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फर्जी एनकाउंटर, सेना के 2 अफसर समेत 7 को उम्रकैद

fake encounter caseनई दिल्ली [ TNN ] साढ़े चार साल पुराने मच्छल फर्जी एनकाउंटर केस में दोषी पाए गए कर्नल और कैप्टन समेत सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सैन्य सेवा से बर्खास्त किए जा चुके इन सैनिकों को सेवा से जुड़ा कोई लाभ भी नहीं मिलेगा।

इन्होंने 30 अप्रैल, 2010 को जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में मोहम्मद शफी, शहजाद अहमद और रियाज अहमद को बहला फुसलाकर मच्छल इलाके में लाया और तीनों को गोली मार दी। बाद में बताया गया कि तीनों पाकिस्तानी आतंकवादी थे जो भारतीय सीमा में घुसपैठ का प्रयास करते मारे गए। हालांकि, हकीकत में तीनों जम्मू-कश्मीर के ही बारामूला सेक्टर स्थित नदिहल के निवासी थे।

स्थानीय लोगों ने भी तीनों युवकों को आम नागरिक बताते हुए आरोप लगाया था कि इन्हीं सैन्य कर्मियों के इशारे पर कुछ स्थानीय लोगों ने तीनों युवकों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर सीमाई इलाके में लाया था जहां उसे घुसपैठिया बताकर मार गिराया गया। इस घटना के बाद सेना और स्थानीय लोगों के बीच जबरदस्त भिड़ंत हो गई जिसमें साल 2010 में कुल 110 लोगों की जानें चली गईं।

मारे गए परिजनों की शिकायत पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान अब्बास और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। अब्बास ने पुलिस को 4 राजपूत रेजिमेंट के मेजर उपिंदर के इसमें शामिल होने की बात बताई। पुलिस ने रिपोर्ट में मेजर पर आरोप लगाया कि उन्होंने तीन लड़कों को मारने के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और उन्हें आतंकवादियों का तमगा दे दिया।

फाइनल रिपोर्ट में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों 4 राजपूत रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल डी के पठानिया और इसी रेजिमेंट के मेजर उपिंदर समेत कुल 11 सैन्यकर्मियों को आरोपी बनाया था। पुलिस की जांच रिपोर्ट आने के बाद सेना ने भी मामले की जांच शुरू कर दी थी।

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