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मध्यान भोजन के नाम पर खाना पूर्ति

Midday Meal

Midday Meal DEMO – PIC

मध्यान भोजन देश की सबसे बरी महत्वकांछी योजना रही है और वास्तव मैं ऐसा है भी वह इसलिए की योजनाओं के तहत देश के करोरों उन गरीब बच्चों को स्कूल मैं शिक्षा के साथ स्वास्थ को भी सुधरने की कोसिस है . साथ ही इस योजना मैं देश के इतने बरे कर दाताओं के कर का धन भी शामिल हैं . साल 2015-2016 मैं पुरे भारत के लिए 9236.40 करोर रुपये इस योजना के तेहत आवंटित किये गये . आशा की जारही है की इस योजना से लग भग 1.7 करोर बच्चों को योजना का लाभ मीलेगा . सन 2008-2009 मैं मध्यान भोजन योजना सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक सरकारी , सरकार की तरफ से अनुदान प्राप्त स्कूल , मदरसों जिसे सरकार अनुदान देती हैं सभी सैक्षानिक संस्थाओं मैं मध्यान भोजन योजना को लागू किया गया . मध्यान भोजन योजना लागू करने के पीछे एक यह भी उद्देश्य था की भारत जैसे देश मैं जहाँ कुपोषण एक बरा खतरा है , इस योजना के तहत पोष्टिक खाद्य पदार्थों के आवंटन से बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराया जाएगा और उनको शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाए जिससे आगे चलकर यही बच्चे देश के प्रगति मैं एक अहम करी साबित होंगे .

एक पुराणी कहाबत है की दूध की रखवाली की जिम्मेदारी मिली बिल्ली को इस मध्यान भोजन के सम्बन्ध मैं यह कहाबत चरितार्थ होता हुआ दिखाई जान परता है. मध्यान भोजन को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी मिली स्कूल के हेड मास्टर एवं कुछ चुनिन्दा लोगो को जो पहले से ही बच्चों की जिंदगी को सुधरने से ना- नुकर कर रहे थे . अलीगंज प्रखंड के मध्य विद्यालय हिलसा मैं बिहार मोबाइल वाणी के सामुदायिक रिपोर्टर चन्द्र शेखर आजाद इस योजना के हकीक़त की परताल करने पहुंचे तो हकीक़त बही धाक के तीन पात नज़र आई , सरकार के सभी दाबों की धज्जियाँ उराते यहाँ के शिक्षक नजर आये . सरकारी योजना के तहत प्रत्येक दिन के लिए मध्यान भोजन के लिए मिनु बना है जिसके तहत बच्चों को मध्यान भोजन मिनले का प्रबंध हैं जिसमें , पुलाव , अंडा , सब्जी , डाल इत्यादि मिलनी चाहिए . लेकिन इन स्चूलों मैं तो बच्चों ने आज तक कभी पुलाव खाया ही नहीं. हिलसा गाँव के अभिभावक दिनेश सिंह , रंधीर सिंह , सुंदर सिंह ,किट्टू माझी, सरोजनी देवी और साथ मैं छात्र सौरभ , रिंकू , बबिता बताते हैं की आज तक उन्हों कभी भी स्कूल मैं पुलाव नहीं खाया , मध्यान भोजन भी कभी कभी नहीं बनता नतीजा छात्रों को भूखे पेट ही घर लौटना परता है .

धरातल पर मध्यान भोजन की अनियमितताओं और छात्रों ,अविभावकों मैं बढती असंतोष को ध्यान मैं रखते हुए बिहार मोबाइलवाणी साथ ही साथ सभी जिले के मोबाइल वाणी पर चन्द्र शेखर आजाद की रिपोर्ट को बुनियादी तथ्य मानते हुए एक महीने तक लगातार कार्यकर्म चलाया और कार्यकर्म मैं लोगों से पुछा गया की अगर वह इस मुद्दे का सर्थन करते हैं और वह चाहते हैं की इस मुद्दे को मोबाइल वाणी सरकार या सम्बंधित अधिकारी के समक्ष ऊठाये तो आप अपना समर्थन कार्य करम के चलते दौरान अपने मोबाइल से नंबर 9 दबाकर समर्थन करें. इस कार्यकर्म का परिणाम यह निकला की एक महीने मैं कुल 1873 लोगों ने अपना समर्थन दिया जिसमें केवल जमुई जिले से ही 1253 लोगों ने मुद्दे का समर्थन किया .

मोबाइल वाणी ग्राम्वानी कम्युनिटी मीडिया द्वारा सम्युदायिक विकास और समसामयिक समाचारों को मोबाइल द्वारा निशुल्क सुनने के लिए एक कार्यकर्म चलाया जा रहा है ताकि ग्रामीण अपने जिले , राज्य की खबरें खास कर विकास शील ख़बरों पर अपनी राय बनाएं , विकास के मुद्दे पर सम्बंधित विभाग को अवगत कराएं और लोग अपने मुद्दे पर जागरूक हो सके तो विकास को गति मिलेगी और धरातल पर विकास शील योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से होगा . इसी बुनियादी सोच के साथ मोबाइल वाणी इस मध्यान भोजन योजना की गंभीरता को देखते हुए जन शक्ति अभियान चलाया और महीने के आखिर मैं एक आवेदन जमुई जिले के अलीगंज प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी को दिया जिस मैं मांग की गयी है की मध्यान भजन मैं चल रही अनियमितताओं पर अपना धयान आकृत करें और मुद्दे के निपटान के लिए जरूरी कदम उठाएं .

इस तरह के कार्य क्रम के लिए सभी साथियों खास कर मिडिया कर्मियों के विशेष सहयोग की जरूरत है ताकि हम सब मिलकर समाज के विकास को गति दे सकें . हम आशा करते हैं की अलीगंज प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी इस बावत ध्यान आकृत करेंगे ताकि स्कूल मैं बच्चों को सही मध्यान भोजन मिले और कभी भी भूखे पेट घर न लौटना परे क्योंकि इन बच्चों के घर पर तो पहले से ही भोजन का अभाव है .

लेखक – सुल्तान अहमद

चन्द्र शेखर आजाद की रिपोर्ट को अगर सुनना चाहते हैं तो निचे लिखे लिंक पर क्लिक करें .
http://voice.gramvaani.org/vapp/mnews/137/show/detail/602743/

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