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14 वर्षो से वनवास काट रहा कर्मवीर कब होगी घर वापसी


स्पेशल रिपोर्ट  :- निशात सिद्दीकी 

Makhan_lal_Chaturvediखंडवा – 30 जनवरी देश के दो महान विभूतियो की पुण्य तिथि है। ये है पूज्य बापू महात्मा गांधी ओर ..एक भारतीय आत्मा पं माखनलाल चतुर्वेदी। प्रदेश सरकार ने फरमान जारी कर शहीदों की स्मृति में शुक्रवार को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने के आदेश दिये है। इसमें कोई दो मत नहीं कि देश को आजादी दिलाने वाले लोग (गण) या उनका नाम आज भी तंत्र के आगे बेबस है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि पं. माखनलाल चतुर्वेदी के स्मृति बना कर्मवीर विद्यापीठ। इसे आंरभ हुये करीब 15 साल हो चुके है लेकिन संस्थान अभी भी वनवास से उभर नहीं पा रहा है। यह वनवास मिला है उसे आजाद हुये भारत के सरकारी तंत्र से। पहले जो जमीन तय की गयी उसे प्राथमिकता तय कर एक उद्योगपति को दे दी गयी। दो साल पहले बमुश्किल कर्मवीर संस्थान को उसके स्वयं के भवन के लिये भूमि आवंटन का प्रस्ताव मान्य किया गया। चीराखदान रोड पर उपलब्ध 20.35 हेक्टेअर जमीन में से लगभग 2 हेक्टेअर जमीन चिन्हित की गयी लेकिन आवंटन प्रक्रिया को लालफीताशाही में दम तोड़ने के हवाले कर दिया गया।प्रोसेसिंग फीस के पांच हजार रूपये भी तहसीलदार ने ले लिए है। जैसे तैसे प्रक्रिया को आगे बढाकर सभागायुक्त के पास भेजा गया तो उस पर फिर सवाल गढ दिये गये और मामला फिर लालफीताशाही के हवाले उलझन में डाल दिया गया। संभागायुक्त ने 2 जनवरी 2015 के पत्र मे पूछा कि वांछित भूमि का उद्देश्य बताये? उपयोग (भवन) के बजट की सिथति। अनुबंधपत्र सहित अन्य क्यूरी की है।

सरकार ने ताजे तोर पर फरमान दिया है कि शहीद दिवस सम्पूर्ण गरिमा के साथ मनाया जाये। हाल ही में गणतंत्र दिवस का हश्र देख चुके है जबकि एक किसान(गण) ने तंत्र को जोरदार झटका देते हुये पुरस्कार लेने से मना कर दिया और आरोप लगाया कि यह फिक्सिंग है। शुक्रवार को एक बार फिर शहीदों का नमन करते हुये दो मिनट का मोैन रखकर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित कर उन्हें फिर पूरे साल के लिये तंत्र के हवाले छोड दिया जायेगा।

देश के चोैथें स्तंभ में गिने जाने वाले प्रेस और इसके लिये पौध खडी करने वाले संस्थान अपने ही पितृ पुरूष के पक्ष में न्यायदान कराने में कामयाबी दर्ज नहीं करा पा रहे है यह सुनिश्चित विचारणीय है। नगर में कई क्षेत्रों में सरकारी जमीन बाले बाले बिक रही है और वहां निजि क्षेत्र के कारेाबारीयों के गोदाम व आवास आकार ले गये है लेकिन प्रशासन धृतराष्ट्र की तरह आंख पर पट्टी बांध कर बैठा है।

MCU_Logoकब होगी कर्मवीर की घर वापसी
माखन दादा की कर्मभूमि खंडवा रही है । आजादी के आंदोलन का अलख जगाने के लिये उन्होने कर्मवीर अखबार का प्रकाशन खंडवा से ही किया। वे स्वतंत्रता सग्राम सेनानी ,साहित्यकार ,कवि और पत्रकार थे। प्रदेश सरकार ने उनकी स्मृति में उन्ही के नाम से राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में आंरभ किया। इसी संस्था का विस्तार परिसर कर्मवीर विद्यापीठ की स्थापना सन 2000 में खंडवा में की गयी। लेकिन दादा के नाम के कर्मवीर विद्यापीठ को 14 वर्षाे बाद भी एक अदद भवन के लिये भूंखड की तलाश है। आज भी विद्यापीठ किराये के भवन में संचालित हो रहा है। इतने वर्षाे में ना तो विद्यापीठ को स्वयं का भवन मिल पाया और ना ही भूमि। माखन दादा के नगर में उनके नाम के पत्रकारिता विश्वविद्यालय की ये दुगर्ति समझ से परे है।

कर्मवीर विद्यापीठ की स्थापना पर यह आशा थी कि खंडवा में जल्द ही एक बड़ा और सुव्यवस्थित भवन तैयार होगा जहां पत्रकारिता की नई पीढ़ी आकर पत्रकारिता के गुर सीखेगी। लेकिन सन 2000 में एक होटल के कमरे से आरंभ हुआ ये सफर किराये भवन पर आकर रूक गया। हर बार कुलपति और रजिस्ट्रार अपनी प्राथमिकताओं में खंडवा के कर्मवीर को रखते है भवन बनाने के बड़े-बड़े वादें करते है लेकिन तंत्र के आगे परिणाम सिफर ही नजर आते है। मज़े कि बात तो यह की विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होते है। जो विश्वविद्यालय के कल्याण के लिए स्वयं निर्णय लेते है बावजूद इसके अब तक कर्मवीर विद्यापीठ का वनवास खत्म नहीं हो रहा। कर्मवीर विद्यापीठ के पूर्व छात्र भी चाहते है की विद्यापीठ की घर वापसी हो ताकि खंडवा एक पर फिर पत्रकारिता की नई इबारत लिख सके।

0 अमूल्य धरोहर देना पड़ी भेंट।
माखन दादा के जीवन से जुड़ी अमूल्य कृतियों से समाज और उन्हें प्रेरणास्रोत मानने वाले रूबरू हो लेकिन शहर में संग्रहालय नहीं बनने के अभाव में धरोहर संजोये नहीं जा सकी। उनके ही पौत्र प्रमोद चतुर्वेदी बताते है कि माखन दादा प्रेस में कार्य के दौरान गुरु माधवराव सप्रे की तस्वीर हमेशा अपने टेबल के सामने लगाए रखते थे। सप्रेजी की वो तस्वीर एवं कर्मवीर समाचार पत्र की कई प्रतियां अंततः भोपाल के सप्रे संग्रहालय को उपहार में देना पडी । काफी मशक्कत के बाद माखन दादा की प्रतिमा को स्थापित करने के लिये तीन पुलिया क्षेत्र में कलाली के पास स्थान दिया गया। तीन पुलिया की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है तो कलाली होने के मायने सभी समझते है। माखन दादा की प्रतिमा के पास लगी सुरक्षा जाली के सरिए भी चोरी होने लगे थे तो स्थानीय पत्रकारों और पूर्व छात्रों ने आवाज बुलंद की तब जाली दुरूस्त की जा सकी ।

0 इन्होने कहा
मुख्यमंत्री सस्थान की महापरिषद के अध्यक्ष है। मुख्यमंत्री जब भी खडवा दौरे पर आए उन्हें सस्थान के छात्रों और पूर्व छात्रों ने मिलकर ज्ञापन दिया और कर्मवीर विद्यापीठ के लिए जमीन देने की मांग की लेकिन परिणाम अब तक नकारात्मक है।
शेख रेहान
पूर्व छात्र कर्मवीर विद्यापीठ
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0 असुविधाओ के बीच अध्ययन करने की बेबसी झेली। अब तो सरकार को पचडे छोडकर सीधे जमीन आंवटन व बजट देना चाहिये। दुर्दशा अकथनीय है।
अनुरागसिह ठाकुर
पूर्व छात्र कर्मवीर विद्यापीठ 
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0 सभागायुक्त की क्यूरी बेतुकी है। संस्थान का नाम अपने आप मे उद्देश्य को प्रगट करता है। संस्थान 15 सालों से खंडवा में संचालित हो रहा है। यह केवल उलझाने की फितरत है।अब तो आंदोलन ही उपाय नजर आता है।
रजनी शर्मा
पूर्व छात्रा कर्मवीर विद्यापीठ 

 

 

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