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व्यापारियों के कब्जा वाली राह से सख्ती से हटेगा अतिक्रमण

damohदमोह – अनगिनित दुर्घटनाओं तथा कुछ लोगों के लिये असमय काल बन लीलने वाला पत्थर बाजार को हटाने की दिशा में कदम आगे बढ चुके हैं। जिसके चलते जहां एक ओर पत्थर विक्रेताओं में जमकर हडकंप मचा हुआ है तो वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों सहित जनता में प्रसन्नता का महौल बना हुआ है। एैसा नहीं है कि इसको हटाने के प्रयास पूर्व में नहीं हुये कलेक्ट्रर स्वतंत्र कुमार सिंह ने गत 31 मार्च 2014 इसकी अंतिम तिथि तय करते हुये सख्त निर्देश दिये थे। लेकिन नगर पालिका में बैठे कुछ भ्रष्ट्र अधिकारी ,कर्मचारियों के चलते उक्त आदेश को हवा में उडा दिया गया और इसी बीच दो लोगों को काल के गाल में समाना पडा परन्तु इनके कान पर जुं भी नहीं रेंगी? कलेक्ट्रर श्री सिंह के उक्त आदेश का पालन अब होने की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है क्योंकि नगरपालिका परिषद में सीएमओ का प्रभार ग्रहण करते ही तहसीलदार मनोज श्रीवास्तव ने इसको प्राथमिकता से लिया है।

दबंग,कर्मठ छबि के रूप में पहचाने जाने वाले श्री श्रीवास्तव ने हालांकि विभाग के अन्य कार्यों को भी प्राथमिकता से लिया है जिनमें कर वसूली,अवैध नल कनेक्शन,अतिक्रमण,साफ-सफाई भी सम्मिलित है। विदित हो कि नगर के सबसे व्यस्त मार्ग में इस समय काल के रूप में पत्थर की किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करते देखे जा सकते है। हालाकि पिछले कई वर्षो से रखे हुए पत्थरों के कारण कुछ लोग काल की गाल में समा चुके हैं तो वहीं दूसरी ओर अनगिनत लोग घायल म्ी हो चुके है। मजेदार बात तो यह है कि इसी मार्ग से होकर आमजनों के साथ-साथ व्ही-व्हीआईपी लोगों का बड़ी संख्या में आना जाना लगा रहता है।

ज्ञात हो कि पत्थर बाजार के रूप में विख्यात स्थल के समीप ही जिले का सबसे बड़ा पुलिस थाना सिटी कोतवाली, हरिजन थाना एवं छात्र-छात्राओं को कानून की शिक्षा देने वाला विधि महाविद्यालय म्ी स्थित है। सड़कों के दोनों किनारों के बड़े मग को अपने में समेट अतिक्रमण कर व्यवसाय कर रहे पत्थर व्यापारियों ने कब्जा कर रखा है। जहां क्रय-विक्रय से संबंधित छोटे-बड़े वाहनों का म्ी जमावड़ा सड़क पर देखा जा सकता है। जबकि ऐसे समय जब आने जाने वाले अन्य वाहनों का क्रम बना रहता है तो स्थिति और म्ी गड़बड़ा जाती है। 

हटाओ नहीं तो सख्त कार्यवाही-
उक्त पत्थर बाजार को हटाने के लिये तहसीलदार एवं प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने पत्थर विक्रेताओं को सख्त निर्देश देते हुये कहा है कि एक सप्ताह में अगर पत्थर नहीं हटे तो सख्त कार्यवाही की जायेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार चेनपुरा वार्ड मेंं बंद हो चुकी चमडा फेक्टरी क्षेत्र में स्थान पूर्व में ही निर्धारित कर दिया गया था। इसी जगह पत्थर बाजार को ले जाने के लिये निर्देश जारी किये गये हैं। श्री श्रीवास्तव ने बतलाया कि अगर पत्थर विक्रेताओं ने आदेश का पालन नहीं किया तो सख्त कार्यवाही तो होगी ही पुलिस में इनके विरूद्ध एफआईआर भी करवायी जायेगी।   

 क्या था कलेक्टर का आदेश  –
 पत्थर बाजार को हटाने के मामले में कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह का आदेश हवा में उडता दिखलायी देने की लगातार चर्चा इस समय बनी हुई है ? ज्ञात हो कि इसी बर्ष के प्रारंभ में कलेक्टर श्री सिंह ने पत्थर बाजार को 31 मार्च 2014 तक हटाने के स्पष्ट एवं सख्त आदेश दिये थे जिसको जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी भी किया गया था एवं अनेक समाचार पत्रों में प्रकाशन भी हुआ था। 

   कब्रस्तिान पर भी कब्जा-
 पत्थर विक्रेताओं द्वारा मानवीयता की सारें हदों को लांघते हुये अपना व्यापार करने में लगे हुये हैं ?ज्ञात हो कि मुख्य सडक मार्ग के साथ ही इनके कब्जे में एक यहीं स्थित कब्रिस्तान भी बना हुआ है। कई दशकों प्राचीन कब्रिस्तान की संगमरमर की कबरों को भी छतिग्रस्त कर उन पर पत्थरों को रख अपना व्यापार इनके द्वारा किया जा रहा है। जानकारों की माने तो यह मानवता को कलंकित करने वाला सबसे बडा उदाहरण कहा जा सकता है। इसमें जहां एक ओर पुरातत्व एवं जिला प्रशासन सहित संबधित विभाग की लापरवाही स्पष्ट रूप से झलकती दिखलायी देती है तो व्यापारियों द्वारा मानवता को कलंकित करने का मामला दिखलायी देता है।
 

पत्थरों के साथ अनेतिक व्यापार भी-
पत्थर बाजार में विक्रेताओं में से अनैतिक कृत्य करने एवं करवाने का व्यापार करने वालों की संख्या भी कुछ कम नहीं है ? पत्थरों को एक कमरे के रूप रख वहां जुआ एवं वेश्यावृत्ती जैसे कृत्यों के होने की भी जमकर चर्चा बनी हुई है? 

पुलिस थाना एवं ग्रन्थालय पर कब्जा-
एैसा नहीं है कि इन पत्थर विक्रेताओं का कब्जा सडक के साथ कब्रिस्तान पर बना हुआ है जी नहीं इनका व्यापार समीप ही स्थित हरिजन कल्याण थाने तथा स्व चन्द्रकांत सोनवलकर शासकीय ग्रन्थालय के प्रभारियों की कृपा से उनके ही परिसर में भी जमकर फल फूल रहा है।

 

रिपोर्ट :-डॉ.हंसा वैष्णव

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