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करोड़ों का मंडी घोटाला, पुलिस की कार्यवाही पर संदेह ?

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खंडवा – बहुचर्चित फर्जी अनुज्ञा पत्रों के घोटाले का पहले तो विभागीय निष्क्रियता के चलते ठंड बस्ते में कई दिनों नजर आया उसके जब पुलिस के पास यह मामला पहुंचा तो उन्होंने मंडी के विभाग की निष्क्रियता के चलते कागजात उपलब्ध न होना बताया गया जब बाद में मंडी के अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि थाना सिटी कोतवाली पुलिस को 420 के प्रकरण संबंधित सभी मूल दस्तावेज उपलब्ध करा दिये गए। अभी यह मामला अब सिटी पुलिस की जांच में है जो कि पिछले 2014 से चली आ रही लेकिन इस मामले में हाईप्रोफाइल ट्रैडर्स कंपनियों का नाम एवं कई राजनेताओं चेहरे आने के कारण इस मामले को लंबित कर रखा है। अब यह है कि पुलिस निष्पक्षता से अपनी कार्यवाही करती है या लंबित प्रकरण को लंबित ही रखती है। पुलिस यदि आम आदमी पर 420 का प्रकरण दर्ज करती है तो पुलिस अधिकारी 420 के घर-अंागन दुकान एक कर जेल भिजा देती है तो फिर इन 420 के लिए एक जैसी कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है ऐसे कई सवाल पुलिस की निष्पक्ष जांच पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे है।

यह है मामला…
इसका परिणाम यह हुआ कि इस हाईप्रोफाइल मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई। फर्जी अनुज्ञा पत्रों के माध्यम से किए गए करोड़ों रूपये के मंडी राजस्व चोरी के इस मामले में प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड, भोपाल द्वारा तात्कालीन मंडी सचिव प्रवीण चौधरी के विरूद्ध आरोप पत्र भी जारी किया गया था। आरोप पत्र में मंडी नियमों का हवाला देते हुए फर्जी अनुज्ञा पत्रों के मामले में सहायक लेखाधिकारी वरिष्ठ एवं कनष्ठि अंकेक्षक मंडी बोर्ड इंदौर द्वारा एक अप्रैला 2010 से 31 जुलाई 2013 तक विशेष अंकेक्षण किया गया।

इस प्रकार वास्तविक कृषि उपज आज का सत्यापन किए बिना कूट रचित दस्तावेंजो के आधार पर अनुज्ञप्तिधारियों को मंडी शुल्क छूट प्रदान कर मंडी शुल्क राशि के रूप में 80, 63,43,830 रूपये एवं निराश्रित शुल्क के रूप में 8,06,344 रूपए राशि के अप्रबंधन में सहायक होकर मंडी तथा शासकीय राजस्व को आर्थिक क्षति पहुंचाने के संबंध में आरोपित किया गया था। इसी प्रकार तात्कालीन मंडी सचिव को खंडवा कृषि उपज मंडी कार्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी होने के नाते अधीनस्थ कर्मचारियों के क्रियाकलापों पर नियंत्रण रखने के दायित्व का भी पूर्णता से निर्वहन नहीं किया गया। साथ ही फर्जी अनुज्ञा पत्रों के माध्यम से किए गए।

करोड़ो रूपये के घोटाले में राजस्व की क्षतिपूर्ति करने हेतु फर्जी अनुज्ञा मामले में दोषी पाए गए व्यापारियों से 5 गुना मंडी टैक्स वसूल किया जाना था लेकिन इसे विडंबना हीं कहेंगे तात्कालीन सचिव के बाद नवागत मंडी सचिव द्वारा भी विभागीय आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए इक्का-दुक्का व्यापारियों से टैक्स वसूली कर मामले को ठंडे बस्ते में पहुंचाया जा रहा है। खंडवा कृषि उपज मंडी में पदस्थ अधिकारियों की निष्क्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इतना बड़ा मामला घटित होने के बाद भी अब तक दोषी गए व्यापारियों से 5 गुना टैक्स वसूल नहीं कर पाए है।

इनका कहना-
मैंने अभी-अभी इस थाना का प्रभार ग्रहण किया है। मैं प्रकरण क्रमांक 608-2014 की जांच करवाता हूं फाईल बुलाकर देखा इसकी जांच नागले जी कर रहे है। अब उनसे बात कर लिजिए। – विजय सिसोदिया, थाना प्रभारी सिटी कोतवाली खंडवा

रिपोर्ट :- रजाक मंसूरी

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