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मनु शर्मा का साहित्य समाज का आईना: लालजी टण्डन

लखनऊ: मनु शर्मा ने गीता की शैली और महाभारत के पात्रों जो सजीव चित्रण किया वह आधुनिक परिवेश का अनमोल साहित्य है। महाभारत के पात्रों के बारे में यदि इतने विस्तार से किसी साहित्यकार ने लिखा तो वह सिर्फ मनु शर्मा ही है। इसीलिए उन्हें आत्मकथाओं का जन्मदाता भी कहा जाता है।

उक्त विचार उ.प्र हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित प्रख्यात रचनाकार, कवि एवं लेखक पदमश्री मनु शर्मा की ‘स्मृति सभा’ को सम्बोधित करते हुए पूर्व सांसद लालजी टण्डन ने व्यक्त किए। श्री टंडन ने आगे कहा कि मनु शर्मा का साहित्य देश की धरोहर है। उन्होनें अपने साहित्य का बाजारीकरण नहीं किया। उनका साहित्य समाज का आईना है। जो समाज का मार्गदर्शन करेगी। स्मृति सभा की शुरूआत पूर्व सांसद लालजी टंडन, प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दूबे, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह, नवीन तिवारी ने पदमश्री मनु शर्मा के चित्र पर मार्ल्यापण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया।

राष्ट्रधर्म पत्रिका के सम्पादक पवन पुत्र बादल साहित्य भारत की परम्परा रही है। जिसकी शुरूआत ऋग्वेद से हुई। मनु शर्मा ने अपनी कलम से सनातन परम्परा  को आगे बढाने का काम किया। विधानसभा प्रमुख सचिव प्रदीप दूबे ने कहा कि मनु शर्मा ने आत्मकथाओं के माध्यम से हिन्दी साहित्य को नया आयाम दिया। उनकी लेखनी, शैली, रचनाएं आजीवन हिन्दी साहित्य जगत को आलोकित करती रहेंगी।

वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि मनु शर्मा साहित्यिक धरातल के व्यक्ति थे। उनका विराट व्यक्तित्व ही उनकी पहचान थी। वर्तमान में मनु शर्मा जैसे साहित्यकार की कृतियों का मूल्यांकन नहीं हो पाया। जो दुखद रहा लेकिन आने वाले दिनों में उनकी कृतियां समाज को मार्गदर्शित करेंगी।

वरिष्ठ भाजपा नेता मनीष शुक्ल ने कहा कि स्व. मनु शर्मा ने साहित्य की किसी भी एक विधा को अपनी कलम से दूर नहीं जाने दिया। वर्तमान परिवेश में पाठको के लिए उनकी कृतियां दुर्लभ है। जिसको संजीदगी से पढा जाना चाहिए।
वयोवृद्ध समाजवादी चिन्तक सगीर अहमद ने कहा कि मनु शर्मा की लेखनी ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच सौहार्द पैदा किया है।
समाजसेवी नवीन तिवारी ने कहा कि मनु शर्मा के दो पक्ष है। पहला पक्ष उनका उदार व्यक्तित्व और दूसरा उनका कृतित्व रहा। दोनों पक्षों में कौन सा पक्ष बड़ा है यह बता पाना मुश्किल है। लेकिन मनु शर्मा की अन्तिम कृति फेरीवाला रचनाकार में अनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को जाना व समझा जा सकता है।

समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि स्व. मनु शर्मा ने महाभारत के तमाम पात्रों की आत्मकथाओं को अपनी कलम के रास्ते कागज पर उतारा तो मानो हर एक पात्र जीवन्त हो उठा। श्रीकृष्ण की आत्मकथा लिखते-लिखते वे स्वयं कृष्ण को जीने लगे। कृष्ण के अदभुत रुप का वर्णन उनकी साहित्यिक जीवन की अप्रतिम रचना रही। साथ ही उन्होंने द्रोपदी, गांधारी, कर्ण और द्रोणाचार्य पर भी आत्मकथाएं लिखी। केवल महाभारत ही नहीं, अपितु, भारत वर्ष के गौरवशाली इतिहास के उन पात्रों को भी उन्होंने लिखा जो वर्तमान और भविष्य के स्वर्णिम भारत को नैतिक रुप से आजीवन शिक्षा देते रहेंगे।

खूब याद किये गये मनु शर्मा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हिन्दी संस्थान स्थित निराला सभागार में ‘गाँधी जयन्ती स्मारक ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘स्मृति सभा’ में आज कई वरिष्ठ लेखकों, पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों द्वारा स्मृति शेष ‘पद्मश्री मनु शर्मा’ जी को खूब याद किया गया। वक्ताओं ने भावपूर्ण ढंग से परन्तु बड़े गौरवान्वित अन्दाज में उनकी पुस्तकों, लेखनशैली, ज्ञानश्रेष्ठता, साहित्य सृजन एवं जीवन के उच्च मानदण्डों के सम्बन्ध में अपनी अपनी बात रखी। उन्हें याद करने वालों में देश प्रदेश के अनेक वरिष्ठ विद्वानों के साथ कुछ युवा मनीषियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ ही उनसे अपनी मुलाक़ात के संस्मरण भी सुनाये। इस स्मृति श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ भाजपा नेता लालजी टण्डन, प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप दुबे, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह, राकेश पांडे, प्रदीप कपूर, नवलकांत सिन्हा, विजय दुबे, शाश्वत तिवारी, राष्ट्रधर्म पत्रिका के संपादक पवनपुत्र बादल सहित अनेक लेखक पत्रकार, सामजिक कार्यकर्ता भवानी भट्ट, युवा भाजपा नेता मनीष शुक्ला, एलयू के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन गांधी जयन्ती स्मारक ट्रस्ट के राजनाथ शर्मा ने किया।

इस मौके पर प्रमुख रूप से सपा नेता धनंजय शर्मा, भवानी दत्त भट्ट, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राकेश कुमार ओझा, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र कुमार, नवल कान्त सिन्हा, शाश्वत तिवारी, राजीव ओझा, सुधेश कुमार ओझा (आईएएस), प्रदीप कपूर, रमाशंकर सिंह, लविवि पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी, अशोक कुमार शुक्ल, सोनू यादव, राजेश प्रताप सिंह, श्रीमती अलका तिवारी, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, चौधरी कुलवीर, असद उमर अंसारी, हिसाम कुदूसी, पाटेश्वरी प्रसाद सहित कई लोग मौजूद रहे।

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