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रिक्शा और हाथ-ठेला चालकों के बीच पहुंची कलेक्टर

mandla collector

मंडला- मंडला कलेक्टर प्रीति मैथिल अपना पूरा शासकीय ताम झाम छोड़कर एक बेहद सामान्य इंसान की तरह अचानक रिक्शा और हाथ – ठेला चालकों से मिलने उनके बीच फुटपाथ पर पहुंच गईं और उन्होंने पूरा आत्मीयता से रिक्शा और हाथ – ठेला चालकों को नगर पालिका के शिविर में आने का आमंत्रण दिया।

कलेक्टर का यह रूप जिसने भी देखा वो उनकी सादगी का कायल हो गया। महिला कलेक्टर को अपने बीच पाकर मेहनतकश मजदूरों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और कलेक्टर से मिले आश्वासन से जीने की नई उम्मीद जाग उठी है।

यह कोई पहला मौका नहीं है जब कलेक्टर का मानवीय पहलु उजागर हुआ है। जिले की कमान सँभालते ही पहली प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने जो बाते कही थी वो सभी के दिल में घर कर गई थी। कलेक्टर ने कहा था कि यदि आप लोगों को कही कोई विक्षिप्त व्यक्ति मिलता है तो उसके दाड़ी – बाल कटवा दे, नए कपडे पहनवा दे और भर पेट खाना खिला दे।

इस कार्य में खर्च होने वाला पैसा मुझसे प्राप्त कर ले। कलेक्टर को इस एक बात से ही उनका मानवीय पहलु उजागर हो गया था जिसकी एक बानगी उन्होंने रिक्शा और हाथ – ठेला चालकों के बीच जाकर फिर जाहिर की। इतना ही नहीं जन सुनवाई के दौरान भी कलेक्टर आवेदकों को कुर्सी पर बैठकर उनकी समस्या सुनती हर मंगलवार जिला योजना भवन में नज़र आती है।

दरअसल, मुख़्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत रिक्शा और हाथ ठेला चालकों लिए शुक्रवार को नगर पालिका प्रशासन एक शिविर का आयोजन कर रहा है। जिसका पालिका प्रबंधन ने कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया है। नगर पालिका के सीएमओ आर पी सोनी बताते है कि 2009 से संचालित इस योजना के तहत नगरीय क्षेत्र में 276 हाथ ठेला और 193 रिक्शा चालक पंजीकृत हैं, जिसका रियालिटी टेस्ट करने कलेक्टर खुद उनके बीच पहुंच गईं।

कलेक्टर ने जब हाथठेला और रिक्शा चालकों से बात कर हकीकत जानी तो नगरपालिका के दावों की पोल खुल गई। कलेक्टर ने अलग – अलग चौराहों पर रिक्शा चालकों से बात की तो पता चला कि शहर में ज्यादातर हाथ ठेला और रिक्शा चालकों के पास खुद के रिक्शा और हाथ ठेला नही हैं। ये लोग दूसरों से दिहाड़ी में किराया देकर रिक्शा और हाथ ठेला चला रहे हैं और इन्हें नगरपालिका में आयोजित शिविर की जानकारी भी नहीं है।

नगरपालिका के रिकार्ड में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत करीब 500 हितग्राहियों को रिक्शा और हाथ ठेला वितरित किया जाना दर्ज़ है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। इसकी भनक शायद जिले की नवागत कलेक्टर प्रीति मैथिल को लग चुकी है। ठेला चालकों की मानें तो मामले की जांच होने पर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आ सकता है। यदि कलेक्टर ने इसी अंदाज़ में अपना काम जारी रख तो और भी कई शासकीय विभागों की पोल सबके सामने आ जाएगी।

रिपोर्ट:- @सैयद जावेद अली

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