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जानलेवा सीओपीडी की आगोश मे बुरहानपुर के बुनकर

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बुरहानपुर [ TNN ] मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में लोगो के लिए कपडा बुनने वाले बुनकरो की जिंदगी इसी व्यवसाय से जन्मी एक गंभीर बिमारी लाइलाज सीओपीडी (क्रानिक आब्सट्रक्टिव लंग डिजीज) के चलते तार-तार हो रही है और वे अब शासन प्रशासन की उपेक्षाओ के चलते तिल तिल कर मरने को मजबूर है, और शासन के जिम्मेदार विभाग इस गंभीर बिमारी पर नियंत्रण करना तो दूर बल्की इसकी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालते नजर आ रहे है और सरकारो के पास इस गंभीर बिमारी की रोकथाम के लिए कोई प्रभावी कार्यक्रम ही नही है।

प्रदेश की पावरलूम नगरी बुरहानपुर मे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से पावरलूम व्यवसाय से करीब 1 लाख लोगो की रोजी रोटी चलती है और हजारो पावरलूम बुनकर दिनभर बिना मास्क लगाए लूम चलाते है, कपडा बुनने मे उडने वाले बारिक रेशो के चलते बडी तेजी से सांस की बिमारी बुनकरो मे फैली है जिसके चलते बुनकरो मे टीबी के मरीजो की संख्या तेजी से बढी है,

अकेले इसी वर्ष 2014 मे ही जिला क्षय रोग केन्द्र मे जांच के दौरान बुनकरो मे 835 टीबी के नए मरीज पाए गए है, जिसके बाद यह टीबी से जुडी गंभीर बिमारी सीओपीडी [क्रानिक आब्सट्रक्टिव लंग डिजीज ] के मरीजो की संख्या भी बढने लगी है |

पावरलूम मे पकडा बुनने के दौरान उडने वाले रेशे सांस के माध्यम से फेफडो मे जाकर चिपक जाते है और इससे फेफेडे जैसे नाजुक अंग मे जख्म पैदा होते है जिससे पैदा होती है सीओपीडी जैसी लाइलाज जैसी बिमारी जिससे खांसी मे खून आना, फेंफडे सिकुडना और सांस लेने की लंबी तकलीफो के बाद मरीज का अंत हो जाता है। परंतु इतनी गंभीर बिमारी होने के बावजूद बुरहानपुर मे बुनकर अभी भी बिना मास्क और इलाज के संसाधनो के अभाव मे पावरलूम मशीनो पर काम कर रहे है और गंभीर बात यह है कि अपने रहवास के अंदर ही वह इसे चलाते है जिससे की रेशो से परिवार की महिलाओ और बच्चो मे भी बिमारी के लक्षण देखे जा सकते है। और ऐसे ही माहौल मे यह बुनकर अपनी रोजी रोटी और परिवार का पालन पोषण करने के लिए 10 से 12 घंटे लूम चलाते है।

बुरहानपुर जिला चिकित्सालय के क्षय रोग नियंत्रण केन्द्र मे टीबी की जांच कराने आए 60 वर्षिय मोहम्मद सादिक बताते है कि पिछले 44 सालो से वह पावरलूम बुनकर के रुप मे काम कर रहे थे परंतु गंभीर बिमारी की शिकायत के बाद रोजगार भी छूटा और शासन स्तर से केवल दवाओ के आलावा अब तक और कोई सहायता नही है। यही हाल 22 वर्षिय वसीम अहमद का भी है वह पिछले 10 वर्षो से पावरलूम पर काम कर रहे है और गंभीर बिमारी की शिकायत के बाद उनका भी इलाज जिला चिकित्सालय मे चल रहा है यानि कम उम्र के बुनकर भी तेजी से बिमारी से पीडित हो रहे है, और जिला अस्पताल के अतिरिक्त टीबी वार्ड मे एैसे इलाज कराते मरीज को देखा भी जा सकता है।

बुरहानपुर के जिला चिकित्सालय के क्षय रोग अधिकारी डाॅ हर्ष वर्मा बताते है कि बुरहानपुर मे अकेले वर्ष 2014 मे ही बुनकरो की की गई स्वास्थ्य जांच मे करीब 835 मरीजो मे टीबी पाई गई है जिनमे सीओपीडी के मरीज भी शामिल है, टीबी एवं सीओपीडी के लक्षण लगभग एक जैसे होते है, लंबे समय से बुखार आना, खांसी मे खून आना और सांस लेने मे तकलीफ होना, सीओपीडी के लक्षण 12 साल बाद दिखाई देते है सीओपीडी मे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, पावरलूम मे कपडो से निकलने वाले काॅटन के रेशे सांस के माध्यम से फेफडो मे जाकर जम जाते है जिससे फेफडो मे घाव होते है और सीओपीडी जैसी गंभीर बिमारी का कारण बनते है, टीबी का इलाज है वर्तमान मे बुरहानपुर मे टीबी का इलाज डाॅट एवं डाॅट प्लस पद्धती से जिला चिकित्सालय मे मरीजो को दवाई देकर किया जा रहा है और सीओपीडी का कोई इलाज नही है |

 बुनकरो के कार्य स्थल क्षेत्र को प्रदुषण नियंत्रित करने के साथ ही उन्हे मास्क एवं इससे बचाव के अन्य संसाधन उपलब्ध कराना जरुरी है, वर्तमान मे बुनकर अपने घरो मे ही पावरलूम इकाइया लगाकर काम करते है जिससे वहां काॅटन रेशे से प्रदुषण का असर घर की महिलाओ एवं बच्चो पर भी होता है और वे भी गंभीर रुप से पीडित हो जाते है इसके लिए पावरलूम इकाइयो को बुनकरो के रहवास से अलग शहर के बाहर स्थानांतरित किया जाना जरुरी है, बुनकर बस्तियो मे स्वास्थ्य सुविधाओ के साथ इन्हे स्वास्थ्य जागरुकता के प्रति शिक्षित कर बडी कार्य योजना बनाया जाना भी जरुरी है, डाॅ वर्मा का कहना है कि इस गंभीर बिमारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रशासन, नगर निगम, उद्योग विभाग को भी संयुक्त रुप से बडी कार्य योजना के साथ आगे आना होगा |

बुरहानपुर मे पावरलूम इकाईयो पर काम करने के दौरान रेशो का प्रदुषण इतना अधिक होता है कि बुनकरो को मुंह और नाक पर लगाने के लिए दिए जाने वाले विशेष प्रकार के मास्क तीन दिन मे ही जाम हो जाते है इससे यहां पर रेशो से प्रदुषण की मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है। बुरहानपुर शहर की सबसे बडी बुनकर बाहुल्य बस्ती मोमीनपुरा के स्थानीय पार्षद का कहना है कि उनके वार्ड मे करीब 99 फीसदी बुनकर बसते है उनमे से अधिकतर टीबी एवं सीओपीडी से ग्रसित है साथ ही आर्थिक बदहाली की मार भी झेल रहे है परंतु किसी जनप्रतिनिधि, शासन एवं शासकीय विभागो ने अब तक बुनकरो के वेलफेयर एवं इन गंभीर बिमारीयो की रोकथाम के लिए कोई पहल नही की है और वे इन गंभीर बिमारीयो से ग्रसित होकर जिंदगी और मौत की लडाई लड रहे है।

प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने बुनकरो र्के आिर्थक उत्थान स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास के लिए सन 2001 मे ईकराम उल्ला कमेटी का गठन किया था जिसका अध्यक्ष बुनकर नेता इकराम उल्ला अंसारी को बनाया गया था अंसारी कमेटी ने भी अपनी सर्वे रिपोर्ट मे बुनकरो के आर्थिक उत्थान के साथ ही आवास और स्वास्थ्य के लिए सुझाव शासन को दिए थे जिसमे बुनकरो के आवास अलग एवं पावरलूम इकाई लगाने के लिए शहर के बाहर 72 एकड जमीन उपलब्ध कराने के लिए सुझाव दिया था साथ ही बुरहानपुर शहर जहां पर एशिया मे सबसे ज्यादा अनुपातिक रुप से टीबी की मरीजो की सबसे ज्यादा संख्या पाई जाती है यहां अलग से टीबी हाॅस्पीटल, मरीजो के लिए मोबाईल एंबुलेंस एवं बच्चो की शिक्षा के लिए स्कूले बनाने के सुझाव दिए गए थे इनमे से कोई भी काम बाद की सरकारो ने नही किया, बुनकरो के स्वास्थ्य को लेकर सरकारो द्वारा बरती गई लापरवाही का परिणाम यह है कि आज वे टीबी एवं सीओपीडी जैसी गंभीर बिमारीयो से जूझ रहे है और उनकी सुध लेने वाला कोई नही है, जबकी बुरहानपुर प्रदेश मे सबसे बडा पावरलूम सेंटर होने के साथ ही देश मे भी पांचवे सातवे नंबर पर गिना जाता है।

 स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बुनकरो मे टीबी के इलाज के लिए जिला अस्पताल मे डाॅट जैसे इलाज की पद्यती अपनाई जा रही है और बुनकरो के लिए हेल्थ प्रोग्राम भी अरेंज किए जाते है परंतु सीओपीडी जैसी गंभीर बिमारी के लिए कोई इलाज नही है, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारीयो का कहना है कि बुनकरो के बीच मे जागरुकता अभियान के साथ ही मास्क बांटने की जवाबदारी उद्योग विभाग की है और पावरलूम इकाईयो को भी बाहर ले जाने की जिम्मेदारी भी उद्योग विभाग की ही है बावजूद इसके उद्योग विभाग लापरवाह बना हुआ है।

 उद्योग विभाग का कहना है कि उनके विभाग के पास बुनकरो के लिए कोई योजना नही है, बीच मे कुछ मोह पूर्व कुछ समाजसेवी संगठनो के माध्यम से बुनकरो को मास्क जरुर बंटवाए गए थे। इस मामले मे जब क्षेत्रीय सांसद नंदकुमारसिंह चैहान से बात की गई तो उनका कहना था कि बुनकरो को हो रही सांस की गंभीर बिमारी की जानकारी उन्हे मीडिया के माध्यम से ही मिली है और वे राज्य सरकार से बिमारी की रोकथाम हेतु प्रभावी कार्यक्रम लागु करने के लिए योजना बनवाएंगे। पहले से ही बदहाली की मार झेल रहे बुनकरो को अब सीओपीडी जैसी गंभीर जानलेवा बिमारीे से भी जूझना पड रहा है परंतु शासन प्रशासन की ओर से काई भी ठोस बिमारी नियंत्रण अभियान अब तक शुरु नही किए जाने के चलते वे मौत और जिंदगी की लडाई लड रहे है।

रिपोर्ट – जफ़र अली 

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