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बछड़े की मौत पर नवविवाहिता का मुंडन और सामूहिक भोज

डिंडोरी : हम लाख महिला सशक्तिकरण की बात करले पर अब भी महिलाओं की स्थिति बदतर है। डिंडोरी में एक बार फिर सामाजिक कुरीती की भेंट चढ़ी नवविवाहिता। परंपरा के नाम पर करवाना पड़ा मुंडन और सामूहिक भोज। हम भले ही आधुनिक हो रहे हो लेकिन अब भी महिलाओं के साथ अत्याचार,कुप्रथा के चलते परिवार भी समाज के आगे बोना साबित हो रहा है। लुड़गाव में घटी घटना के बाद जानकारी लगते ही महिला सशक्तिकरण टीम नवविवाहिता के घर पहुँची , घर पर चल रहे सामूहिक भोज के बाद समाज और घर वालो को बैठा कर दी समझाइस दी कि इस तरह महिला उत्पीड़न कर आप सभी कानूनन जुर्म के भागीदार बन रहे है।

डिंडौरी कोतवाली थाना के लुड़गाव में गवले परिवार की 22 वर्षीय बहु चैनकली बाई सामाजिक कुप्रथा का शिकार उस वक्त हो गई जब उसके द्वारा घर पर बने गौ शाला में बीमार बछड़े को बांधने के दौरान मौत हो गई। इसकी जानकारी चैन कली बाई को नहीं थी की बछड़ा मर गया है। लेकिन बाद में जब परिवार के लोगो को पता चला तब बछड़े की मौत का कलंक चैनकली बाई के सर मढ़ दिया गया। उसके बाद चैनकली बाई को अपने पति गया प्रसाद गवले के साथ छत्तीशगड़ के दामाखेड़ा जाकर धर्म गुरु के दरबार में अपने सिर को मुंडवाना पड़ा,सामाजिक कुप्रथा का दंश तब भी समाप्त नहीं हुआ,बछड़े की मौत के बाद चैन कली बाई को सर मुंडवाने के बाद अपने घर पर 2 दिन प्रवचन और सत्संग करवा कर समाज,रिस्तेदार और घर वालो को सामूहिक भोज भी करवाना पड़ा। जिसकी व्यवस्था करने के लिए उसे अपने परिवार और रिस्तेदार से कर्ज भी लेना पड़ा।

गाँव में चैनकली बाई के साथ घटी घटना का किसी ने विरोध नहीं किया बल्कि उस कार्यक्रम के सब भागीदार बने,क्या अपने क्या पराये सब रूढ़िवादी परम्परा के नाम पर महिला का शोषण होते देख भोज का आनंद लेते रहे। किसी के मन में बात नहीं गुरेज करी की नावबिवाहिता के दिल पर क्या गुजरेगी। वही महिला भी इसका दोष किसी पर नहीं देना चाहती और समाज की परम्परा का पालन कर कलयुग में ही सती हो गई।

वही घटना की जानकारी सूत्रों से लगने के बाद महिला सशक्तिकरण अधिकारी रोहित बड़कुल अपनी टीम के साथ लुढ़गाव पहुँचे ,नवविवाहित से मुलाकात की बयान के आधार पर उसके घर और मौके पर मौजूद समाज के लोगो को कड़ी समझाइश दी,की दोबारा अब किसी भी महिला या बच्ची के साथ रूढ़िवादी परंपरा के नाम पर अत्याचार हुआ तो कानूनन कार्यवाही की जायेगी। जिस पर समाज ने भरोसा दिलाया कि अब से यह प्रथा यही से बंद कर दी जायेगी और आगे भी यही संदेश सभी जगहों पर पहुचाया जायेगा।

रिपोर्ट @दीपक नामदेव

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