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झांकी अखंड मार्ग खंडवा की आत्मा – अशोक पालीवाल

खंडवा: संपूर्ण देश के राष्ट्रभक्तों की आत्मा अखंड भारत है, वैसे ही अखंड मार्ग खंडवा की आत्मा है। महादेवगढ़ की झांकी खंडवा के हिंदू समाज की झांकी है, यह जब भी निकलेगी अखंड मार्ग से ही निकलेगी। महादेवगढ़ समाज जागरण का केंद्र है।

समाज ने ही विश्वास कर इसे आस्था का केंद्र माना है। सोमवार को महादेवगढ़ में महाआरती के पश्चात मातृशक्ति द्वारा झांकी का उसी स्थान पर विसर्जन किया जाएगा। समाज जागरण के माध्यम से उत्साह पूर्ण त्यौहारों की वापसी हो, इसीलिए सतत कार्य किया। यहां से लोकहित, समाजहित में उठाई गई आवाज को पूरे समाज ने स्वीकार किया, खंडवा बंद इसी स्वीकारिता का उदाहरण है।

हिंदू एकता के सुखद परिणाम भी सफलता के रूप में देखे, पूर्व में हिंदू त्यौहारों पर जो प्रशासनिक दबाव के चलते उत्साह समाप्त हो गया था, वह उत्साह आज पुनः आया है।

यह बात रविवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में मार्गदर्शक अशोक पालीवाल ने कही। इस दौरान महादेवगढ़ के पुजारी पंडित शैलेंद्र पाण्डेय, झांकी अध्यक्ष विजय हिंडौन मौजूद थे। श्री पालीवाल ने कहा की खंडवा में वर्षों बाद निर्भय होकर हिंदू समाज द्वारा श्री गोगा नवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, मां भगवती की उपासना का पर्व नवरात्र, गरबा उत्सव, दशहरा एवं दीपावली जैसे त्यौहारों पर समाज का उत्साह पुनः जागृत हुआ एवं समाज ने निर्भिक होकर सारे पर्व मनाये।

यही महादेगढ़ से चलाये गये समाज जागरण का परिणाम है। हमने कभी अभिमान नहीं संविधान का सम्मान ही किया है। भारत माता को परमवैभव पर पहुंचाने एवं भारत की अखंडता के लिए कार्य कर रहे है। जिस दिन हम सक्षम होंगे, उस दिन खंडवा को अखंड करके की रहेंगे, महादेवगढ़ की झांकी अगर निकलेगी तो समाज को साथ लेकर अखंड मार्ग से ही निकलेगी। कौन जीता कौन हारा इसका उत्तर हमे देने की आवश्यकता नहीं है, इसका उत्तर तो स्वतः हिंदू समाज देगा। आतंक को समाप्त कर शांति की स्थापना हमारा उद्देश्य।

पत्रकारवार्ता में श्री पालीवाल ने कहा कि केवल सत्ता से मत करना परिवर्तन की आस, जागृत जनता के केंद्रों से होगा अमर समाज। हम समाज जागरण के माध्यम से शक्ति का संचय कर शांति की स्थापना में लगे है। जब तक शहर में आतंक के मार्ग एवं आतंक की विचारधारा जीवित है, शांति की स्थापना हो ही नहीं सकती। इसका ताजा उदाहरण जलेबी चौक की वह आतंक की विचार धारा जिससे इस्लामिक राज्य की स्थापना का संदेश देकर पूरे देश को शर्मशार किया गया।

तीन दादाओं के नाम से प्रसिद्ध इस नगरी को आतंक की विचारधारा वाली नगरी के नाम से पूरे देश ने देखा। पूर्व में भी इस शहर ने देश तोड़ने की विचारधारा एवं आतंकवाद के दंश को झेला है। हमारा मूल उद्देश्य खंडित हुए मार्ग को अखंड कर, आतंक को समाप्त कर शांति की स्थापना थी, हम तो एकता का संदेश देना चाहते थे।

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