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सड़क पर ‘अन्नदाता’, सरकार से ये हक मांग रहे किसान

 

देश का ‘अन्नदाता’ सरकार से अपना हक मांगने गुरुवार को एक बार फिर से सड़कों पर हैं। ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC)) के नेतृत्व में देश के 200 से अधिक किसान संगठन 29-30 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने जा रहे हैं।

इस दौरान भारी मात्रा में जगह-जगह पुलिस तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब पुलिस के संपर्क में है।

इस बार की रैली को ‘किसान मुक्ति मार्च’ का नाम दिया गया है। देशभर से करीब एक लाख किसान इस रैली में हिस्सा लेने के लिए रामलीला मैदान में जुट रहे हैं।

जानिए क्या हैं किसानों की मांगें:-

1- किसानों के कर्जा माफ किया जाए और उन्हें लागत का डेढ़ गुना दाम देना सुनिश्चित किया जाए। ये किसानों की मुख्य दो मांगें हैं।

2- किसानों के लिए न्यूनतम आय तय करने, 60 साल की आयु के बाद किसान को 5,000 रुपये प्रति माह पेंशन की मांग की गई है।

3- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए। इस योजना में किसानों को लाभ मिलने के बजाय बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है।

4- सरकार पूर्ण कर्जमाफी करें और बिजली के बढ़ाए दाम वापस ले।

5- किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त में बिजली दी जाए।

6- दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटा दी जाए।

7- किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए। महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए।

8- जिन किसानों ने खुदकुशी की है, उनके परिजन को नौकरी और परिवार को पुनर्वास दिलाने की मांग उठाई गई है।

9- स्वामीनाथन कमिटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय सी-2 लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर दिया जाए।

10- सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी जाए।

11- खेती में उपयोग होने वाली सभी चीजों को जीएसटी से बाहर करने की मांग अहम है।

12- चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपये प्रति किलो किया जाए और 7 से 10 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

जिन दो मुख्य मांगों की बात की गई है, उसके लिए संसद में दो बिल भी लाए जा चुके हैं। तीन अगस्त के दिन महाराष्ट्र से लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने दो प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश किए थे।

इन दोनों बिल को कांग्रेस, सीपीआई (एम), शिवसेना, बसपा, एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके सहित कुल 21 राजनीतिक दलों ने अपना समर्थन भी दिया है।

लेकिन, उसके बाद बात आगे नहीं बढ़ पाई। अब देखना है कि आज की रैली में किसानों की मांगों पर अंतिम मुहर लगेगी कि नहीं।

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