Home > Latest News > इमरान खान ने संघ की तुलना हिटलर से की, भाजपा ने दियाये जवाब

इमरान खान ने संघ की तुलना हिटलर से की, भाजपा ने दियाये जवाब

नई दिल्ली: जम्मू -कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान की बौखलाहट जारी है। पहले उसने भारत से व्यापारिक संबंध खत्म किए, फिर अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया और फिर समझौता एक्सप्रेस को बंद कर दिया, हालांकि प्रधानमंत्री इमरान खान के इस कदम का पाकिस्तान को खुद बड़ा नुकसान हुआ है।

इमरान खान खुद अपने देश में लोगों के निशाने पर हैं तो वहीं ट्विटर पर भी उनकी बेतुकी बातें जारी हैं, रविवार को इमरान खान ने पहले एक बयान जारी कर जम्मू-कश्मीर पर पहले तो भ्रामक बातें शेयर की. फिर इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को दोषी बताते हुए संघ की तुलना हिटलर से कर दी।

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अपने टि्वटर हैंडल से एक के बाद एक कई ट्वीट किए, पहले ट्वीट में उन्होंने कहा कि भारत के कब्जे वाले कश्मीर में जहां पर कर्फ्यू लगाया गया, वहां आम लोगों का दमन कर कश्मीरियों के जनसंहार को अंजाम दिया जा रहा है, लोगों पर जुल्म किए जा रहे हैं, लोग दहशत में जी रहे हैं, दरअसल वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के अनुरूप है।

आरएसएस की एक ऐसी विचारधारा जो नाजी विचारधारा से प्रेरित रही है और इसके लिए बकायदा एक कौम को सिरे से साफ किया जा रहा है. सवाल यह उठता है कि क्या दुनिया इसे चुपचाप देखती रहेगी और सराहती रहेगी. ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने हिटलर के दौर में म्यूनिख में चल रही घटनाओं पर किया था, क्या दुनिया के नेता इस बारे में कोई कदम उठाएंगे?

इमरान की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि इससे पता चलता है कि दुनिया भर में आतंक फैलाने वाला पाकिस्तान कितना बौखला गया है। दुनिया को पाकिस्तान पोषित आतंकवाद से चुनौती है, भारत से कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने जिन्ना की दो राष्ट्र और शेख अब्दुल्ला की तीन राष्ट्र के सिद्धांत को खत्म किया है। उन्होंने इमरान पर सवाल दागते हुए कहा कि क्या वह पाकिस्तान में धार्मिक अतिवाद को खत्म करेंगे।

भारत को दुनिया के कई देशों से जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसला का समर्थन मिल चुका है, इस फैसले पर भारत का समर्थन रूस ने भी किया है तो वहीं इस मसले पर चीन ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के फैसले का प्रत्यक्ष रूप से जिक्र नहीं करते हुए कहा था कि प्राथमिकता यह है कि प्रासंगिक पक्ष को चाहिए कि वह यथास्थिति को एकतरफा बदलने से बाज आए और तनाव न बढ़ाए।

Scroll To Top
Copyright @teznews.com. Designed by Lemosys.com