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श्रमदान से ग्रामीणों ने बनाया तीन किलो मीटर वाटर कोर्स

mandla-water-course-by-ruralमण्डला- जहाँ सहयोग की भावना होती है वहॉ कोई भी कार्य दुष्कर नही होता। आपसी समन्वय से कठिन से कठिन कार्य आसान हो जाते हैं। यही सहयोग और समन्वय की भावना ने और ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल ने मण्डला जिले के बिछिया विकासखण्ड के ग्राम उर्दली माल के ग्रामीणों को सामान्य ग्रामीण से प्रतिष्ठित किसान के रूप में स्थापित कर दिया।

इन ग्रामीणों ने बिछिया जलाशय की अधूरी पड़ी सब माइनर से अपने गांव तक के वाटर कोर्स को श्रमदान से गांव के किनारे तक निर्मित कर सिंचाई सुविधा प्राप्त कर ली है। यही किसान इस सुविधा के पूर्व जहॉ एक एकड़ जमीन में पॉच – छः बोरे धान उत्पादित करते थे। अब वे तीन गुनी फसल उत्पादित कर रहे हैं। इसके बाद भी वे चुप नही बैठे हैं बल्कि अभी भी एक घर से एक व्यक्ति प्रतिदिन बारी-बारी से वाटर कोर्स को पूरे गांव के खेतों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

उर्दली ग्राम के निवासी रामलाल नरेती, बिसन मरावी, बंजारी ने बताया कि लगभग तीस वर्ष पहले जलसंसाधन विभाग द्वारा बांध की मुख्य नहर से उर्दली माइनर और वाटर कोर्स बनाया गया था किन्तु संबंधित ठेकेदार द्वारा तीन किलो मीटर वाटर कोर्स बनाकर कार्य बंद कर दिया गया। इस वाटर कोर्स के आगे नहर का पानी आना बंद था जिससे ग्रामीणों की खेती का कार्य कम हो गया था। लगभग दो वर्ष से एक स्वयंसेवी संस्था एफ.ई.एस. ने ग्रामीणों को संगठित कर उन्हें वाटर कोर्स आगे बढ़ाने की सलाह दी।

कुछ ग्रामीणों ने श्रमदान से इस वाटर कोर्स को लगभग तीन किलो मीटर तक खुदाई कर सिंचाई प्रारंभ की। बनाये गये वाटर कोर्स के किनारे की खेती के किसानों ने धान और गेहूॅ की फसल लेना प्रारंभ कर दी तब लोंगो में जागरूकता आई और वे लोग वर्तमान में ग्रामीण आजीविका से जुड़े हैं। ग्राम मंप लोगो ने अब महिलाओं को जोड़कर खुशबू महिला ग्राम संगठन तैयार किया और अपनी गतिविधियॉ जारी रखे हुए हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की संगठक सुश्री शाहीन के माध्यम से पुनः ग्रामीण संगठित हुए और इस बार उन्होंने इस वाटर कोर्स को बढ़ाकर गांव के अंतिम छोर तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। अभी ग्रामीण बारी-बारी से अपनी सुविधा और समय के अनुसार स्वंय की इच्छा से आकर श्रमदान कर रहे हैं और वाटर कोर्स को लगभग दो किलो मीटर और बढ़ा दिया है। गांव के कुछ किसानों ने जलसंसाधन विभाग को सिंचाई शुल्क भी भुगतान किया है। किसानों का कहना है कि हमें सिंचाई के लिए पानी समय पर मिले तो हम नियमित शुल्क भुगतान करेंगे।

इन ग्रामीणों के उत्साह को देखते हुए जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शरदचन्द्र त्रिपाठी ने तत्काल बिछिया के संबंधित उपयंत्री को निर्देशित किया कि वे मौके पर जाकर देखें और ग्रामीणों को वाटर कोर्स निर्माण के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन भी दें ।
रिपोर्ट- @सैयद जावेद अली




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