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मैगी पर मध्यप्रदेश में भी पाबंदी,बिक्री भी बंद

Maggiभोपाल – मैगी में हानिकारक रसायन मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर, केरल, दिल्ली, गुजरात व उत्तराखंड राज्यों ने नमूनों की जांच के बगैर मैगी की बिक्री पर अस्थाई पाबंदी लगा दी है, इसके बाद मप्र सरकार ने भी इस पर रोक लगा दी है। मुख्‍यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जब तक जांच की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक मैगी पर प्रतिबंध रहेगा।फिलहाल एक माह के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है।

शिवराज ने कहा कि इंदौर की लैब की जांच रिपोर्ट में मैगी में एमएसजी यानि मोनोसोडियम ग्‍लूटामेट होने की पुष्टि हुई है जबकि मैगी के पैकेट पर इसके न होने का उल्‍लेख है। इसी के आधार पर फिलहाल प्रतिबंध का निर्णय लिया गया है।

इससे पहले सरकार मैगी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आने की बात कह रही थी। राज्य स्तरीय सरकारी लैब में खाद्य पदार्थों में माइक्रोबायोलॉजिकल, हैवी मेटल्स, टॉक्सिन व पेस्टीसाइड्स की जांच की सुविधा नहीं है, इसलिए मैगी के नमूने जांच के लिए इंदौर की निजी लैब में भेजे गए थे।नमूने 27 मई को लिए गए थे।

नमूनों की जांच सिर्फ इसलिए अटकी पड़ी थी कि इंदौर की लैब के पास जांच के लिए रीएजेंट नहीं हैं। ये रीएजेंट बैंगलुरू से मंगाए गए । बताया जाता है कि इस जांच रिपोर्ट के बाद ही राज्‍य में मैगी की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भोपाल चेप्टर अध्यक्ष डॉ.एसके निगम का कहना है कि मैगी में कई जगह लेड व मोनोसोडियम ग्लूटामेट मिलने की पुष्टि हो चुकी है। लेड एक खतरनाक पदार्थ है। लेड पॉयजनिंग होने के खतरनाक परिणाम होते हैं। इससे बच्चों में बुद्धि का विकास रूक जाता है। यह पूरे नर्वस सिस्टम को अवरूद्ध कर देता है।

हमीदिया अस्पताल के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. राहुल शर्मा कहा कि बच्चों में मैगी व नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थ पापूलर होने के पीछे कंज्यूमर साइकोलॉजी का अहम रोल है। अभिताभ बच्चन व माधुरी दीक्षित जैसी सेलेब्रिटी से विज्ञापन कराकर बच्चों के बाल मन पर कब्जा जमाया गया है। बच्चों के टेस्ट बड (स्वाद कलिकाओं) में मैगी नूडल्स का टेस्ट विकसित करवा दिया गया है। अब उन्हें सेहत के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थ अच्छे नहीं लगते हैं। उन्हें सत्तु श्रीखंड की जगह कोल्ड्रिंक व आइस्क्रीम ज्यादा भाते हैं। यह खतरनाक स्थिति है।

कैंसर विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल का मानना है की मोनोसोडियम ग्लूटामेट किसी भी खाद्य पदार्थ मिला हो इसके नियमित सेवन से पेट व बड़ी आंत का कैंसर हो सकता है। इसकी वजह मोनोसोडियम ग्लूटामेट का कार्सिनोजेनिक (कैंसर जनक) होना है।

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