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एकता, अखंडता का सन्देश दे गया किले वाले बाबा का उर्स

mandla kile babaमंडला- सैयद हज़रत बाबा बर्हेना शाह रहमत उल्लाह अलह ( किले वाले हज़रत ) का तीन दिवसीय सालाना उर्स सोमवार की सुबह कुल की फातहा के साथ समाप्त हो गया। उर्स के दौरान बड़ी तादाद में जायरीन बाबा के दरबार में अपने नज़राने अकीदत पेश करने पहुंचे। विभिन्न धर्म सम्प्रदाय के लोगों ने उर्स में शामिल होकर सर्वधर्म सदभाव की मिसाल न सिर्फ कायम की बल्कि इसे और मज़बूती प्रदान की।

उर्स की शुरुआत 20 मई की शाम कुरआन खानी व मिलाद.शरीफ के साथ हुई। इसमें मदरसे के तालीमयाफ्ता बच्चे शामिल हुए। 21 मई की सुबह निशान पेश करने के साथ ग़ुस्ल.कराया गया। शाम को शाही संदल निकलने के पहले कौमी एकता की अपनी परंपरा का निर्वहन करते हुए कमेटी ने उदय चौक व बस स्टैंड स्थित दुर्गा मंदिर में विशाल बैंड की प्रस्तुति कराई। जबलपुर के मशहूर विशाल बैंड के फनकारों द्वारा शानदार देवी गीतों की प्रस्तुति दी गई।

मग़रिब की नमाज़ के बाद हजरत बाबा बंगाली शाह रहमतुल्लाह अलेह की दरगाह से किले वाले बाबा का शाही संदल पूरे शानो शौकत से निकला। विशाल बैंड के फनकारों ने अपनी ख्याति के मुताबिक सूफिया कलाम पेश करते हुए शमा बांध दिया। पूरे रास्ते विशाल बैंड की सूफिया धुनों को सुनने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। देर रात अल्लाह हो अकबर की सदाओं के बीच संदल हज़रत की दरगाह में पेश किया गया। इस मौके पर बड़ी तादाद में अकीदतमंद मौजूद थे। फतहा व सलातो सलाम के बाद मुल्क के साथ – साथ पूरी दुनिया में अमनो आमान कायम रखने व आपसी भाईचारा सलामत रखने की दुआ की गई। कमेटी के संदल के साथ – साथ अनेक लोगों ने दरगाह में चादर पेश की। मंडला विधायक संजीव उइके भी अपने साथी झब्बा सराफ व नफीस मंसूरी के साथ बाबा के दरबार में हाजरी देने पहुंचे।

22 मई को महफ़िल ए शमा का एहतेमाम किया गया। इसमें जबलपुर के मशहूर कव्वाल सरवर नियाज़ी द्वारा अपने कलाम पेश किये गए। पूरी रात हम्द ओ सना, नातिया कलाम के साथ – साथ हुज़ूर की शान में कलाम पेश किये गए। कव्वाल द्वारा गौस पाक व हिन्द के राजा ख्वाजा साहब की शान में भी बेहतरीन कलाम पेश किये गए। इस दौरान अनेक कमेटियों के साथ – साथ कई चाहने वालों ने बाबा के दरबार में चादर पेश की। उर्स कमेटी द्वारा आयोजित लंगर में भी हज़ारों लोग शामिल हुए।

उर्स में शामिल होने बाबा के चाहे वाले मंडला के साथ ही आस पास के कई जिले से भी पहुंचे। पूरी रात दरबार में चादर पेश करने व नज़रों न्याज़ का सिलसिला चलता रहा। सुबह कुल की फातहा के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन हो गया। उर्स को कामयाब बनाने में बल्लू डोंगसरे, एडवोकेट अशोक वर्मा, श्रीनाथ अग्र्रवाल, बाबा सैयद राहित अली, बाबा खवाजा अहमद, मुन्नू गुप्ता, लकी जंगली पीर बाबा, इमरान बाबा, पप्पू सोनी, मोहम्मद नईम, राजकुमार ताम्रकार, अंकित मोनू अगरवाल, अख्तार वारसी, जानू बाबा, विक्की बाबा सहित बड़ी तादाद में बाबा के चाहने वालों का उल्लेखनीय योगदान रहा।
@ सैयद जावेद अली

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