#JnuAttack: पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, पहचाने गए नकाबपोश?

नई दिल्ली: दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रविवार रात छात्रों पर नकाबपोशों के हमले के बाद घिरी दिल्ली पुलिस अब ऐक्शन में है।पुलिस ने सोमवार सुबह अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा भड़काने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज कर लिया। पुलिस के मुताबिक उसे मारपीट को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। पुलिस कुछ नकाबपोशों को पहचान लिए जाने का भी दावा कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात कर हिंसा पर तत्काल रिपोर्ट मांगी है। इसी बीच हमले घायल होने के बाद एम्स में भर्ती किए छात्र-छात्राओं को डिस्चार्ज कर दिया गया है। बता दें कि इस हमले में 25 से ज्यादा घायल हुए थे।

बता दें कि जेएनयू में पिछले कई दिनों से फीस बढ़ोतरी का मुद्दा गर्माया हुआ है। रविवार रात कुछ नकाबपोश बदमाशों ने छात्रों और शिक्षकों को बुरी तरह पीट दिया था और कैंपस में तोड़फोड़ की थी। इस मामले में जेएनयू के वामपंथी छात्र संगठन और आरएसएस समर्थित एबीवीपी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। दोनों ही गुट खुद को पीड़ित बता रहे हैं। हालांकि किसी भी एक गुट के हत्थे, कोई ऐसा नकाबपोश नहीं चढ़ा है, जो हिंसा में शामिल रहा है। नेताओं का कहना है कि वह पिटाई के बीच भागने में शामिल थे और उन्होंने आरोपी को पकड़ने के बजाए खुद को बचाने में तेजी दिखाई।

ये नकाबपोश आखिर थे कौन, पुलिस इसकी अब इसकी जांच में जुट गई है। कई शिकायतों के बाद पुलिस ने सोमवार सुबह पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और उन नकाबपोशों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। डीसीपी देवेंद्र आर्य ने बताया कि पुलिस ने रात में इलाके में फ्लैग मार्च करके हालात को काबू करने की कोशिश की, वहीं वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस के पास कई शिकायतें मिली हैं, जिसकी जांच की जा रही है।

सुबह तक पुलिस कैंपस में शांति स्थापित करने में जुटी हुई थी, जिसके बाद जांच की जा रही है। वहीं हिंसा की पूरी जांच जॉइंट सीपी वेस्टर्न रेंज शालिनी सिंह को सौंप दी गई है, जिससे जांच की निष्पक्षता बनी रहे। पुलिस का कहना है कि सोमवार सुबह पुलिस ने दंगे की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, हालांकि अभी आरोपी को नहीं पकड़ा गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि कुछ लोगों की पहचान कर ली गई है, लेकिन अभी उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती।

फीस बढ़ोत्तरी के बाद प्रदर्शनों के बीच जेएनयू प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और 5 जनवरी को उसकी आखिरी तारीख थी। हालांकि शनिवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी इंटरनेट और सर्वर के तार काट दिए, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ठप हो गई। जब कुछ छात्रों ने इस काम का विरोध किया तो कथित तौर पर उनके साथ मारपीट हुई और फिर फीस बढ़ोतरी के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन एबीवीपी बनाम लेफ्ट में बदल गया। रविवार शाम से ही यह प्रदर्शन उग्र हो गया और नकाबपोश बदमाशों के आने के बाद भीड़ हिंसक हो गई। इस दौरान छात्र, टीचर सबकी पिटाई हुई।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद से ही कई वॉट्सऐप चैट्स के स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे हैं, लेकिन वह स्क्रीनशॉट सच नहीं हैं। उनकी सत्यता पर अभी सवाल उठे हैं, क्योंकि जो भी इसे वायरल कर रहा है, वह छात्र संगठनों के नेताओं की तरफ से किए जा रहे हैं और अपने विरोधियों पर आरोप लगा रहे हैं। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जेएनयू टीचर संघ ने विश्वविद्यालय में हिंसा की कड़ी निंदा की है। छात्रों के उकसावे से दूर रहने की अपील की है। संघ ने जेएनयू समुदाय से लोकतांत्रिक तरीके से असहमति दिखाने और शांति की अपील की है।

आईटीओ पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से दिल्ली पुलिस ने देर रात बात की है। छात्रों ने पुलिस के सामने कई मांगें रखीं। छात्रों ने घायल लोगों के लिए तुरंत मेडिकल सहायता की मांग की है। इसके अलावा इस हमले में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार करने की भी की गई है।

छात्र पुलिस पर कैंपस में देरी से पहुंचने का आरोप लगा रहे हैं। रजिस्ट्रार की सलाह पर स्टूडेंट्स ने कई बार 100 नंबर डायल किया। पीसीआर को 90 से ज्यादा कॉल मिलीं लेकिन स्टूडेंट्स का आरोप है कि कई कॉल करने के बावजूद पुलिस देरी से पहुंची और हिंसा रोकने के बजाय चुप रही। पुलिस ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के कहने पर हम अंदर आए। कुछ नकाबपोश देखे गए हैं, जिनकी पहचान की जाएगी। जेएनयू प्रशासन ने कहा कि रात में भी नकाबपोश कैंपस में लोगों पर हमले करते रहे।

बीएसपी चीफ मायावती ने जेएनयू हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए इसकी न्यायिक जांच की मांग की है। मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘जेएनयू में छात्रों एवं शिक्षकों के साथ हुई हिंसा अति-निंदनीय एवं शर्मनाक। केन्द्र सरकार को इस घटना को अति-गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही इस घटना की न्यायिक जांच हो जाए तो यह बेहतर होगा।’