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नोटिफिकेशन के बाद भी मेयर की गाड़ी पर लाल बत्ती

light on the mayor's car after notificationकरनाल [ TNN ] कुछ महीने पहले गाडिय़ों पर लगने वाली लाल बत्ती को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित किए थे, जिसे पूरे देश में लागू किया गया था। उसके बाद प्रत्येक राज्य की सरकार ने गाडिय़ों पर लगने वाली लाल बत्ती को लेकर बकायदा नोटिफिकेशन जारी किए थे। पहले संसद सदस्य और विधानसभा सदस्य भी लाल बत्ती लगाते थे। लेकिन नए रूल ओर रैगुलेशन के मुताबिक अब संसद में पहुंचने वाले सांसद और विधायक अब अम्बर लाईट का प्रयोग करने लगे हैं।

लाल बत्ती लगाने की परमिशन हरियाणा में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पूर्व राज्यपाल, डिप्टी सी.एम., हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, विधानसभा के स्पीकर, कैबिनेट मंत्री, स्टेट प्लानिंग बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन, पूर्व मुख्यमंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता, पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जज तथा लोकायुक्त को लाल बत्ती विद फलैशर लगाने का अधिकार है। बिना फलैशर के लाल बत्ती लगाने का अधिकार स्टेट के मंत्री, विधानसभा के डिप्टी स्पीकर, स्टेट इलैक्शन कमीशनर, एडवोकेट जनरल, चीफ सैक्टरी, डिप्टी मनिस्टर तथा हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन को है। इसके अलावा अम्बर फलैशर वाली बत्ती लगाने का अधिकार प्रत्येक सांसद, विधायक, आई.ए.एस., आई.पी.एस., सभी डिपाटमैंट के प्रमुख, हरियाणा भवन के स्थानीय कमिशनर, अकाऊंटैंट जरनल, किसी कमिशन के चेयरपर्सन, सदस्य तथा विभिन्न विभागों के कमिशन हैड को लगाने का अधिकार है।

यह बात हम नही 10 जुलाई 2014 को हरियाणा सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में कही गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की भले ही हिदायतें हों या फिर हरियाणा सरकार का नोटिफिकेशन हो। यह रूल एंड रैगुलेशन सी.एम. सिटी में नही चलता। यहां की मेयर अपनी गाड़ी पर अम्बर लाईट लगाकर न केवल सी.एम. के काफिले के साथ चलती हैं, बल्कि सार्वजनिक स्थल पर होने वाले कार्यक्रमों में जब हिस्सा लेेने जाती हैं, तब उनकी गाड़ी पर अम्बर लाईट लगी होती है। यही नही उनके पास पुलिस विभाग का एक गनमैन है। यह अलग बात है कि उन्हें गनमैन क्यों मिला।

यह तो पुलिस महकमा ही बताएगा, लेकिन पानीपत के मेयर के पास न तो अम्बर लाईट है और न ही गनमैन। क्या पानीपत के मेयर को कोई खतरा नही है, या फिर करनाल की मेयर को खतरा ज्यादा नजर आता है। शायद इसलिए उन्हें पुलिस विभाग का गनमैन प्रोवाईड करवाया गया है। अब सवाल यह उठता है कि मेयर को नोटिफिकेशन से हटकर अम्बर बत्ती अपने सरकारी वाहन पर लगाने का अधिकार किसने दिया। क्या यह अधिकार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदान किया है या फिर सी.एम. सिटी का कुछ रौब अलग है।

यह बड़ी सोच का विषय है। देश में नेता कानून लागू करने की बात बड़ी दबंगाई से करते हैं, लेकिन खुद उन कानूनों का पालन करना भूल जाते हैं। अब सी.एम. सिटी में जब मुख्यमंत्री खुद करनाल का दौरा करते हैं तो नगर निगम की मेयर सी.एम. के आसपास रहती हैं। जिले के डी.सी., एस.पी. ओर दूसरे अधिकारी भी जानते हैं कि मेयर की गाड़ी पर अम्बर बत्ती लगी हुई है। अब उसे हटाने की जुर्रत कौन करे। यह प्रत्येक के बस की बात नही है। क्योंकि डर है कहीं मेयर सी.एम. के कान में कुछ कह न दें। इसलिए शायद अधिकारी भी अपनी आंखें बंद किए हुए है, लेकिन कानून कागजों में जरूर हैं, लेकिन उसे लागू नही किया जाता। यह अंदाजा आप मेयर की सरकारी गाड़ी पर लगी फलैशर बत्ती को देखकर लगा सकते हैं।

नोटिफिकेशन करेंगे चैक :- इस मामले में जब एस.पी. अभिषेक गर्ग से पूछताछ की गई तो उन्होंने यह जरूर कहा कि वह सोमवार को नोटिफिकेशन चैक कर लेंगे। मेयर को गनमैन दिए जाने बाबत उन्होने कहा कि सी.आई.डी. विभाग से उन्हे सूचना आई थी, तभी गनमैन दिया गया।

रिपोर्ट :-अनिल लाम्बा

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