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आरुषि हेमराज मर्डर केस : तलवार दंपति बरी, जाने कब क्या हुआ?

उत्तर प्रदेश में नोएडा के सबसे चर्चित आरुषि हेमराज मर्डर केस को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित आरुषि एवं हेमराज की हत्या के आरोपी राजेश तलवार और नुपुर तलवार को आज साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी सजा तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कभी नहीं दी है। संदेह के आधार पर तलवार दंपति को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। तो वहीं दूसरी तरफ सीबीआई जांच में कई तरह की खामियां है। सीबीआई अपनी जांच को पूरा करे।

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को बरी किया और साथ ही जेल से जल्द रिहा होने के आदेश भी दिए।फिलहाल तलवार दंपत्ति राजेश तलवार और नुपूर तलवार को बरी कर दिया गया है। हत्याकांड के मामले में सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने अपील की थी।

गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को राजेश-नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे एक दिन पहले इनको दोषी ठहराया गया था। आरुषि इनकी बेटी थी। राजेश, नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं।

16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के एक घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला था। अगले दिन घर में काम करने वाले हेमराज का शव घर की छत पर मिला था

गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को राजेश व नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे एक दिन पहले इनको दोषी ठहराया गया था। आरुषि इनकी बेटी थी। राजेश, नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं।

 

आरुषि केस : कब क्या हुआ?

2008
16 मई : 14 साल की आरुषि बेडरूम में मृत मिली
हत्या का शक घरेलू नौकर हेमराज पर गया
17 मई : हेमराज का शव घर के टैरेस पर मिला
23 मई : दोहरी हत्या के आरोप में डॉ राजेश तलवार गिरफ़्तार
1 जून : सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली
13 जून : डॉ तलवार का कंपाउंडर कृष्णा गिरफ़्तार
बाद में राजकुमार और विजय मंडल भी गिरफ्तार
तीनों को दोहरे हत्या का आरोपी बनाया गया
12 जुलाई : राजेश तलवार डासना जेल से ज़मानत पर रिहा
10 सितंबर, 2009-
मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम
12 सितंबर : कृष्णा,राजकुमार और मंडल को ज़मानत,
सीबीआई 90 दिन में नहीं दे पाई चार्जशीट

29 दिसंबर, 2010
सबूतों के अभाव में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट
रिपोर्ट में तलवार दंपत्ति आरोपी नहीं थे
परिस्थितिजन्य सबूतों से क़ातिल होने का इशारा

25 जनवरी, 2011
क्लोजर रिपोर्ट के ख़िलाफ राजेश तलवार का प्रोटेस्ट पिटीशन
कोर्ट ने भी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं किया
लेकिन रिपोर्ट के आधार पर आरोप तय किए
तलवार दंपत्ति को सुप्रीम कोर्ट तक भी राहत नहीं

2012
11 जून : सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई शुरू

2013
10 अक्टूबर: आखिरी बहस शुरू
25 नवंबर : विशेष अदालत ने तलवार दंपत्ति को दोषी करार देते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई

2014
जनवरी : निचली अदालत के फ़ैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती

2017
8 सितंबर : इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अपील पर फैसला सुरक्षित रखा

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