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शिव के राज में लुटती भाँजी, मिटती साख

सकारात्मक की तुलना में नकारात्मक चीजें 9 गुना तीव्र होती है। यही कारण है कि अच्छे कार्यों का प्रचार व प्रसार करना पड़ता है जबकि बुरे कार्य अपने आप जंगल में आग की तरह फैलते हैं। ऐसा ही कुछ घटित मध्यप्रदेश में शिवराज के शासनकाल में हो रहा है।

निःसंदेह नियत से निर्यात को बदला भी जा सकता है, निखार लाया जा सकता है लेकिन शासन एवं सरकार के बीच जब कोई कड़ी कमजोर होती है तो वहां न केवल टूटने की आशंका हमेशा बनी रहती है बल्कि टूट कर कितनो को क्षति और कैसा कलंक लगेगा यह अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। कहते है कि नजर से बचने के लिए काला टीका लगाया जाता है लेकिन जब यह दाग बन जाए तो इसे धोना भी मुश्किल हो जाता है।

जिस प्रदेश में शिवराज भांजे-भांजियों के मामा के रूप में स्थापित है वहां सरे राह भांजी लुटे तो शासन पर बट्टा लग साख ही मिटेगी। हाल ही में 31 अक्टूबर को एवं भांजी केरियर बनाने प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग से शाम वापस लौट रही तब दोनों थानों से मात्र कुछ मीटर दूरी पर आसामाजिक तत्वों द्वारा सरे राह इज्जत को तार-तार कर दिया लेकिन इसे भांजी की शक्ति ही कहेंगे अपने साथ हुए दुराचार की आप बीती जब थाने में जाकर बताई तो उसे गंभीरता से न केवल लिया बल्कि इधर से उधर 24 घण्टे तक भटकाते रहे।

वो भी तब इस शक्ति के माता-पिता स्वयं पुलिस में सेवारत् हैं। यहां यक्ष प्रश्न उठता है क्या म.प्र.की पुलिस इतनी संवेदनहीन हो गई है। पुलिस महकमें के परिवार के साथ घटी अप्रत्याशित विचलित करने वाली घटना पर इतनी घनघोर लापरवाही कि रिपोर्ट तक दर्ज न करी। ये शायद पुलिस का नकारात्मक कृत्य होगा।

कुछ निकम्मों की वजह से पूरा पुलिस तंत्र बदनाम हुआ सो अलग। यदि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज हस्तक्षेप नहीं करते तो शायद ये मामला भी अन्य की तरह चलता होता।

ये तो उस पुलिस दम्पत्ति का साहस हैं जिसने स्वयं पहल कर 24 घण्टे के अंदर अपराधी को न केवल धर पकड़ा। फिर रिपोर्ट लिखने में हीला हवाला क्यों? शिवराज के हस्तक्षेप के बाद पुलिस महकमा हरकत में आया आदतानुसार दो चार पुलिस कर्मियों को सस्पेन्ड कर दिया।

सुनने में अटपटा जरूरत लगता है लेकिन आंकडे झूठ नहीं बोलते। 01 फरवरी 2016 से फरवरी 2017 तक दुष्कर्म में 4279 प्रकरण इनमें से 2260 नाबालिगों के साथ अपराध एवं 248 के साथ गैंग रेप दर्ज हुआ। 2014 में 14 दुष्कर्म रोज दर्ज, 2015 में 12 दुष्कर्म रोज एवं 2016 में 11 दुष्कर्म रोज हो रहे हे।

2012 में भी इसी क्षेत्र में एक नाबालिग का अपहरण दुष्कर्म बाद मे हत्या। एक कार मैकेनिक मेरे मित्र मुस्तफा द्वारा अपराध को अंजाम दिया गया था इस दिल दहलाने वाली घटना ने राजधानी को हिलाकर रख दिया था।

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास के एक लैंगिक सुरक्षा मानक इण्डेक्स बनाया इसमें 170 मानको का आंकलन दिया गया जिसमें प्रमुख रूप से चार चुनौतियों शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी एवं हिंसा सम्मिलित किया गया। जारी लिस्ट में महिलायें के लिए गोवा सबसे सुरक्षित है एवं सबसे खराब बिहार मात्र 6वें स्थान पर है।

निःसंदेह शिवराज भांजियों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे लाडली लक्ष्मी योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, तेजस्विनी को चलाना भांजियों के प्रति लाड और चिंता को प्रदर्शित करता है। यह एक दुखदायी पहलू रहा भांजी के साथ दुष्कर्म एवं खाकी से खाकी को दर दर भटकना में निःसंदेह प्रदेश की पुलिस के इतिहास पर न केवल काला अध्याय है बल्कि उनके माथे पर एक कलंक भी है जिससे कही न कही प्रदेश भी शर्मसार हैं।

डाॅ.शशि तिवारी
लेखिका सूचना मंत्र की संपादक हैं

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