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महाराष्ट्र विधानसभा में शिव सेना , भाजपा आमने सामने

Devendra-Uddhavमुबई [ TNN ] महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार को विपक्ष में बैठे शिवसेना और भाजपा के विधायकों में जमकर नारे बाजी हुई। जहां एक तरफ भाजपा ने “जय श्री राम” के नारे लगाए, तो वहीं दूसरी ओर शिवसेना ने “जय शिवाजी” के नारे लगाए।

इस नारे बाजी और हंगामे के चलते विधानसभा में दोनों पार्टियों के बीच टेंशन काफी बढ़ गई है। भाजपा द्वारा शिवसेना की केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो सीटों की मांग ठुकराए जाने पर माहौल गर्मा गया है। वहीं शिवसेना प्रमुथ उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के सांसदों को शपथ ना लेने को कहा है।

इससे पूर्व महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को शुरूहुआ। इस विशेष सत्र में देवेंद्र फडणवीस की सरकार विश्वास मत हासिल करने उतरी है। सत्र की शुरूआत में राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने सबसे पहले सुबह 10 बजे जीव पांडू गावित को विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के पद की शपथ दिलाई है। जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने बारी-बारी से नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई। अब 12 नवंबर को फडणवीस सरकार विश्वास मत पेश करेगी। वहीं शिवसेना के विधायक विधानसभा भगवा साफा पहनकर पहुंचे हैं और साथ ही विपक्ष की सीटों पर बैठ गए हैं।

गौरतलब है कि शिवसेना ने रविवार को अल्टीमेटम दिया था कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार के साथ तालमेल के बारे में सत्तरूढ दल से दो-तीन दिन में उत्तर नहीं मिला तो वह विपक्ष में बैठेगी। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में रविवार को मुंबई में हुई नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में यह अल्टीमेटम दिया गया। बैठक में एकनाथ शिंदे को सर्वसम्मति से पार्टी के विधायक दल का नेता भी चुना गया।

ठाकरे ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी ने भाजपा को स्पष्ट कर दिया था किकेन्द्र से पहले महाराष्ट्र के बारे में फैसला लिया जाना चाहिए। चूंकि महाराष्ट्र के बारे में फैसला नहीं हुआ था इसलिए रविवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी पार्टी शामिल नहीं हुई। ठाकरे ने कहा कि शिवसेना हिंदुत्व शक्तियों का विभाजन नहीं चाहती है। इसी वजह से वह अगले दो तीन दिन तक भाजपा केउत्तर का इंतजार करेगी और अगर संंतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो पार्टी विपक्ष में बैठेगी।

शिवसेना की तरफ से पद की मांगों के बीच फडणवीस पहले ही साफ कर चुके हैं कि विश्वासमत से पहले किसी मंत्री को शपथ नहीं दिलाई जाएगी और विश्वासमत के बाद ही कैबिनेट का विस्तार होगा। 288 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा और सहयोगी दलों के 123 विधायक, शिवसेना के 63 और एनसीपी के 41 विधायक हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसे सरकार में रहने के लिए 145 का आंकड़ा चाहिए।

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