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चुनावी चकल्लस के बीच दब न जाए किसानों की आवाज़

मोदी सरकार में किसानों को भी अच्छे दिन की आहट सुनाई दी लेकिन दिल्ली चुनाव इस आहट के आवाज को कुंद करने पे तुला है | पेट्रोल मूल्यों की कीमतों में गिरावट के कारण ,फसलों व सब्जियों के बढ़ते दाम के कारण किसानों के चहरे खिल्खीला रहे थे लेकिन नेताओ के चुनावी बयानबाजी इस पर पानी फेरती नजर आ रही है |

 

इस समय दिल्ली में सब्जियों का दाम बढ़ गया है जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हाय तौबा मचा है। यह स्वाभाविक है क्योकि दिल्ली में चुनावी चकल्लस भी अपने शबाबों पर है लेकिन भारतीय अर्थ नीति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले किसानों के लिये यह अच्छी खबर नहीं है | जहा हम 7वा वेतन आयोग का आनंद उठा रहे है वही किसान की ” दिहाड़ी ” लगातार घटती जा रही है | इन सब्जियों के बढ़ते दाम के पीछे कई कारण है जैसे – ख़राब मौसम व कोहरे के कारण मॉल ढुलाई में आ रही परेशानी |

चंद वोटो के लिए बयान बाजी करने वाले नेताओ को सोचना चाहिए कि लगातार किसानों  की दिहाड़ी घटती जा रही है | एक रिपोर्ट के मुताबिक 2008 – 09 में किसानों  की दिहाड़ी 267 रूपये थी जो घट कर 2013 – 14 में 254 रुपये पर आ गई है | यह रिपोर्ट भारतीय किसानों  की वास्तविकता को बयान करने के लिए काफी है |

क्या किसानों  को अगर उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले तो हंगामा उचित है ?इस समय अगर फसल उत्पादन की कुल लागत को देखा जाय तो इसमे काफी बढ़ोतरी हुई है और खेती एक महंगा उद्योग का रूप ले रही है लेकिन छोटे किसानों  के लिये यह काफी मुश्किल का दौर है | अब जब समय किसानों  के अनुकूल हुआ तो इन नेताओ को दिल्ली चुनाव का दर्द सताने लगा | यह राजनीति पिछले 67सालों से किसानों को कंगाल बनाने पर तुली है | इसी के कारण किसानों  की दिहाड़ी में लगातार गिरावट दर्ज किया जा रहा है |

यह बहुत बड़ी बिडम्बना है की इन राजनेताओं को कभी यह नहीं याद आता कि यूरिया व उर्वरक के दाम को कम करने के लिये हंगामा करे | इसी भारतीय राजनीति के कारण ही आज 17 वर्षो में तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की ,यह दौर यही नहीं थमा लगभग 42 फीसद किसान विकल्प उपलब्ध होने पर खेती छोड़ने के लिये तैयार है | किसानों  के लिए राहत की एक मात्र बात किसानों  को दिया जाने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी है | यह भी गौर करने वाली बात है कि पिछले तीन वर्षो में गेहूं व चावल के समर्थन मूल्य में केवल 50 रुपए प्रति क्विंटल की बृद्धि हुई है लेकिन उर्वरको के दामो में लगभग 40 फीसद की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई |

अगर दिल्ली के चुनावी एजेंडे की बात करे तो जहा भाजपा का एजेंडा दिल्ली का विकास है तो वही आप ने तो अपना एजेंडा ही बदल दिया है | लोकपाल के लिये सत्ता सुख का त्याग करने वाली “आम आदमी पार्टी “ ने इस चूनाव में लोकपाल को ही भुला दिया है | अगर इस पर ध्यान दिया जाय तो कोई भी आप का बड़ा नेता लोकपाल की बात नहीं कर रहा ,आखिर क्यों एजेंडे में परिवर्तन किया गया ? दिल्ली में किसानों  की संख्या कम है लेकिन यह भी सच्चाई है कि किसानो की अनदेखी नहीं की जा सकती |

यह देख के काफी आश्चर्य होता है कि हर राष्ट्रीय पार्टियाँ किसानो का उपयोग केवल वोट बैंक के लिये करती आ रही है लेकिन सम्पूर्ण भारत के विकास के लिये किसानों  को भी साथ लेकर चलना होगा | अब समय आ गया है जब भारतीय किसानों  की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाय और इसके लिये भारतीय राजनीति को भी किसानो का साथ देना होगा |

:- नीतेश राय

nitesh rai

लेखक :- नीतेश राय (स्वतंत्र टिप्पणीकार )

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल

के विस्तार परिसर “कर्मवीर विद्यापीठ” में पत्रकारिता के छात्र है । 

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