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यादें : छुक छुक करती रेल गाड़ी

nishat-siddiqui

pic by _rajendr chouhan

छुक छुक करती ये रेल गाड़ी कहीँ निज़ाम , कहीँ हिंगोली तो कहीँ राजपुताना के नाम से जानी जाती है। लगभग 150 साल के सफ़र के बाद आखिर हमारी ये छुक छुक गाड़ी अब जवान और आधुनिक होने वाली हैं। हो भी क्यों न यौवन के लिए इस ने न जाने कितने प्रयास किए। दिन रात लोहे की इन पटरियों पर सैकड़ों मील का रास्ता तय किया है इसने न जाने कितने जीवनों को जिया हैं। हर किसी दुःख सुख में बराबरी की हिस्सेदार ये मीटरगेज रेल अब अपने बचपन को पीछे छोड़ आगे बढ़ने वाली हैं। कभी हम भी बचपन में अपने पता पिता के साथ इस गाड़ी में सफर करने के लिए निकले थे। आज जब इस लाल डिब्बो वाली गाड़ी का अंतिम फ़ेरा हैं तो फिर कैसे अपने आप को रोक सकते हैं।

चलये आप को ले चलते हैं बचपन से जवानी और सुख दुःख के हर पल में हमारे साथ चलने वाली रेल में। आप के सामने मेरे मन में चल रहे चित्रों का चित्रण करना चाहता हूँ। सुबह रेल के सफ़र पर जाने का रोमांच रात में सोने भी नहीं दे रहा था। बस यही हल था के कब सूरज की पौ फूटे और गुलाबी ठण्ड में चल पड़े एक विशाल इतिहास की साक्षी रही मीटरगेज ट्रेन की यात्रा पर। अभी दिन निकाला ही था की मोबाईल की घंटी बज पड़ी। जल्दी में फोन उठाया और कहा ” हैलो ” दूसरी तरफ से आवाज आई “निशात जल्दी से आजा मेने ट्रेन की टिकट ले ली है”। वह आवाज़ खंडवा के वरिष्ठ फ़ोटोग्राफ़र राजेंद्र चौहान की थी। आनन फानन अपन भी बस इतना ही बोल कर फोन काट दिए कि ” जी भईया बस दो मिनट में आया “। नाहा कर शादी के शूट का कोट निकाला और फटाफट तैयार हो कर चल पड़े रेलवे स्टेशन की तरफ। रस्ते में दो -चार लोग पूछ ही लिए “आज सुबह सुबह क्या किसी की शादी में जा रहे हो ” अपन भी बोल दिए “हां दुल्हन को विदा करने जा रहा हूँ “

स्टेशन पर मौजूद राजेंद्र भईया ने जैसे ही मुझे देखा उनकी आँखों में चमक साफ झलक रही थी की वह इस अद्भुत सफर के लिए कितने लालायित थे। बस फिर क्या था उनका “कैमरा” और “मेरे सवाल” दोनों शुरू हो गये। ट्रेन के इंजन से लेकर गार्ड की बोगी तक लोग हमें ही निहार रहे थे। इंजन ड्राइवर मुस्ताक खान को माला पहनने के लिए लोग ऐसे उतारू थे जैसे मुस्ताक भाई हज के मुकदस सफर पर जा रहे हो। माला पहनने का सिलसिला अभी जारी है था की भीड़ में एक 50 – 55 साल का व्यक्ति ये बोलते हुए निकल गया कि न जाने अब इन रास्तों पर कब नई ट्रेन दौड़ेंगी। उसका यह जिज्ञासा भरा मासूम सवाल सुनकर दिल में लगा की वह व्यक्ति शायद इसी ट्रेन के रस्ते में पड़ने वाले किसी स्टेशन का बासिंदा है। जो इस ट्रेन के बंद होने से दुःखी तो हैं पर उसे आस हैं की जल्दी न सही थोड़ी देर से ही नई ट्रेन तो चलेंगी।

हम फोटो खीचने में ही लगे थे की ट्रेन के इंजन ड्राइवर मुस्ताक भाई ने गार्ड की हरी झंडी देखते ही सीटी बजा दी। मैं और राजू भईया (राजेंद्र चौहान) दोनों पीछे के डिब्बे में सवार हो गए। उस डिब्बे में कुछ युवा कंधे पर स्कूल बैग टांगे सवार थे। मैं उनसे बात करने लग गया। उनमे से एक प्रबल दीक्षित ने बताया की वो और उस के साथी आज इस ट्रेन के सफर को यादगार बनाने निकले है। प्रबल ने बताया कि “अक्सर नर्मदा स्नान और ओम्कारेस्वर दर्शन करने इसी रेल से जाया करते थे आज जब इसका आखरी फेरा है तो फिर से इसमें सवार होकर नर्मदा स्नान करने निकल पड़े हैं। सिर्रा स्टेशन पर गाड़ी जैसे ही रुकी हम अगले डिब्बे में चल पड़े। एक एक डिब्बे में लोगों से बस यही सुनने को मिला अब इस रेल की याद बहुत आएगी। सनावद जा रहे एक परिवार से जब बातचीत होने लगी तो बताया की वह खुद बस ड्राइवर है पर इस ट्रेन से कई यादें जुड़ी होने से वह भी ट्रेन के अंतिम फेरे का साक्षी बनने के लिए इसी से यात्रा करने निकल पड़ा। मज़े की बात तो यह है की वह अकेला नहीं अपनी बूढ़ी माँ सहित एक साल के बेटे और पत्नी को भी साथ ले आया शाहरुख से जब पूछा की जब कोई काम नहीं था तो क्यों ले आये सभी को उसका जवाब सुनकर आप भी शायद उसकी भावना तक पहुच जाए शाहरुख़ ने मुस्कुराते हुआ कहा “कभी मेरी माँ मुझे लेकर इसी गाड़ी से सनावद में पीर बाबा की मज़ार पर आया करती थी अब ये रेल बंद हो जायेगी इसलिए में भी अपनी माँ पत्नी के साथ अपने बेटे को ले आया ताकि मेरा बेटा भी इस ट्रेन का सफर कर सके”।

इस राजपुताना रेल के किस्से तो इतने के की सुनाने बैठे तो सदियाँ बीत जाए। मेरे साथ सफर कर रहे राजू भईया (राजेंद्र चौहान ) ने भी बताया की कभी इसी रेल में सफर करते करते घरवालों ने उनकी शादी तय कर दी थी। इस रेल के रस्ते में पड़ने वाला प्रकृतिक सौन्दर्य आज भी मन को बच्चा बना देता हैं। वो कालाकुंड के पास का विशाल झरना , रस्ते में पड़ने वाले बुगदे (टनल), झाड़ियां , टांटिया मामा को रुक कर ट्रेन का सलामी देना एक एक पल एक एक क्षण को यादगार बनाने इस सफर में बहुत सी कहानियां मिली हैं फिर कभी किसी मौके पर इस अद्भत और यादगार सफर के पलों को आप से साझा करूँगा। मुझे पता हैं अगर आपने भी इस ट्रेन से सफर किया है तो आप भी अभी उन्ही खयालो में खोए हुए होंगे जिनमे मै हूँ। तो अपनी यादों को सजोकर रखें। फिर मिलते है जब नई ट्रेन शुरू होगी फिर साथ चलेंगे उसी शानदार सफर पर …….

nishat-mohammad-siddiqui_tez-newsनिशात सिद्दीकी

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