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किन्नरों से किये जाने वाले ये टोटके बदल देंगे जिंदगी


तंत्र, टोने-टोटके आदि के क्षेत्र में किन्नर का बहुत महत्त्व और उनके सहयोग से अनेक उपयोगी उपाय बताये गये हैं। इनके द्वारा अथवा इनके सहयोग से किए गए अनेक छोटे-छोटे से उपाय तंत्र क्षेत्र में बहुत प्रचलित हैं। अपने-अपने बुद्धि और विवेक से अपने नित्य जीवन की समस्याओं में इनका उपयोग करके देखें, पता नहीं किन उपायों से आपको आशातीत लाभ मिल जाए। अपने व्यक्तिगत जीवन में भी किसी न किसी व्यक्ति को इनके द्वारा पहुँचा चमत्कारी लाभ अवश्य ही कभी न कभी अनुभूत हुआ होगा।

किन्नर अर्थात् हिजड़ा वर्ग समाज का एक सर्वाधिक तिरस्कृत और उपहासपूर्व रहे हैं। किन्नर का अस्तित्व अनंत काल से चला आ रहा है। महाभारत काल के शिखण्डी और वृहन्नला इसके प्रमाण हैं। इधर समाज और सरकार द्वारा अथक प्रयास किया जा रहा है कि इनको भी समाज में अन्य वर्ग के बराबर ही मान और सम्मान प्रदान किये जाएं। इनके लिए भी वह सब अधिकार सुरक्षित किए जाएं जो समाज के अन्य वर्ग को मिल रहे हैं।

तंत्र, टोने-टोटके आदि के क्षेत्र में किन्नर का बहुत महत्त्व और उनके सहयोग से अनेक उपयोगी उपाय बताये गये हैं। इनके द्वारा अथवा इनके सहयोग से किए गए अनेक छोटे-छोटे से उपाय तंत्र क्षेत्र में बहुत प्रचलित हैं। अपने-अपने बुद्धि और विवेक से अपने नित्य जीवन की समस्याओं में इनका उपयोग करके देखें, पता नहीं किन उपायों से आपको आशातीत लाभ मिल जाए। अपने व्यक्तिगत जीवन में भी किसी न किसी व्यक्ति को इनके द्वारा पहुँचा चमत्कारी लाभ अवश्य ही कभी न कभी अनुभूत हुआ होगा।

जिस किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बुध ग्रह बलहीन है, द्वादश स्थान में है अथवा सूर्य के अत्यधिक निकट होने के कारण दुष्प्रभाव दे रहा है। वह बुध के किसी एक नक्षत्र में किसी बुजुर्ग किन्नर को कुछ सिक्के दें और उनसे प्रार्थना करें कि मैं दुबारा आऊँ तो इनमें से एक सिक्का प्रसाद स्वरूप मुझे दे दें। लगभग नौ दिन बाद बुध के अगले पड़ने वाले नक्षत्र के दिन एक सिक्का आप उनसे उनकी दुआओं और आशीषों सहित ले आएं।

इसको हरे रंग के कपड़े में लपेटकर घर में कहीं सुरक्षित रख लें। बुध ग्रह के दुष्प्रभाव को दूर करने के अतिरिक्त अन्य अनेक बाधाओं, विपत्तियों और विपरीत समय में यह एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। बुध के तीन नक्षत्र हैं – आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती जो लगभग नवे दिन क्रमशः आते रहते हैं।
2. नवजात शिशु के जन्म से ठीक अगले आने वाले किसी बुधवार को अथवा बुध के किसी नक्षत्र में शिुशु को किन्नर की गोद में दे दें। वह बच्चे को आर्शीवाद देगा जो बच्चे के लिए बहुत ही भाग्यशाली सिद्ध होगा।

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3. बच्चे को किसी बुरी नज़र के कारण शरीरिक कष्ट हो रहे हों और चिकित्सक आदि से उनका निदान न हो पा रहा हो, तो तीन चार-दिन लगातार बच्चे को किसी किन्नर की गोद में खेलने के लिए छोड़ दिया करें। उनके हृदय से निकली दुआ, आशीष बच्चे को किसी अच्छे से अच्छे चिकित्सक की दवा से भी अधिक प्रभावशाली सिद्ध होगी।

4. मल-मूत्र अवरोध के कारण बच्चे के पेट में कष्ट हो रहा हो तो किन्नर से उसके पेट पर हाथ फिरवाएं, बच्चे का आशातीत लाभ होने लगेगा।
5. बच्चा यदि किसी असाध्य रोग से पीड़ित है और सब दवाएं निष्प्रभाव सिद्ध हो रही हों तो किसी किन्नर से कुछ दिन तक बच्चे की सेवा करवाएं। वह ही अपने निष्काम मनोभाव से बच्चे को दवा दें। बच्चे को दवा का सुप्रभाव शीघ्र ही दिखाई देने लगेगा।

6. बच्चे के जन्म से उसके अन्नप्राशन तक प्रत्येक बुधवार और प्रत्येक बुध के नक्षत्र को उसको किसी प्रसन्नचित्र किन्नर से आर्शीवाद दिलवाया करें। बच्चे के स्वास्थ्य और उसके उत्तरोत्तर विकास के लिए यह उपक्रम बहुत ही भाग्यशाली सिद्ध होगा।

7. कोई बच्चा अथवा बड़ा कमर का दर्द, आधा सीसी दर्द आदि के कारण पीड़ित है तो 21 बार उसके माथे पर धीरे-धीरे सस्नेह किसी किन्नर से हाथ फिरवाएं। कमर की पीड़ा के लिए उसके बाएं पैर से हल्के से लात लगवाएं। आप देखेंगे कि पीड़ा में चमत्कारी रूप से लाभ मिलने लगा है।

एक बात अन्त में यह अवश्य कहूँगा कि सुफल मिलना अथवा न मिलना अन्ततः निर्भर करता है अपने-अपने कर्म और पुरुषार्थ पर। उक्त उपायों को भी एक पुरुषार्थ मानकर देखें। क्या पता कौन सा क्रम-उपक्रम आपके लिए शुभ फलदायक सिद्ध हो। इसके विपरीत देखें तो किन्नर के कारण अनेक लोग आज त्रस्त हैं।

इसका कारण है कि विवाह आदि शुभ संस्कारों में आशीष, आर्शीवाद के लिए आर्थिक रूप से उनके द्वारा शोषण किया जाना। लोभ और लालचवश छदम् वेश में भी अनेक किन्नर मिल जाएंगें।

उनका काम ही है परिजनों से धन एकत्रित करना। इसके लिए अनेक ऐसे किन्नर भी मिल जाते है जो सभ्यता और शालीनता की सीमा पार करने से भी नहीं चुकते। ऐसा भी प्रायः देखने में मिल जाएगा कि अकारण ही ट्रेन, बस आदि सवारी से अथवा बाजार में दुकानदार आदि से किन्नर बलात् पैसे माँगने लगते हैं। साभार – ब्लॉग द्वारा गोपाल राजू

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