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आर्थिक तंगी से जूझ रहा पूर्व संसद सदस्य,भाजपा नहीं ले रही सुध

First-sansad-of-chhattisgarhरायपुर [ TNN ] वैसे तो वे देश की प्रथम अंतरिम संसद के सदस्य रह चुके हैं, लेकिन हाल की स्थिति यह है कि उनका परिवार बेहद आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। हम बात कर रहे हैं रेशम लाल जांगड़े की, जिनके परिजन दिल्ली के किसी अच्छे अस्पताल में उनका इलाज तक नहीं करा पा रहे हैं। स्थिति यह है कि परिवार के पास उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने तक के लिए पैसे नहीं हैं।

पिछले तीन दिनों से राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती जांगड़े को देखने के लिए न तो भाजपा के बड़े नेता अस्पताल पहुंचे हैं और न ही सरकार की तरफ से कोई मंत्री या अफसर। हालांकि, कांग्रेस नेता जरूर उन्हें देखने अस्पताल जा रहे हैं।

बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने जांगड़े तथा उनके परिवार से मुलाकात की और राज्य सरकार से उनका बेहतर इलाज कराने की मांग की। वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी जांगड़े के परिवार से चर्चा की। उन्होंने जांगड़े के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

वहीं, भाजपा की तरफ से अभी तक बड़े नेताओं में सिर्फ प्रदेश उपाध्यक्ष सच्चिानंद उपासने ही अपने समर्थकों के साथ जांगड़े से मिलने पहुंचे।

जानकारी के अनुसार, जांगड़े को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। हालांकि, डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रख रही है, फिर भी चार दिनों बाद भी उनकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है।

उनके पुत्र हेमलाल जांगड़े ने जानकारी दी कि उनके पिता का गुरुवार को एक ऑपरेशन भी किया गया। उनकी उम्र अधिक होने की वजह से वे कई बीमारियों से ग्रस्त हैं।

जांगड़े की पत्नी कमला जांगड़े का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से किसी ने पूछ-परख नहीं की है, न ही किसी ने संपर्क किया। उन्होंने कहा कि जांगड़े ने अपना जीवन देश और पार्टी की सेवा में लगा दिया, लेकिन पार्टी की तरफ से अभी तक कोई खोज खबर नहीं लेना कई सवालों को जन्म दे रहा है। इधर, परिजनों ने भी आस नहीं छोड़ी है और वे स्थानीय प्रयासों से जांगड़े के बेहतर इलाज के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

राजनीति में लम्बे समय से सक्रिय

90 वर्षीय जांगड़े का लंबा राजनैतिक अनुभव रहा है। वे पहली बार 1950 में देश की अंतरिम संसद के सदस्य मनोनीत हुए थे। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1952 में पहली लोकसभा के आम चुनाव में बिलासपुर से निर्वाचित होकर संसद में प्रवेश किया।वह 1957 और 1989 में भी छत्तीसगढ़ से निर्वाचित होकर लोकसभा में पहुंचे।अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अपना योगदान दिया। वह प्रथम, द्वितीय और 9वीं लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा में वर्ष 1962, 1972 और 1985 में विधायक के रूप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

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