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RSS देशभक्ति का मंदिर, RSS के कार्यक्रम में शामिल न होने वाले भूत-पिशाच – अनिल विज

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में विरोधियों के शामिल ने होने को लेकर हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने उन्हें भूत-पिशाच की संज्ञा दे डाली।

अनिल विज ने सोमवार को एएनआई से कहा, ‘आरएसएस देशभक्ति का मंदिर है और मंदिर में भूत-पिशाच कभी नहीं जाते, उनको डर लगता है, शायद इसीलिए कुछ लोग उस मंथन शिविर में जाने का विरोध कर रहे हैं।’

बता दें कि आरएसएस ने ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ विषय पर सोमवार शाम 5:30 बजे से दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम रखा है। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ पर लगने वाले आरोपों और भ्रांतियों का जवाब देंगे। कार्यक्रम में 2000 से ज्यादा बुद्धिजीवियों के शामिल होने की बात सामने आ रही है।

कहा जा रहा है कि संघ की व्याख्यानमाला में सेना, खेल, फिल्म, उद्योग जगत, राजनीति और अन्य क्षेत्रों के बुद्धिजीवी शामिल हो रहे हैं। संघ की तरफ से दावा किया गया है कि कार्यक्रम का न्योता 40 से जयादा राजनीतिक दलों को भेजा गया है लेकिन विपक्षी पार्टियों के नुमाइंदगे शायद ही कार्यक्रम में नजर आएं, क्योंकि उनकी तरफ से कहा जा रहा है कि न्योता मिला ही नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संघ के कार्यक्रम में 60 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी भी आ रही है कि पाकिस्तान के साथ तनाव देखते हुए उसे आमंत्रित नहीं किया गया है। कहा जा रहा है कि सोमवार और मंगलवार यानी दो दिन संघ प्रमुख अतिथियों को संघ से परिचित कराएंगे और तीसरे दिन वह सवाल-जवाब करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर कार्यक्रम शुरू करने को लेकर माना जा रहा है कि संघ ने यह तारीख विरोधियों को साधने के लिए चुनी।

सूत्रों के मुताबिक मोहन भागवत से पूछे जाने वाले सवालों के लिए किसी तरह का सेंसर लागू नहीं होगा, उनसे धर्म परिवर्तन, मॉब लिंचिंग, राम मंदिर, कश्मीर की स्थिति और मोदी सरकार के कार्यों संबंधी सवाल पूछे जा सकेंगे।

विपक्षी दलों के कार्यक्रम से कन्नी काटने की बातों पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया कहा, ‘दिक्कत क्या है कि कुछ लोग संघ को दुश्मन मानते हैं और हम लोग दुश्मनी की राजनीति नहीं करते। आप हमारे वैचारिक विरोधी होंगे, हमारे दुश्मन नहीं हैं।

संघ ने संवाद में आपको बुलाया है, आप जाइए सुनिए। अच्छी लगे तो आपके ऊपर, नहीं लगे तो आपके ऊपर लेकिन आप विचार-विमर्श से क्यों भाग रहे हैं? यह दिखाता है कि इन लोगों की राजनीति दूसरे आधार पर चलती है।’

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