atal-advani-garland_रायगढ़ – लैलुंगा जनपद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह के बाद लोग उस वक्त भौंचक्क रह गए, जब जनपद उपाध्यक्ष कार्यालय में भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं लालकृष्ण आडवाणी की फोटो पर माला डाल दिया गया।

जीत की खुशी में नेताओं को इस बात का इल्म भी नहीं हुआ कि वे अभी भी जीवित हैं। जबकि किसी के मरने पर ही उसके चित्र पर माला पहनाया जाता है। ये फोटो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। अब स्थानीय भाजपा नेता मीडिया के सवालों पर कन्नी काट रहे हैं व कांग्रेस इसी बहाने भाजपा पर निशाना साधकर भाजपा में मोदी युग आने की बात कर रहे हैं।

भाजपा नेता जनपद पंचायत की जीत की खुशी में इस कदर मशगुल थे कि उन्हें यह भी याद नहीं रहा कि जीते जी किसी के चित्र पर माला नहीं चढ़ाई जाती। लेकिन उत्साही नेताओं ने जीत की खुशी का इजहार करते हुए एक फोटो फेसबुक और वाट्सअप में डाल दिया, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि उनके पीछे देश के दो दिग्गज भाजपा नेताओं की फोटो लगी थी जिस पर माला डला हुआ था।

इस मामले पर अब भाजपा नेता कन्नी काटते नजर आ रहे हैं। मामला देश के दो वरिष्ठ भाजपा नेताओं का है। जिसमें से एक पूर्व प्रधानमंत्री तो दूसरा उप प्रधानमंत्री के पद पर सुशोभित रह चुका है। जिले में त्रि-स्तरीय चुनाव के बाद लैलूंगा जनपद पंचायत चुनाव में उपाध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद स्थानीय नेता समर्थकों के साथ फोटो खिंचवाकर फेसबुक व वाट्सअप पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते फेसबुक पर कमेंट का दौर शुरू हो गया और वाट्सअप पर भी यह फोटो तेजी से लोगों के बीच वायरल हो गई।

इससे कुछ दिन पहले ही ट्रैफिक विभाग ने हेलमेट जागरूकता अभियान के तहत जारी फोटो में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितीन गड़करी का मजाक उड़ाया था। मीडिया में खबर आने के बाद ट्रैफिक डीएसपी को कारण बताओ नोटिस दिया गया व तत्कालीन ट्रैफिक टीआई को निलंबित कर दिया गया। इस मामले में इतना होने के बाद यहां के भाजपा नेताओं ने अपने ही वरिष्ठ भाजपा नेताओं के चित्र पर माला पहना दिया।

कांग्रेस ने कहा की वैसे तो भाजपा में मोदी युग आने के बाद वरिष्ठ नेता अपनी आभा खोने लगे हैं। इनके कार्यकर्ता जब अपने वरिष्ठों का सम्मान नहीं कर सकते तो वे जनता का क्या सम्मान करेंगे। उन्हें तो जीत का खुमार कुछ इस तरह चढ़ा है कि अपनी पार्टी के वरिष्ठों को जीते जी स्वर्ग पहुंचा दिया है। फोटो वाट्सअप में मैंने भी देखी है और उनकी मानसिकता पर तरस आ रहा है। कैसे हैं वे नेता जो अपने वरिष्ठ के सम्मान की जगह अपमान पर उतारू हैं।

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