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लिवर ट्रांसप्लांट के लिए पहली बार थमा इंदौर का ट्रैफिक

Liver

इंदौर- प्रदेश में पहली बार आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए शहर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। यानी मानव अंग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए ट्रैफिक को थाम दिया गया। अभूतपूर्व यातायात प्रबंध के बीच लिवर को एयरपोर्ट पहुंचाया गया , जहां से फ्लाइट से गुडगांव ले जाया गया।हमारे गुड़गांव प्रतिनिधि के अनुसार एयरपोर्ट से भी लिवर को तुरत फुरत मेदांता अस्‍पताल पहुंचाया गया।

मौत के बाद एक शख्‍स का लिवर इंदौर के चोइथराम अस्पताल से मेदांता अस्‍पताल ले जाया गया। इसके लिए चोइथराम अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था । इस दौरान मार्ग पर यातायात रोक दिया गया था।

खरगोन निवासी 40 वर्षीय रामेश्‍वर खेड़े का लिवर मेदांता भेजा गया है। रामेश्‍वर की मौत के बाद उनके परिजनों ने अंग दान करने का निर्णय लिया गया था। रामेश्‍वर का निधन कल रात को हो गया था।

ग्राम बड़ी बलवाड़ी निवासी रामेश्‍वर के तीन बच्चे हैं। उसके 2 लड़के और 1 लड़की है। ग्राम बारुड के पास दुर्घटना के बाद सोमवार को उसे इंदौर रेफर किया था। पत्‍नी का नाम किरण है। रामेश्वर के माता पिता का निधन हो चुका है।वह पत्नी के साथ रहता था।

रामेश्‍वर की मौत के बाद यह आवश्‍यक था कि लिवर जल्‍दी से जल्‍दी किसी जरूरतमंद को लगाया जा सके। इसे देखते ही ताबड़ताेड़ विशेष इंतजाम कर प्रशासन और पुलिस की मदद से लीवर को विशेष एंबुलेंस की मदद से एयरपोर्ट भेजा गया। एयरपोर्ट से जेट की फ्लाइट से ऑर्गन दिल्ली लेने के लिए कमिश्नर संजय दुबे ने पुलिस एवं प्रशासन को ग्रीन कॉरिडोर बनाने के निर्देश दिए थे।मुख्यमंत्री के दौरे के अनुरूप यातायात प्रबंधन रखा गया। यह इंदौर के लिए एतिहासिक क्षण रहा।

इस दौरान सड़क पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया। इसके लिए जेट एयरवेज से 5 मिनिट अतिरिक्त समय मांगा गया था किन्तु समय पर लिवर एअरपोर्ट पहुंचाकर दिल्ली के लिए रवाना हुआ। संभागायुक्त ने बातया कि खरगोन जिले के बलवाड़ी गांव के रामेश्वेर खेड़े उम्र 40 वर्ष का एक्सीडेंट हुआ था। जिसको डॉक्टर ने ब्रेन डेड घोषित किया था । इसे 6 घंटे और निगरानी में रखने के बाद परीक्षण किया गया।रामेश्‍वर मजदूरी करता था।

10:22 पर ब्रेन डेड घोषित होने के बाद करीब 11 बजे पोस्‍टमार्टम किया गया। इसके बाद लिवर निकल कर सुरक्षित कर मेदांता हॉस्पिटल की टीम चोइथराम हॉस्पिटल से रवाना हुई। इसके बाद इसे सामान्य फ्लाइट से दिल्ली के लिए भेजा गया।

लिवर मेदांता अस्‍पताल ले जाने के लिए निर्धारित वाहन से आगे भी एक वाहन पायलट करते हुए चला। महू नाका, गंगवाल बस स्‍टैंड अौर एयरपोर्ट रोड पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हुआ। इससे लोगों को अधिक परेशानी नहीं हुई। शहरवासियों के लिए यह कौतुहल का विषय भी रहा।

अस्‍पताल में भी इसके लिए व्‍यापक व्‍यवस्‍था की गई थी और यही हाल करीब 12 किलोमीटर लंबे सुपर कॉरिडोर का रहा।यह सफर करीब आठ मिनट में पूरा कर लिया गया।
अस्‍पताल में भी इस दौरान लोगों का प्रवेश रोक दिया गया था। शहर के प्रमुख चौराहों भी पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे।
चौराहों पर विशेष बल भी लगाया गया था। एंबुलेंस को एयरपोर्ट तक पहुंचने में किसी तरह का व्‍यवधान न हो इसके लिए विशेष यातायात प्रबंध किए गए थे।
मुख्‍यमंत्री के इंदौर आने पर जिस तरह प्रोटोकॉल की तरह यातायात इंतजाम किए जाते हैं ठीक उसी तरह के इंतजाम आए किए गए थे।
विशेष तरह के बॉक्‍स में रखकर लिवर देवी अहिल्‍याबाई अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पर लाया गया। वहां भी एयरपोर्ट प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए थे।

विशेष बॉक्‍स को विमान में रखकर तुरंत ही दिल्‍ली रवाना कर दिया गया। विमान के क्रू सदस्‍यों ने भी इसके लिए आवश्‍यक आैपचारिकताएं तुरत फुरत पूरी की। जानकारों के अनुसार लिवर को पूरी तरह सुरक्षित रखकर दिल्‍ली पहुंचाने के लिए पूरा एहतियात बरता गया। विमान के रूकने और रवाना होने के अलावा अन्‍य औपचारिकताओं में भी शि‍थिलता दी गई। 

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