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बसपा को घर बैठे दलितों को लामबंद करने का मौका

mayawati uttar pradeshलखनऊ- बागियों की बगावत के कारण बैकफुट पर चल रही बसपा में बीजेपी ने फिर से नई जान फूंक दी है। बीजेपी नेता दयाशंकर की बसपा सुप्रीमो मायावती पर की गई अभद्र टिप्पणी यूपी चुनाव में वोटो का समीकरण बिगाड़ सकती है। जिसका फायदा सीधे तौर पर बसपा को मिल सकता है। इस बयान ने बसपा को घर बैठे ही फिर से दलितों को लामबंद करने का मौका दे दिया है।

बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए बसपा के सभी प्रमुख नेता लखनऊ आ गए है। वहीं प्रदेश भर से बसपा के एक लाख कार्यकर्ता भी राजधानी में पहुंच चुके है। जिन्होंने सड़को पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है।

बसपा इस मुद्दे को गवाना नहीं चाहती है। इसीलिए दिल्ली में बैठी बहन जी का निर्देश मिलते ही बसपा कार्यकर्ता भी लामबंद हो गए है। जिसका असर बुधवार को राजधानी लखनऊ में देखने को मिली। पार्टी कार्यकर्ता ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब बीएसपी दलितो और महिलाओं के अपमान का सहारा लेकर अपनी ताकत का एहसास कराने के लिए तैयार है। इसका फायदा उठाने के लिए बसपा एकजुट हो गयी है।

पिछले कुछ दिनों से बसपा के बड़े-बड़े नेता पार्टी छोड़कर जा रहे थे। बसपा से बागी नेताओ ने मायावती पर कई आरोप भी लगाये थे। जिस कारण पार्टी बैकफुट पर चल गई थी। चुनाव से पहले ही यूपी में बसपा की स्थिति खराब होनी शुरू हो गई थी। ऐसे समय में बीजेपी नेता की टिप्पणी ने बसपा ऐसा मुद्दा दे दिया है कि पार्टी में अब नई जान आ गई है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी यह साबित करने पर आमादा है कि दयाशंकर का यह बयान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इशारे पर दिया गया है ताकि यह समझाया जा सके कि दरअसल बीजेपी न केवल दलित बल्कि महिला विरोधी भी है।

अब लखनऊ पुलिस के सामने यह बडा संकट है कि वह बीजेपी और बीएसपी की इस जंग मे क्या करे। खतरा इस बात का है कि कही हजरतगंज की अंबेडकर प्रतिमा पर प्रदर्शन करते करते बसपाई बीजेपी कार्यालय पर धावा न बोल दे। अगर बवाल बढ़ा तो समाजवादी सरकार पर सवाल खड़े होगे कि यूपी मे कानून व्यवस्था फेल है और सख्ती से रोका तो यह कहा जायेगा कि सपा भी दलित और महिला विरोधी है। फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अपना पक्ष मजबूत कर लिया है।

फिलहाल, बीएसपी के लिये यह एक मौका है यह साबित करने का कि बीजेपी दलित औऱ महिला विरोधी है। यह साबित करने के लिये वह कल लखनऊ मे जोरदार बवाल करने की पूरी तैयारी मे है। सपा सरकार के सामने चुनौती इस बात की है कि अगर ला एण्ड आर्डर बिगडा तो सवाल सरकार पर खडे होगे। बीजेपी फिलहाल खामोश है क्योकि गुजरात के बाद यूपी का यह बवाल उसके दलित एजेडे पर बडी चोट है।

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