मायावती ने यूपी में अपनी मूर्तियां लगाए जाने को सही ठहराया है। इस बारे में बसपा सुप्रीमो की ओर से मंगलवार को सुप्रीम में जवाब पेश किया गया था।

मायावती का कहना है कि यदि अयोध्या में भगवान राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति लग सकती है तो मेरी क्यों नहीं।

मायावती ने अपने हलफनामे में बताया कि देश में मूर्तियां लगाने की पुरानी परंपरा रही है। कांग्रेस के राज में देशभर में नेहरू, इंदिरा, राजीव और पीवी नरसिम्हा राव की मूर्तियां लगाई गईं और इस पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए खर्च किए गए।

लेकिन तब न तो किसी ने मीडिया में इसके खिलाफ आवाज उठाई गई और ना ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई।

मायावती ने गुजरात में सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति लगाने पर भी सवाल खड़ा किया गया और कहा, उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ 200 करोड़ रुपए खर्च कर राम की मूर्ति लगाने की योजना बना रहे हैं।

इससे पहले मुंबई में शिवाजी, लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी, आंध्र प्रदेश में वायएस राजशेखर रेड्डी की मूर्तियां लग सकती है तो मेरी क्यों नहीं?

अमरावती में एनटी रामा राव की मूर्ति पर 155 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। चेन्नई में जयललिता के समाधि स्थल पर 50 करोड़ खर्च किए गए हैं।

बकौल मायावती, उन्होंने अपना जीवन दलितों के उत्थान पर खर्च कर दिया है। यही कारण है कि उन्होंने शादी भी नहीं की। लोगों की इच्छा थी कि उनकी मूर्तियां लगे।

जनता की भावनाओं को समझते हुए ही विधानसभा ने इसकी मंजूरी दी थी और वोटिंग के बाद फंड जारी किया था। लेकिन कुछ लोग एक दलित महिला को मिल रहे ऐसे सम्मान को नहीं पचा पा रहे हैं।

इन दलीलों के साथ उन्होंने मांग की कि इस मामले में रवि कांत व अन्य द्वारा दाखिल की गई याचिका खारिज की जाए।

अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियां लगाए जाने पर माया ने कहा, इससे पहले हाथी भीमराव आम्बेडकर की बनाई रिपब्लिक पार्टी का चिह्न भी रहा है।