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जब दरिंदों ने मंदिर के अंदर भी नहीं बख्शा, यौन शोषण की खौफनाक कहानियां

हॉलीवुड डायरेक्टर हार्वे वींसटन द्वारा किए गए यौन उत्पीड़नों के खिलाफ सोशल मीडिया पर #Metoo नाम से एक कैंपेन चलाया जा रहा है जिसका मकसद यह है कि दुनिया में जितनी भी महिलाएं यौन शोषण या किसी भी गंदगी का शिकार हुई हैं, तो वे बिना किसी झिझक के अपना अनुभव शेयर कर सकें। सभी देशों के लोग इस कैंपेन के जरिए अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। वहीं भारत की बात करें तो एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक पांच मिनट में एक महिला छेड़छाड़ का शिकार होती है।

भारतीय महिलाओं ने भी अपने साथ घटी घटनाओं को सोशल मीडिया पर साझा किया है। महिलाओं ने बताया कि कैसे वे मंदिर जैसी पवित्र जगहों और अपने घरों में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई हैं। आज हम आपको ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहनी बताने जा रहे हैं, जो कि कहीं न कहीं पुरुषों की गंदी नजर का शिकार हुई हैं।

वैशाली खुलबे जो कि पूर्वी दिल्ली की रहने वाली हैं, उन्होंने बताया कि जब वे 4-5 साल की थीं, तब वे यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थीं। बस, मेट्रो, क्लब, रोड़ या चाहे घर हो हर जगह महिलाओं का शोषण किया जाता है। मैंने पब्लिक में पुरुषों को मास्टरबेट करते देखा है। जब भीड़ में होते हैं तो कपड़ों में हाथ डालने की कोशिश होती है, शरीर की किसी जगह को छूने के लिए पिंच करते हैं और कई बार तो पीछा भी होता है।

चंदना भौमिक लिखती हैं, मैं दस कजिन जो कि लड़के हैं उनके साथ बड़ी हुई हूं। हमेशा हमारे साथ एक जैसा बर्ताव किया जाता था। सच बोलूं तो सबसे पहले इसका अहसास मुझे पांच साल की उम्र में हुआ था और एक लड़की होने के नाते में पहली बार डरी थी, जब मेरे एक रिश्तेदार ने गलत तरीके से मेरे सीने पर हाथ फेरा था।

जब मैं टीनेज थी तब तिरुपति मंदिर में किसी ने मेरे पीछे के अंग पर अपना हाथ टटोला जब्कि मैंने उस समय पूरे कपड़े पहने हुए थे। इसके बाद जब मैंने इंटर्नशिप करना शुरु किया तो मेरे मार्केटिंग हेड ने मुझसे मेरा शरीर साझा करने की बात कही ताकि वो अपनी क्रिएटीविटी से मुझे प्ररेणा दे सके। पूर्व पति ने मेरे साथ रेप किया था। ऑफिस में मेरे साथ काम करने वाले मुझे गंदे-गंदे मैसेज भेजते थे। जब मैंने इन सबका विरोध करना शुरु किया तो मुझे फेमिनिस्ट और न जाने क्या-क्या कहा गया।

रेवती गणेश लिखती हैं, यह तब शुरु हुआ जब मैं 13 साल की थी, इसका एहसास मुझे तब हुआ जब मैंने देखा की एक व्यक्ति मुझे घुटने से छू रहा है और जब मैं घर पहुंची तो मैंने इसके बारे में सोचा। पिछले दो सालों से मेरे साथ ऐसी कोई घटना नहीं घटी है क्योंकि मैं दो सालों से भारत में नहीं रह रही हूं। यह दुखद है लेकिन सच है। ऐसा करने वालों पर चिल्लाओ, उनसे लड़ो, अपराधियों को शर्मिंदा करो।

केरल की रहने वाली निम्मी एलिजाबेथ ने अपनी कहानी साझा करते हुआ लिखा मैं छह साल तक भारत में रही हूं। मैंने परिवार, दोस्तों, ऑफिस के साथियों और अकेले कई जगह घूमीं हैं। ऐसे बहुत तो अनुभव रहें हैं। बहरैन इंडियन स्कूल की चौथी क्लास की बात है, क्लास का मॉनिटर आखिर तक रुकता था जब तक की सारे छात्र क्लास से न निकल जाएं।

इसका एहसास मुझे बाद में हुआ कि वह आखिर ऐसा क्यों करता था, क्यों वह सबसे आखिर में निकलता है। इंटरवल के समय छात्रों पर गंदे तरीके से हाथ टटोलने की कोशिश की जाती थी और यह कोई और नहीं स्कूल का एक मलयाली चपड़ासी करता था। यह घटना बहुत पुरानी है और इसे सामने लाकर मैं स्कूल का नाम खराब नहीं करना चाहती लेकिन लोगों को पता होना चाहिए की ऐसी घटनाएं नामी-गिरामी संस्थानों में भी होती हैं।

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