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एक सूत्र में पिरोती हैं लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल

Happy Lohri, Makar Sankranti, Pongal 1कहते हैं ना कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एक है तो हां देश एक ही है। जिसका ताजा उदाहरण है हमारे देश की संस्कृति और त्योहार जो अपनी परंपराओं के जरिए पूरे देश को एक धागे में पिरो देते हैं। आज उत्तर भारत के लोग ‘मकर संक्रान्ति’ मना रहे हैं तो वहीं दक्षिण भारत आज ‘पोंगल’ की तैयारी में जुटा है तो वहीं हमारे दिलकश पंजाब ने एक दिन पहले ही ‘लोहड़ी’ मना ली है।

ये तीनों ही फसलों के त्योहार कहे जाते हैं। उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति मनायी जाती है जिसका महत्व सूर्य के मकर रेखा की तरफ़ प्रस्थान करने को लेकर है जबकि दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में ‘पोंगल’ के जरिये सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का स्वागत किया जाता है मतलब कि भाव एक ही है।

तमिलनाडु में सूर्य को अन्न-धन का भगवान मान कर चार दिनों तक उत्सव मानाया जाता है साथ ही यह त्यौहार कृषि एवं फसल से सम्बन्धित देवताओं को समर्पित है तो ‘लोहड़ी’ में भी यही होता है।

पोंगल नाम क्यों पड़ा?
इस त्यौहार का नाम ‘पोंगल’ इसलिए है क्योंकि इस दिन सूर्य देव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है वह ‘पोंगल’कहलता है। तमिल भाषा में ‘पोंगल’ का एक अन्य अर्थ निकलता है अच्छी तरह उबालना। तमिल लोग इसे अपना न्यू ईयर मानते हैं।

@ विजय तीर्थानी 






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