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जयललिता की जमानत खारिज , जेल में ही रहना होगा

Jayalalithaa

कर्नाटक हाई कोर्ट ने जयललिता की बेल अर्जी को खारिज कर दिया है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को जेल में ही रहना होगा। जयललिता पिछले 10 दिनों से जेल में बंद हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में बेंगलुरु के स्पेशल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है। जयललिता को कोर्ट ने 4 साल जेल की सजा सुनाई है। उन पर 100 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है।

जया की बेल याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश है कि भ्रष्टाचार मानवाधिकार का उल्लंघन है।’ जयललिता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील राम जेठमलानी कोर्ट में दलील रख रहे थे। जया ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्पेशल कोर्ट के फैसले को रोकने और जमानत की मांग की थी। इससे पहले बेंगलुरु पुलिस ने पराप्पना अगरहारा सेंट्रल जेल के चारों तरफ सिक्यॉरिटी कड़ी कर दी थी। जयललिता इसी जेल में 27 सितबंर से बंद हैं। जयललिता की बेल अर्जी को हाई कोर्ट ने एक अक्टूबर को सुनवाई करते हुए 7 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया था।

जयललिता की जमानत याचिका पर सुनवाई करने वाले जस्टिस ए.वी. चंद्रशेखर ने इसे खारिज करने के साथ-साथ इस मामले में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री को मिली चार साल कैद की सजा निलंबित करने की याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले विशेष लोक अभियोजक जी. भवानी सिंह ने अदालत में कहा था कि उन्हें जमानत पर कोई आपत्ति नहीं है। इससे पहले खबर आई थी कि जयललिता को सशर्त जमानत मिल गई है, लेकिन बाद में उसका खंडन किया गया।

दरअसल, जमानत मिलने की सूचना ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के वकील के हवाले से दी गई थी। इसी के बाद तमिलनाडु में चारों ओर उल्लास का वातावरण था। जयललिता एआईडीएमके की महासचिव हैं। बाद में जब इस बात की पुष्टि हुई कि अदालत ने जयललिता की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, तब हालात बदल गए। उल्लास एक तरह से मातम में बदल गया। बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने जयललिता को 27 सितंबर को दोषी ठहराते हुए चार साल कैद और 100 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।

उन पर मुख्यमंत्री रहते हुए आय के ज्ञात स्रोत से 66 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा करने का आरोप साबित हुआ है। अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद जयललिता के करीबी और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के वरिष्ठ सदस्य ओ. पन्नीरसेल्वम मुख्यमंत्री बने।

जयललिता की ओर से राम जेठमलानी ने कोर्ट से कहा कि जेल में बंद अन्नाद्रमुक प्रमुख को स्पेशल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराये जाने के खिलाफ अपील पर सुनवाई लंबित रहने के मद्देनजर तत्काल जमानत दी जानी चाहिए। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री की पैरवी करते हुए जेठमलानी ने स्पेशल कोर्ट द्वारा उन्हें चार साल की कैद की सजा को स्थगित करने की मांग की।

जेठमलानी ने कहा कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 389 के तहत अपील लंबित होने के मद्देनजर सजा को स्थगित कर दिया जाए। धारा 389 के तहत दोषी करार दिए गए व्यक्ति की अपील लंबित रहने पर अपीलीय अदालत यह आदेश दे सकती है कि जिस सजा या आदेश के खिलाफ अपील की गई है, उस पर अमल स्थगित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति जेल में बंद है तो उसे जमानत या निजी मुचलके पर छोड़ा जा सकता है।

हालांकि अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि वह सशर्त जमानत का विरोध नहीं करेगा। बेंगलुरु के स्पेशल कोर्ट द्वारा 66 साल की जयललिता को दोषी ठहराने के बाद उन्हें अरेस्ट किया गया था। 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता की अदालती सुनवाई तमिलनाडु से पड़ोसी राज्य कर्नाटक ट्रांसफर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा अदालती कार्यवाही को राजनीतिक प्रभाव से बचाने के लिए किया था।- एजेंसी

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