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पशु तस्करी पर अंकुश लगाने में नाकाम प्रशासन !

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अमेठी- उत्तर प्रदेश का अमेठी जनपद तस्करों के लिए बेहद मुफीद साबित हो रहा है। अवैध कारोबार और पशु तस्करी पर अंकुश लगाये जाने को लेकर किये जा रहे दावों के बीच हकीकत जुदा है। पशु बेटोक वधशालाओं तक पहुँच जाते है पर पुलिस को भनक तक नहीं लगती है लगे भी कैसे जब चन्द खाकी वर्दी एवं कुछ सफेदपोशों के बीच अटूट गठबंधन हो।

पशुपालन को व्यवसाय एवं सफेद क्रांति की बात तो महज भाषणों एवं बयानों तक है। शासन एवं प्रशासन पशु तस्करी एवं गोवध पर रोक लगाने का आदेश-निर्देश जारी करते है। पर हकीकत यह कि इन दिनों उत्तर प्रदेश के अमेठी,सुल्तानपुर आदि जनपदों के मुख्य मार्गो से पशु तस्कर सेटिंग के बाद आराम से गुजरते है। कहीं कोई थानेदार ईमानदारी का परिचय देने लगा तो चंद दिनों के लिए राह बदल लेते है ।

अभी पिछले मंगलवार को मुसाफिरखाना में सफेद रंग की एक बिना नम्बर प्लेट वाली बुलेरो से पुलिस ने भारी मात्रा में में गोमांस बरामद किया। लेकिन तस्कर भाग निकले। कुछ महीनों पूर्व ही एस टी एफ ने पुलिस के साथ मिलकर करीब 4 टन वजन के कछुए सहित तस्कर को गिरफ्तार किया था। जिससे यह पता चलता है अमेठी में तस्करी के तार कितने फैले हुए है ।

सूत्रों की माने तो मुसाफिरखाना में पशुओं से लदे वाहन करपिया और नाथूपुर तथा लालगंज-इसौली के रास्ते से होते हुए निकलते है। इनके गुजरने के दो-तीन मार्ग है। मुंसीगंज से एच एल कोरवा रोड,पॉवर हाउस,चन्दौकी उंचगाव और नहर के किनारे के रास्ते से गुजरते हुए सुल्तानपुर की सीमा में प्रवेश करते है।

वही दूसरी ओर एन एच 56 पर कादूनाला जंगल के कच्चे व पगडंडी वाले मार्ग पशु तस्करी के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं। जंगल के टेढ़े व तिरछे, सकरे वाले रास्ते में वह आसानी से पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाते है। मोबाइल के इस युग में पल-पल की स्थिति का ट्रक चालक, तस्कर एवं पुलिस के चंद अधिकारियों कर्मचारियों के बीच आदान-प्रदान होता है। ऐसे में इनकी गिरफ्तारी एवं अंकुश की बात बेमानी साबित होती है।

सूत्र बताते है कि इसौली और भददौर के तराइ इलाको में गड़े मजबूत खूटे भी पशु तस्करो द्वारा ही गाड़े गये है। जहाँ तस्कर मौका और समय देखकर बेजुबानों पर आरे गिराते है। खबर यह भी मिली है कि मुसाफिरखाना के आस पास के क्षेत्रो में बस चुके घुमन्तू प्रजाति के लोग मादक तथा मांस की तस्करी में अपना पैर जमा चुके है। अमेठी में तस्करो के हौसले किस कदर बुलन्द है। इसका प्रमाण विगत वर्ष ही पुलिस की गाड़ी में ही टक्कर मार कर पशु तस्करो ने दे दिया था।

हालाँकि जब से नवांगत तेज तर्रार जिलाधिकारी डॉ योगेश कुमार और पुलिस कप्तान अनीस अंसारी ने जिले की कमान संभाली है। तस्करी मामले में कमी जरूर आयी है। लेकिन अभी भी अमेठी में तस्करी की जडे गहराई में है। जिसको खत्म के लिये युद्ध स्तर पर कार्यवाही की जरूरत है ।
रिपोर्ट- @राम मिश्रा




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