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तीन तलाक पर सरकार को राज्यसभा में अपनाना होगा लचीला रुख !

नई दिल्ली: तीन तलाक के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ी ही आसानी से लोकसभा में बिल पास करा लिया है। लेकिन राज्यसभा में उसके लिए राह आसान नहीं है। राज्यसभा में सरकार को हर हाल में लचीला रुख अपनाना होगा नहीं तो मामला लटक सकता है। विपक्ष की ओर से कई संशोधन दिए जा सकते हैं। आपको बता दें कि लोकसभा में बिना किसी संसोधन के बिल पास कर दिया गया है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की की ओर से दिए गए संशोधनों को खारिज कर दिया था।

कांग्रेस ये संशोधन ला सकती है
1- तीन साल की सजा के पक्ष में नहीं है।
2- पति जेल चला जाएगा तो महिला को गुजारा भत्ता कौन देगा।
3- गुजारा भत्ता और मेंटिनेंस अलाउंस को परिभाषित किया जाए।
4- तीन तलाक साबित करने के लिए महिला पर ही सारा बोझ डाल दिया गया है. गरीब महिलाओं के लिए दिक्कत होगी।

अभी तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस बिल को लेकर कोई पत्ते नहीं खोले गए हैं। राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने पहले ही एक साल की सजा का सुझाव दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल भी इस बिल के खिलाफ हैं। विपक्षी दलों के सांसदों की ओर से मुख्य चिंता इस बात की है महिला को गुजारा भत्ता कौन देगा इसको लेकर कोई साफ प्रावधान नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बिल के प्रारुप को लेकर अगर सहमति न बन पाई तो सेलेक्ट कमेटी के पास बिल भेजा जा सकता है।

गौरतलब है कि लोकसभा ने गुरुवार को तीन तलाक को आपराधिक करार देते हुए इसका इस्तेमाल करने वाले मुस्लिम पतियों को तीन साल की सजा के प्रावधान वाले विधेयक को पारित कर दिया। इससे पहले सरकार ने विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया।मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 ध्वनिमत से पारित किया गया। इससे पहले रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा विधेयक को लोगों की राय जानने के लिए रखे जाने की मांग को खारिज कर दिया गया।

असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम) व प्रेमचंद्रन सहित विपक्षी सदस्यों द्वारा कई संशोधन के प्रस्तावों को मत विभाजन में अस्वीकार कर दिया गया। सरकार द्वारा विधेयक को पारित कराने पर अडिग रहने का अनुमान इसे सुबह पेश कराने से लगाया जा सकता है, जिसे प्रासंगिक नियमों को निलंबित करके दोपहर बाद विचार के लिए लिया गया और शाम सदन के तय समय से देर तक बैठक कर पारित कर दिया गया।

कानून व न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को लोकसभा में पेश किया और इस मामले में सरकार के पक्ष की अगुआई की। प्रसाद ने कहा कि आज इतिहास बन रहा है।

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