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जेएनयू में अफजल गुरु शहीदी दिवस,हंगामा

Tapti_hostelनई दिल्ली – जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) प्रशासन की इजाजत के बिना कैंपस में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के शहीदी दिवस मनाने को लेकर विवाद हो गया है। इस कार्यक्रम में अफजल गुरु के ही साथ संसद हमले के आरोपी रहे दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रफेसर एसएआर गिलानी को भाषण देने के लिए बुलाया गया था। कार्यक्रम शुरू होते ही कुछ छात्रों ने जेएनयू कैंपस में ताप्ती हॉस्टल की बिजली सप्लाई काट दी और प्रफेसर एसएआर गिलानी को घेर लिया गया। गिलानी के साथ धक्का-मुक्की करने की बात भी सामने आ रही है।

गौरतलब है कि अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। डेमोक्रैटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) ने बुधवार की रात को जेएनयू कैंपस में उनकी ‘शहादत’ की याद में कश्मीर की आजादी के विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया था। गिलानी कार्यक्रम में बतौर वक्ता बुलाए गए थे। कार्यक्रम शुरू होते ही आयोजन कराने वाले छात्र और गिलानी का विरोध करने वाले छात्र आपस में भिड़ गए। खबर यह भी है कि छात्र गुटों के बीच लात-घूंसे भी चले।

आयोजन से जुड़े छात्रों का कहना है कि विरोध करने वाले छात्र एबीवीपी और आरएसएस से जुड़े हुए हैं। कई घंटे तक हंगामा चलता रहा। जैसे तैसे कार्यक्रम के खत्म होने के बाद ह‌्यूमन चेन बनाकर प्रफेसर गिलानी को उनकी गाड़ी तक ले जाया गया। फिर भी गुस्साए छात्रों ने गाड़ी पर पथराव किया। हंगामे की सूचना मिलने पर एसीपी और लोकल पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी।

जेएनयू के सुरक्षा गार्डों की मदद से उन्हें वहां से बाहर निकाला गया। गुस्साए छात्रों ने प्रफेसर गिलानी की स्कॉर्पियो पर पथराव कर क्षतिग्रस्त कर दिया। गिलानी जामिया नगर के बटला हाउस इलाके में रहते हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में अरबी भाषा के प्रोफेसर हैं। 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में उन्हें भी आरोपी बनाया गया था। अदालत ने अफजल गुरु और शौकत हुसैन के साथ-साथ इन्हें भी सजा सुनाई थी। हालांकि, निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने पर हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में गिलानी को बरी कर दिया था।

सूत्रों ने बताया कि जेएनयू प्रशासन ने कार्यक्रम को भारत विरोधी बताते हुए कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद आयोजन किया गया। हालांकि, कार्यक्रम के आयोजकों का दावा है कि पहले उन्हें इजाजत दी गई थी, लेकिन बाद में यह वापस ले ली गई। डीएसयू के एक मेंबर ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सूचित किया कि यह भारत विरोधी मीटिंग है, इसलिए इसके आयोजन की मंजूरी नहीं मिल सकती है। उन्होंने बताया कि इसके बाद हमने फैसला किया कि चाहे जो हो हम मीटिंग करेंगे।

गिलानी ने घटना के बारे में बताया, ‘मैं तो जेएनयू में डिबेट के लिए गया था, मगर वहां एबीवीपी के लोगों ने मुझ पर हमला करने के मकसद से घेर लिया। गनीमत रही कि दूसरे छात्र संगठनों ने मुझे ह्यूमन चेन बनाकर बचा लिया। मुझे मारने की साजिश थी और इसके पीछे संघ परिवार का हाथ है।’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बोलने की आजादी पर हमला हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘मैं डीएसयू के बुलावे पर जेएनयू में आयोजित चर्चा में शिरकत करने गया था। जैसे ही मेरी गाड़ी घुसी, तभी एबीवीपी के छात्र ह्यूमन चेन बनाकर मुझे घेरने लगे और मेरे खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनका मकसद था कि मैं प्रोग्राम में शामिल न हो पाऊं और वहां से चला जाऊं। इसी दौरान समारोह आयोजित कर रहे छात्रों ने भी ह्यूमन चेन बना ली और मुझे एबीवीपी के कब्जे से छुड़ाकर कार्यक्रम में ले गए।’

उन्होंने कहा, ‘समारोह में लेक्चर के दौरान भी संघ परिवार के लोग हंगामा करते रहे। धक्कामुक्की भी की। इसके बाद करीब 11 बजे जैसे ही समारोह से बाहर जाने लगा, तभी फिर से एबीवीपी के छात्रों ने मुझे घेर लिया। मुझ पर हमला भी किया गया। फिर सपोर्टर छात्रों ने मुझे सुरक्षित वहां से निकालते हुए गाड़ी तक पहुंचाया।’

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