कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती जारी है। यही वजह है प्रशासन ने गुरु पूर्णिमा (4 जुलाई) पर हर साल की तरह लगने वाले मेले व उत्सव पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। 90 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है जब भक्त श्री धुनीवाले दादाजी की समाधि के दर्शन नहीं कर पाएंगे। 1 से 10 जुलाई तक खंडवा की सीमाएं भी सील रहेंगी ताकि महाराष्ट्र के नागपुर, पांढूर्ना, बैतूल, छिंदवाड़ा और अन्य स्थानों से कोई भी व्यक्ति शहर में प्रवेश नहीं कर सके। पूर्णिमा पर आश्रम क्षेत्र में रहने वाले सीमित सेवादार और पुजारी ही वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पूजन-अभिषेक व आरती करेंगे।

बुधवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर अनय द्विवेदी ने मंदिर ट्रस्ट, पटेल सेवा समिति व दादाजी भक्त छोटे सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में मंदिर में यथास्थिति में पूजा-अर्चना पर समिति सदस्यों ने सहमति जताई।

जिले के आसपास सहित बाहरी प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को रोकने के लिए कलेक्टर महाराष्ट्र व राजस्थान सहित अन्य राज्यों के जिलों के कलेक्टरों से सीधे बात कर सीमा सील होने की जानकारी देंगे। मंदिर प्रबंधन ट्रस्ट से बाहर से आने वाले भक्तों की सूची लेकर उन्हें भी जिला प्रशासन द्वारा गुरु पर्व पर खंडवा नहीं आने का आग्रह करेगा।

बैठक में कलेक्टर ने ट्रस्ट से सेवाधारियों एवं भक्तों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में एसपी विवेकसिंह, एडीएम नंदा भलावे, एसडीएम संजीव पांडेय, एएसपी सीमा अलावा, मंदिर ट्रस्ट के प्रकाशचंद बाहेती, शांतनु दीक्षित, पटेल सेवा समित के मदन ठाकरे, जतिन पटेल, छोटे सरकार के प्रतिनिधि आरके टंडन व सुनील जैन आदि मौजूद थे।

पहला स्तर पर प्रदेश के बाहर से आने वाले भक्तों को रोकने के लिए जिले की सीमाएं सील की जाएगी। यहां पर तैनात जवान बाहर से आए लोगों को रोककर वापस लौटा देंगे।

दूसरा जिले के भीतर से आने वाले भक्तों का प्रवेश भी प्रतिबंधित होगा। किसी भी नगर या गांव से भक्तों को नहीं आने दिया जाएगा।
तीसरा दादाजी मंदिर परिसर की सीमाओं के बाहर भी पुलिस की सख्ती रहेगी। लोगों को नहीं आने देंगे।

हर साल आते हैं चार लाख से अधिक श्रद्धालु
मंदिर ट्रस्टी सुभाष नागौरी के अनुसार तीन दिनी मेले में प्रदेश के साथ ही, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और यूपी से भी दर्शन के लिए 4 लाख से अधिक श्रद्धालु आते थे। 20 हजार से ज्यादा लोग 400 किमी तक की पदयात्रा कर करीब डेढ़ हजार निशान चढ़ाते थे। धर्मशालाओं में उनके ठहरने की नि:शुल्क व्यवस्था रहती थी। 150 से अधिक भंडारों में स्वादिष्ट व्यंजन बनते थे। शहर के व्यापारी भी दुकानें बंद कर बाहर से आने वाले भक्तों की सेवा में जुटे रहते थे।

वरिष्ठजन बच्चों को मंदिर न आने की अपील

सभी धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी व्यक्ति जो वहां प्रवेश करेगा उसका नाम, पता, मोबाइल नम्बर रजिस्टर में दर्ज करना होगा। रजिस्टर की प्रति प्रत्येक सोमवार को संबंधित एसडीएम को उपलब्ध कराना होगी। जिला प्रशासन ने 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठजन तथा 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मंदिर न आने की अपील की है।

जिले के अन्य धार्मिक स्थल भी 16 जून के पहले नहीं खोले जाएंगे। धार्मिक स्थल खुलने के बाद उतने ही व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति होगी, जिससे श्रद्धालुओं के बीच 6 फीट की दूरी व सोशल डिस्टेंस बराबर हो। सभी को मास्क लगाना अनिवार्य होगा। सभी धार्मिक स्थलों में सीसीटीवी लगाना होंगे। इनकी हर सप्ताह निगरानी भी होगी।

दूसरे धार्मिक स्थल भी 16 जून के पहले नहीं खुलेंगे
लॉकडाउन के बाद 25 मार्च से श्री दादाजी मंदिर का प्रवेश द्वार बंद है। यहां केवल आश्रम परिसर में रहने वाले सेवाधारियों को ट्रस्ट कार्यालय के पास बने गेट से प्रवेश दिया जा रहा है। मंदिर में दैनिक पूजन, अभिषेक सहित अन्य कार्यक्रम पुजारी और वहां रहने वाले भक्त ही कर रहे हैं।
{1 जुलाई से सील होंगी खंडवा की सीमाएं, दिल्ली गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान से आने वाले भक्तों को सीमा से लौटाया जाएगा
{ पर्व के दिन भी आश्रम में रहने वाले सीमित सेवादार और पुजारी वर्तमान की तरह ही अभिषेक, पूजन व आरती कर सकेंगे