साल 2023 में दूसरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी राष्ट्रपति बने रहेंगे। वह 2013 से चीन के राष्ट्रपति हैं।

चीन के सरकारी अखबार चाइना यूथ के पूर्व संपादक ली दातोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म वीचैट पर पत्र लिखकर देश की नाममात्र की संसद के सदस्यों से प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, देश के शीर्ष पद पर कार्यकाल की सीमा खत्म किए जाने से हम शाही शासन के दौर में लौट जाएंगे। ऐसी स्थिति से अराजकता देखने को मिलेगा। जानी-मानी कारोबारी वांग यिंग ने भी वीचैट पर लिखा, “मेरी पीढ़ी माओ युग में पली-बढ़ी। वह दौर समाप्त हो चुका है। हम दोबारा उस दौर में कैसे लौट सकते हैं? कम्युनिस्ट पार्टी का यह प्रस्ताव पूरी तरह विश्वासघात है।”

1982 के संविधान के तहत राष्ट्रपति पद पर कोई भी व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल तक रह सकता है। लेकिन चीन में माओत्से तुंग के बाद 64 वर्षीय चिनफिंग सर्वाधिक ताकतवर नेता के रूप में उभरे हैं। माओ ने 1943 से 1976 तक चीन पर शासन किया था।

64 वर्षीय चिनफिंग का पहला पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने वाला है। दूसरे कार्यकाल के लिए उन्हें चुने जाने की औपचारिकता चीन की संसद में जल्द पूरी की जाएगी। संसद की कार्यवाही पांच मार्च से शुरू होने वाली है। उनके दूसरे कार्यकाल पर पिछले साल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के सम्मेलन में मुहर लगा दी गई थी।

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