सिंधिया समर्थक विधायकों को दोबारा नोटिस, सरकार टाल सकती है फ्लोर टेस्ट

भोपाल: मध्य प्रदेश में सियासी खेल जारी है इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कांग्रेस के बागी विधायकों को 15 मार्च तक पेश होने का दोबारा नोटिस दिया है।

चर्चा इस बात को लेकर भी है कि अगर सभी विधायक स्पीकर के सामने उपस्थित नहीं हुए तो सरकार फ्लोर टेस्ट टाल सकती है। इससे पहले प्रजापति ने सभी 22 विधायकों को तीन अलग-अलग तारीखों में बुलाया था। अब ये विधायक 15 मार्च को शाम 5 बजे तक पेश हो सकते हैं।

चर्चा इस बात को लेकर भी है कि अगर सभी विधायक स्पीकर के सामने उपस्थित नहीं हुए तो सरकार फ्लोर टेस्ट टाल सकती है। इधर, सभी विधायकों के उपस्थित नहीं होने पर सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। नियम ये है कि सभी विधायकों को स्पीकर के सामने उपस्थित होना जरूरी है।

अध्यक्ष ने इस्तीफे की सत्यता बताने को कहा है। इस्तीफे स्वेच्छा से दिए गए हैं या किसी दबाव में, विधायक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बात बताएंगे। इस मुलाकात की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। जो विधायक स्पीकर के सामने हाजिर नहीं होगा, उसका इस्तीफा मान्य नहीं होगा। वहीं, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बेंगलुरु से लौटने वाले विधायकों के कोरोनावायरस से संक्रमण की आशंका जताई और उनके टेस्ट कराने की मांग की।

मध्य प्रदेश में सियासी घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को धोखेबाज बताया है। सिंह ने कहा- “मैंने कभी यह उम्मीद नहीं की थी कि महाराज (क्षमा करें, क्योंकि मैं खुद एक रियासती पृष्ठभूमि से आता हूं, मैं उन्हें ज्योतिरादित्य कहकर संबोधित नहीं कर सकता) कांग्रेस और गांधी परिवार को धोखा देंगे और किसके लिए! राज्यसभा और कैबिनेट मंत्री बनने मोदीशाह के नेतृत्व में? दुःखद है कभी भी उनसे यह उम्मीद नहीं करता था। लेकिन, फिर कुछ लोगों के लिए पावर ऑफ हंगर यानी सत्ता की भूख (विश्वसनीयता और विचारधारा जो एक स्वस्थ लोकतंत्र का सार है) से अधिक महत्वपूर्ण है।