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मोबाइल वाणी के जरीए ग्रामीण अपने हक के लिए हुए मुखर

0 002भारत विविधता मैं एकता के लिए संसार भर मैं जाना जाता है , 780 से जयादा भाषाओँ मैं लोग अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करते हैं. भारत का संबिधान हर नागरिक को आज़ादी देता है की वह अपनी भाषा मैं अपनी बात कहे और समझे . लेकिन जाने अनजाने कुच्छ सदियों से भारत का वातावरण कुछ ऐसा बदला जहाँ चंद भाषाओं का बोलबाला होगया . रायटर्स के अध्यन के मुताविक पीछले 50 वर्षों मैं 220 से जयादा भाषाएं विलुप्त हुई है. और इससे कहीं जयादा भाषाएँ विलुप्त होने की कगार पैर हैं. तो निश्चय ही कोई ऐसा कदम उठाना होगा जिससे इन भाषाओँ को संरक्षण मिले और नागरिक को अभिव्यक्ति का अधिकार .

हर नागरिक को उनको अपनी भाषा मैं बोलने का अधिकार मिले ,मुद्दे जो आम नागरिक की जिंदगी को सबसे जयादा प्रभावित करते हैं उनपर अपनी राय जनता और सरकार के सामने लाने के लिए , सरकार को अपनी जिम्मेदारी निष्ठां पूर्ण निभाने और सरकारी खर्चे मैं पारदर्शिता लाने के लिए मध्य प्रदेश और देश के दुसरे राज्यों मैं ग्राम्वानी द्वारा सामुदायिक मीडिया की शरुआत की गयी है .

ग्राम्वानी दिल्ली स्थित एक सोशल टेक्नोलॉजी कंपनी है जिसकी पहेल से हाल ही मैं मध्य प्रदेश मैं सामुदायिक मीडिया कार्य करम के तहत मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी की शुभारम्भ हुई है . जनता अब अपनी बात , अपने मुद्दे , अपनी प्रतिभा मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी पर अस्सानी से दूसरों , सरकारी महकमों और बुद्धिजीवी व्यक्तियों के साथ साझा कर सकते हैं वह भी ओनी भाषा मैं.

मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी को शुरू हुए अभी कुच्छ हफ्ते ही हुए की जनता अपनी शिकायत का बौछार करने लगे , इन शिकयतों को सुन कर ऐसा लगता है की प्रशाशन के प्रति इनमें काफी आक्रोश है . जनता की आक्रोश को सुनना किसी भी लोकतान्त्रिक सरकार की जिम्मेदारी और उसका निदान सरकार या प्रशाशन का कर्तव्य भी है .

जनता की रिपोर्ट :
“मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी पर खंडवा जिले के ग्राम लंगौती से द्वारकी कतारे बोल रही हैं की उनकेगाँव मैं काम की बरी समस्या है ,क्योंकि सचिव पूरा काम नहीं करवाते और नहीं ही समय से पंचायत मैं आते हैं और अगर जनता उनसे बात करने के लिए फ़ोन करते हैं तो वह फ़ोन भी नहीं उठाते हैं , काम नहीं होने से उनके गाँव के युवा पलायन करने को विवश हैं , द्वारकी कतारे की मांग है ,अगर सचिव महात्मा गाँधी रोजगार योजना के तहत लोगों को काम मुहैया कराएँ तो लोगों का पलायन रूक सकता है”

वहीँ दूसरी तरफ सुभाष ठाकरे , सौसर तहसील के छिन्द्वारा जिले से कह रहे हैं की फरवरी माह मैं ओला वृष्टि की वजह से किसानों का फसल वर्वाद होगया था , सरकारी घोसना के मुताविक सभी किसानों को मुआवजा मिलना था . प्रशाशन द्वारा वर्वाद फसल का सर्वे किया गया और घोसना किया गया जिन किसानों का फसल ५० प्रतिशत या उससे अधिक नुकशान हुआ है उन्हें 100 प्रतिशत मुआवजा दिया जायेगा . इन घोषणाओं के वावजूद मुआवजे मैं फेर वदल किया गया और अभी तक किसी भी किसान को मुआवजे की राशी नहीं मिली है . किसानों ने कई वार अपना आवेदन तहसील कार्यालय मैं जमा करवाया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है . किसान अधिकारयों के ताल मटोल के रवैये से आहात हैं , उनकी मांग है की किसों को उनका मुआवजा जल्दसे जल्द दिया जाये ताकि वह अगले फसल की तय्यारी कर पायें .

अपरोक्त वक्तव्यों और मांगों को सुनकर ऐसा लगता है की जानता अब सही मायने मैं नागरिक पत्रकार की भूमिका निभा रहे हैं , समाज के विकास के लिए विकासशील मुद्दों को मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से सरकार और समाज के दुसरे वर्गों , समुदायों तक पहुँचाने लगे हैं. अब समाज और सरकार की जिम्मेदारी बनती है की उनकी मांग पर कारगर रुख अपनाये और उसका समाधान करे.

 gramvaani

 

ऐसे कार्य करता है मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी :

अगर आप अपनी कहानी , अपने मुद्दे साझा करना चाहते हैं तो कॉल करैं निशुल न: 08800438555 पर

जब आप करेंगे तो आप का कॉल मिस्ड कॉल बन जायेगा , और कुछ समय मैं आपके पास दुसरे न: से कॉल आएगा , उसे रेसिएवे करें और सुनें .

अगर आप चल रहे सन्देश को नहीं सुनना चाहते हैं तो अगला सन्देश सुनने के लिए १ दबाएँ .

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अधिक रिपोर्ट सुनने के लिए कॉल करें मध्य प्रदेश मोबाइल वाणी पर या लोग इन करें http://voice.gramvaani.org/vapp/mnews/241/show

 लेखक : सुल्तान अहमद 

 

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